Poem aazma kar dekh lena

मुझको कभी भी आज़मा कर देख लेना | Poem aazma kar dekh lena

मुझको कभी भी आज़मा कर देख लेना

( Mujhko kabhi bhi aazma kar dekh lena )

 

 

मुझको कभी भी आज़मा कर देख लेना।
हो सके मुझसे दिल लगा कर देख लेना।।

 

एक पल भी मुझसे दूर नहीं रह पाओगे।
कितना भी फासला बना कर देख लेना।।

 

चाहे लाख नज़रें भी चुराओ मुझसे तुम।
हो सके मुझसे दिल चुरा कर देख लेना।।

 

होश में ता उम्र नही तुम आ पाओगे।
जाम नज़रों से पिला कर देख लेना।।

 

अपने ही दिल मे तुम हमेशा पाओगे।
अपनी नज़रों को झुका कर देख लेना।।

 

फिर न तुम कोई चेहरा देख पाओगे।
आईने से मुझे मिटा कर देख लेना।।

 

इतना आसां नहीं मुझको अब चुराना।
मुझ से मुझको ही चुरा कर देख लेना।।

 

बुझेगी न कभी प्यास इस जिंदगी की।
चाहे कितना भी बुझा कर देख लेना।।

 

 

रचनाकार : आर के रस्तोगी

 गुरुग्राम ( हरियाणा )

यह भी पढ़ें :-

ढूंढते ही रह जाओगे | R K Rastogi poetry

 

Similar Posts

  • त्याग निद्रा,जाग मुसाफिर | Poem Jaag Musafir

    त्याग निद्रा,जाग मुसाफिर ( Tyag nidra jaag musafir )   बीती रात ,हुआ सवेरा पक्षी कुल का, हुआ बसेरा कैसे लक्ष्य,तय होगा फिर त्याग निद्रा,जाग मुसाफिर,   सोकर कौन? कर पाया क्या? बैठ करके,खोया ना क्या? खोते वक्त, मत जा आखिर, न सोवो उठ,जाग मुसाफिर।   अपने आप, समझता क्यों न? होके सबल, सभलता क्यों…

  • सुख और दुःख | Poem sukh aur dukh

    सुख और दुःख ( Sukh aur dukh)     भेंट हुआ एक दिन सुख दुःख का दुःख ने खबर लिया तब सुख का,   दुःख बोली ओ! प्यारी बहना कितना मुस्किल तुमसे मिलना   रहती कहां?नहीं हो दिखती हर कोई चाहे तुमसे मिलना,   सुख ने दुःख को,गले लगा कर भर मन में मुस्कान,मनोहर,  …

  • छेंड़ कर | Kavita Chhed Kar

    छेंड़ कर ( Chhed Kar ) छेंड़ कर इस तरह न सताया करो, रूठ जाऊॅ अगर तो मनाया करो, दिल मेरा तेरी यादों की है इक गली, याद बनकर कभी इनमे आया करो। गीत कारों ने नज्में लिखे हैं बहुत, गीत मेरे लिए भी कोई गाया करो, इस तरह से मेरी कट पाएगी नहीं, दर्दे…

  • गुरु शिष्य का भाग्य संवारते | Kavita

    गुरु शिष्य का भाग्य संवारते ( Guru shishya ka bhagya sanwarte )   किस्मत का ताला खुल जाता, गुरु शिष्य का भाग्य विधाता। ज्ञान ज्योति जगा घट घट में, अंतर्मन उजियारा लाता।   शिल्पकार मानव निर्माता, शत शत वंदन हे गुण दाता। बुरे मार्ग से हमें बचाओ, प्रगति का मार्ग दिखलाओ।   गढ़कर नित नये…

  • पाखी की राखी | Pakhi ki Rakhi

    पाखी की राखी ( Pakhi ki Rakhi )   भाई-बहिन का रिश्ता ये प्यारा प्यारा इस प्यारे रिश्ते का प्यारा बंधन राखी खुशियों की अमिट सौगातें उमड़ रही देखो! कितनी खुश है आज ये पाखी चार दिन से देख रही, सजीले बाजार चमकीली राखियाँ, चमकते घर-बार चाँदी के वर्क से, सजी हुई मिठाइयाँ पकवानों की…

  • मौसम ने | Mausam Ne

    मौसम ने ( Mausam Ne ) बदलते मौसम का अंदाज बहुत रंग ला रहा। वायू मंडल में घटाओं को जो बिखेर रहा। पेड़ पौधे फूल पत्ती आदि लहरा रहे है। और मंद मंद हवाओं से खुशबू को बिखर रहा।। नजारा देख ये जन्नत का किसी की याद दिला रहा। नदी तालाब बाग बगीचा भी अपनी…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *