Poem on lamhon

लम्हों को कुरेदने से क्या फायदा | Poem on lamhon

लम्हों को कुरेदने से क्या फायदा!

( Lamhon ko kuredne se kya fayda )

 

घोर अंधकार है आफताब तो लाओ,
हाथ को काम नहीं रोजगार तो लाओ।
हुकूमत बदलने से कोई फायदा नहीं,
मर्ज है पुरानी नया इलाज तो लाओ।

 

नफरत की सुनों दीवार उठानेवालों,
प्यार की कोई नई शराब तो लाओ।
कहाँ लिखा है किसी का कत्ल करो,
जिसमें लिखा है वो किताब तो लाओ।

 

खौफ न खाए कोई इंसान- इंसान से,
उखड़े न दम लहर की वो आब तो लाओ।
पत्थर जैसा दिल बनाने से क्या फायदा,
ठंडा न करे खून वो आग तो लाओ।

 

ऐसे रहो कि जैसे कभी कुछ हुआ ही नहीं,
इस तरह का कोई इंकलाब तो लाओ।
खिजाओं का रंग करता क्यों नहीं धानी,
मौसम के दिल में वैसा ख्वाब तो लाओ।

 

शबनमी कतरों से ये नहाए समूचा विश्व,
ऐसा कोई आसमान में बादल तो लाओ।
फलक ओढ़कर कोई कब तक सोएगा,
इसका किसी से तुम जवाब तो लाओ।

 

गरीबों की गलियों के अब पैर थक गए,
ऐ! टी.व्ही.चैनल कोई सवाल तो उठाओ।
क्या बुरा हाल है महंगाई का,समझ से परे,
करे गरीबी की तुरपाई वो साल तो लाओ।

 

भ्रष्टाचार से परेशान हैं सरकारी तालाब,
जिसमें फँसें मछलियाँ वो जाल तो लाओ।
बीते लम्हों को कुरेदने से क्या फायदा,
जो कुतर रहे हैं देश वो हिसाब तो लाओ।

 

रामकेश एम यादव (कवि, साहित्यकार)
( मुंबई )
यह भी पढ़ें:-

अंधकार पीनेवाले | Kavita andhakar peene wale

Similar Posts

  • हमसफर | Humsafar par kavita

    हमसफर ( Humsafar )    दो अजनबी बन गए हमसफर चल पड़े नई डगर प्यार के पंख ले सिलसिले चल पड़े एक दूसरे को वो बखूबी समझते रहे एक दूसरे का सम्मान आपस में करते रहे जीवन में रिश्तो के हर रंग भरते रहे कदम दर कदम आगे बढ़ते रहे कुछ मैंने कहा वह उसने…

  • मन शिवालय हो जाए | Geet Man Shivalay ho Jaye

    मन शिवालय हो जाए ( Man shivalay ho jaye )    ओंकार निकले कंठो से, बम बम भोले शिव आये। मनमंदिर में दीप जलाऊं, घट उजियारा हो जाए। लोटा भर के जल चढ़ाऊं, गजानंद दुख हर जाए। हर हर महादेव कानो में, शिव शंकर शंभू भाए। मन शिवालय हो जाए बाघाम्बर धारी शिव भोले, अगम…

  • मेरे श्री रामलला | Mere Shriram Lala

    मेरे श्री रामलला ( Mere Shriram Lala ) ( 1 ) राम नाम की सहर्ष इस ज्योति को हृदय में जगाए रखना तुम ! आंगन को अपने सुंदर पुष्पों से मधुबन सा सजाए रखना तुम ।। मर्यादा में रहकर सम्मान मिला हैं मेरे श्री राघव को ! प्राण प्रतिष्ठा फिर से होगी घर अयोध्या बनाएं…

  • दिखावा | Kavita Dikhawa

    दिखावा ( Dikhawa )   शुभचिंतक हैं कितने सारे बाहर गोरे भीतर कारे मुखरा-मुखरा बना मुखौटा मिट्ठू दिखते जो हैं सारे लेकर आड़ झाड़ को काटे नए और पैने हैं आरे तन तितली मन हुआ तैयार ऐसे लोगों के पौ बारे सब कुछ दे देते हँसकर गए हाशिये में वे प्यारे दृष्टि हो गयी इतनी…

  • वो एक क़िताब | Poem on kitab

    वो एक क़िताब ( Wo ek kitab )      सम्पूर्ण इतिहास समेटकर रखतीं वो एक क़िताब, देश और विदेशों में पहचान बढ़ाती यहीं क़िताब। शक्ल सूरत से कैसे भी हो देती सबको यें सौगात, हर प्रश्न का उत्तर है एवं श्रेष्ठ सलाहकार क़िताब।।   क़िताबें पढ़कर आगें बढ़ता संसार का यें नर नार, भरा…

  • दिवाली फिर आई | Deepawali kavita in Hindi

    दिवाली फिर आई 1 हर दिल अज़ीज, सदियों पुरानी, त्यौहारों की रानी, दिवाली फिर आई। 2 उर्ध्वगामी लौ से, सतत विकास करने, पुरातन को शोधने, दिवाली फिर आई। 3 ज्ञान के आलोक से, अज्ञान-तम मिटाती, हृदय ज्ञान जगाती, दिवाली फिर आई। 4 मति-देव का पूजन, महालक्ष्मी आरती, दरिद्रता दूर भगाती, दिवाली फिर आई। 5 सकल…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *