Humnava par kavita

हमनवा | Humnava par kavita

हमनवा

(  Humnava )

 

तुम प्रेरणा हो मेरी
मैं संगिनी तुम्हारी

तुम प्रियवर हो मेरे
मैं प्रियतमा तुम्हारी

तुम कविता हो मेरी
मैं कलम तुम्हारी

तुम श्रंगार हो मेरे
मैं संगिनी तुम्हारी

तुम जीवन हो मेरे
मैं धड़कन तुम्हारी

तुम प्राणश्वर हो मेरे
मैं दामिनी तुम्हारी

तुम मनमोहन हो मेरे
मैं मोहिनी तुम्हारी

तुम संगीत हो मेरे
मैं रागिनी तुम्हारी

तुम अभिमान हो मेरे
मैं शोभना तुम्हारी

 

डॉ प्रीति सुरेंद्र सिंह परमार
टीकमगढ़ ( मध्य प्रदेश )

यह भी पढ़ें :-

नव वर्ष 2023 | Nav Varsh 2023 par kavita

 

 

Similar Posts

  • ज़माना है ना | Zamana hai Na

    ज़माना है ना! ( Zamana hai na )   हंसो यारो हंसो खुल के ,रुलाने को ज़माना है करो बातें बुलंदी की ,गिराने को ज़माना है ॥ नहीं होगा कोई भी खुश ,ऊंचाई देख कर तेरी गगन उन्मुक्त में उड़ लो, डिगाने को ज़माना है॥ लगाओ सेंध बाधाओं में, तोड़ो बेड़िआं सारी निरंतर चल पड़ो,पीछे…

  • प्यारा भोलेनाथ को है सावन | Bholenath par Kavita

    प्यारा भोलेनाथ को है सावन ( Pyara bholenath ko hai sawan )    यह महीना है प्यारा-न्यारा सावन, सभी के मन को सावन है भावन। सोमवार इसमे है भोले को प्यारा, शिवपूजा आराधना विधान सारा।। सावन के पहले-आख़री सोमवार, सावन का परम्परा व्रत एवं स्नान। प्यारा भोले नाथ को भी है सावन, जुलाई अगस्त में…

  • रेत का ताजमहल | Ret ka Taj Mahal

    रेत का ताजमहल ( Ret ka taj mahal )    दरअसल था महल रेत का ढह गया ताजमहल रेत का स्वप्न है या असल कि पुनः बन गया ताजमहल रेत का प्रेम-मोहब्बत पर पलल खा रहल बड़ा भाव ताजमहल रेत का धनकुबेरो का करें खूब सारिका सेवा-टहल ताजमहल रेत का   डॉ. सारिका देवी अमेठी…

  • श्री राम कथा | Shri Ram Katha

    श्री राम कथा ( Shri Ram Katha )   श्री राम कथा वंदन शुभकारी त्रेता युग हिंद अखंड धरा,अयोध्या नगरी अनूप । दिव्य भव्य रघुवंश कुल,दशरथ लोकप्रिय भूप । कैकयी सुमित्रा कौशल्या,तीन राज राज्ञी गुणकारी । श्री राम कथा वंदन शुभकारी ।। राम भरत शत्रुघ्न लक्ष्मण,चार आज्ञाकारी पुत्र । श्रवण प्राण हरण कारक,राजा दुःख कष्ट…

  • कृष्ण | Kavita Krishna

    कृष्ण ( Krishna )     नयन भर पी लेने दे, प्रेम सुधा की साँवली सूरत। जनम तर जाएगा हुंकार,श्याम की मोहनी मूरत।   ठुमक  कर  चले  पाँव  पैजनी, कमर करधनियाँ बाँधे, लकुटी ले कमलनयन कजराजे,मोरध्वंज सिर पे बाँधे।   करत लीलाधर लीला मार पुतना, हँसत बिहारी। सुदर्शन चक्रधारी बालक बन,दानव दंत निखारी।   जगत…

  • शिव शिव बोल ज्ञान पट खोल | Shiv Shiv Bol

    शिव शिव बोल ज्ञान पट खोल ( Shiv Shiv Bol Gyan Pat Khol )    शिव शिव बोल ज्ञान पट खोल। हर हर भज नर नाम अनमोल। बाबा भोलेनाथ जय महाकाल। गंगा जटा सोहे चंद्र सोहे भाल। त्रिनेत्र त्रिशूलधारी नीलकंठ त्रिपुरारी। भस्म रमाए शिवशंकर बाघाम्बर धारी। डम डम डमरू बाजे नटराज नृत्य धारे। बिल्व पत्र…

One Comment

  1. दां साहित्य, का बहुत-बहुत धन्यवाद

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *