धीरेंद्र शास्त्री | Dhirendra Shastri par Kavita

धीरेंद्र शास्त्री

( Dhirendra Shastri ) 

 

धीरेंद्र शास्त्री उनका नाम
गड़ा छतरपुर उनका धाम

बालाजी के वे सच्चे भक्त
है चलते भंडारे दोनों वक्त

छोटी उम्र में नाम है पाया
गुरु रज को शीश लगाया

संस्कारों की देते शिक्षा
राम नाम की देते दीक्षा

विश्व में प्रभु का नाम बढ़ाया
भक्ति से जनसैलाब है आया

अर्जी लगी और कष्ट हटाया
बागेश्वर पर विश्वास जताया

हरते संकट वे सबकी पीर
विश्वास करो और रखो धीर

चेहरे पर मीठी मुस्कान लिए
बालाजी के ही गुणगान किए

बिना खर्चा रुपया अर्जी लगे
बागेश्वर की ऐसी मर्जी चले

सात्विक गुणों को अपनाओ
बागेश्वर की शरण में आओ

भूत प्रेत रोग से मुक्ति पाओ
बागेश्वर की पेशी पर आओ

अहोभाग्य दर्शन जो पाए
आशीर्वाद प्रभु का पाए

 

डॉ प्रीति सुरेंद्र सिंह परमार
टीकमगढ़ ( मध्य प्रदेश )

यह भी पढ़ें :-

वाह रे अभिनेता महान | Kavita Wah re Abhineta Mahan

 

 

 

Similar Posts

  • बातें

    बातें * करो सदा पक्की सच्ची और अच्छी! वरना… ये दुनिया नहीं है बच्ची, सब है समझती। समझाओ ना जबरदस्ती! बातें… ओछी खोखली और झूठी नहीं हैं टिकतीं। जगह जगह करा देतीं हैं बेइज्जती! सच्चाई छुप नहीं सकती, बेवक्त है आ धमकती! होश फाख्ता कर देती है, सिर झुका देती है। तेज़ ही उसकी इतनी…

  • झाडू वाला | Jhadu wala | Kavita

    झाडू वाला ( Jhadu Wala )   कचडे वाला आया……|| 1.ये कौन आया सुबह-सुबह, कब से शोर मचाता है | खर-खर की करता आवाजें, हमें सोते हुए जगाता है | कचडा वाला आया कहकर, लम्बी आवाज लगाता है | भैया-भाभी कचडा दे दो, कहकर कचडा ले जाता है | कचडे वाला आया……|| 2.पूँछा मैने माँ…

  • हर तमन्ना खाक होकर रह गई | Tamanna poem

    हर तमन्ना खाक होकर रह गई ( Har tamanna khak hokar rah gai )   हर तमन्ना खाक होकर रह गई हसरतें सब राख हो कर रह गई   भुला दिया हमको हमारे अपनों ने प्यारी यादें सारी दरिया में बह गई   बन चले साथी सफर में अब कई प्यार की धारायें सब पीछे…

  • मोबाइल- hindi kavita

    मोबाइल   –>मोबाइल से क्या सही,क्या गलत हो रहा है || 1.नहीं था बड़ा सुकून था, दोस्त परिवार के लिये समय था | दिल मे चैन दिमाक शांत, सुखी संसार के लिये समय था | न जाने क्या भूचाल सा आया, समय लापता सा हो गया | आज हर इंसान व्यस्त है, बस मोबाइल सब…

  • नवरात्रि पर्व ( अश्विन ) चतुर्थ दिवस

    नवरात्रि पर्व ( अश्विन ) चतुर्थ दिवस भुवाल माता तार दो तार दो हमको , माता तार दो ।राग – द्वेष का पर्दा हमारे नयनों के आगे छाया ।भव भ्रमण की ठोकरें खाकर भी हम सम्भल नहीं पाये ।भुवाल माता तार दो तार दो हमको , माता तार दो ।संसार में घूम घूम कर देखा…

  • धन्य धन्य पावन भूमि | Pavan Bhumi

    धन्य धन्य पावन भूमि ( Dhanya dhanya pavan bhumi )   कल कल पावन गंगाधारा हिम शिखर लगे प्यारा धन्य धन्य मां भारती धन्य धन्य भारतवर्ष हमारा सदा लूटाती स्नेह धारा मां ममता की मूरत सारी आशीषो से झोली भरती जननी जन्मभूमि प्यारी धन्य धन्य वीर प्रसूता प्राण न्योछावर कर जाते धन्य लाल भारतमाता तेरे…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *