Dharti ki vedana

धरती की वेदना | Dharti ki vedana

धरती की वेदना

( Dharti ki vedana )

 

सुनो तुम धरती की वेदना
समझो पहले इसे तुम यहां!

ऋतुएं बदल रही है क्यों आखिर
क्यों तापमान रहने लगा बढ़ा चढ़ा

तुम्हारे मन को जो प्रश्न बेचैन करें
हां वही तो है इस धरती की वेदना।।

कहीं पर खनन हो रहा मृदा का
कहीं अब जंगल नहीं रहा घना,

कहीं धरती खोद रहे खनिज के लिए
कहीं जल के लिए रोज खुद रहा कुआं

कहीं सुनामी आ रही है तो कही पर ,
पढ़ रहा हैं धरती पर भयंकर सूखा ।।

कहीं नदियां प्रदूषित हो रही धरा पर
तो कहीं प्रदूषित हो रहा अब आसमां

जब बढ़ रहा है देखो प्रकृति का खनन
तब सोचो जरा मनुष्य कैसे खुश हुआ ,

करके मनमानी आधुनिक तो हो गया
प्रकृति असंतुलित कर खुद संतुलित वो कहां रहा।

धरती मां की वेदना को पहले तुम समझो जरा…….
यह धरती तुम्हारी मां है इस वेदना को समझो जरा।।

 

आशी प्रतिभा दुबे (स्वतंत्र लेखिका)
ग्वालियर – मध्य प्रदेश

यह भी पढ़ें :-

प्यार जिंदगी है | Pyar Zindagi

 

Similar Posts

  • हिन्दी की बात | Hindi ki Baat

    हिन्दी की बात ( Hindi ki Baat ) कहने कोहम हिन्दी को बहुत मानते हैंऔर बच्चों का प्रवेशअंग्रेजी माध्यम में करवाते हैं।ओ! दोहरी मानसिकता के लोग,मातृभाषा से दूर रहकरबच्चे का विकास होगा क्या?मातृभाषा तो सहज हीहर शिशु सीख लेता है,तो हम उस बस्ते के बोझ के साथक्यों अंग्रेजी का बोझ डालें?हिन्दी को जीवन काक्यों ना…

  • क्या खोया क्या पाया | Kya Khoya Kya Paya

    क्या खोया क्या पाया ( Kya Khoya Kya Paya )   उन गलियों से जब भी गुजरी आँखों मे अश्रुधार लिये सोच रही थी चलते-चलते कि—- यहाँ मैंने क्या खोया, क्या पाया है। पाकर सब कुछ फिर सब कुछ खोना क्या यही जिंदगी का फ़लसफ़ा है जब है फिर ये खोना या फिर पाना तो…

  • हनुमान जयंती | Kavita Hanuman Jayanti

    हनुमान जयंती ( Hanuman Jayanti )   बल बुद्धि विद्या वृष्टि, हनुमंत साधना भक्ति से कलयुग साक्षात देव अनुपमा, भक्तजन सर्व दुःख कष्ट हर्ता । अनंत सद्य मंगल फलदायक, कर्म धर्म मनोरथ पूर्ण कर्ता । अंजनी सुत जन्मोत्सव बेला, सर्वत्र आनंद आराधना स्तुति से । बल बुद्धि विद्या वृष्टि, हनुमंत साधना भक्ति से ।। चैत्र…

  • विधान | Kavita vidhan

    विधान ( Vidhan )   विधि का विधान है या नियति का खेल कोई डोर  हाथों  में उसके करतार करता सब होई   दुनिया का दस्तूर यही है जगत का विधान प्यारे बुराई का अंत बुरा भलाई दमकाती भाग्य सितारे   न्याय का विधान हमारा प्यारा है संविधान हमारा जनता को हर अधिकार दिलों में…

  • वसंत आगमन | Vasant Aagman par Kavita

    वसंत आगमन ( Vasant aagman )    कानन कुंडल घूँघर बाल ताम्ब कपोल मदनी चाल मन बसंत तन ज्वाला नज़र डगर डोरे लाल। पनघट पथ ठाढ़े पिया अरण्य नाद धड़के जिया तन तृण तरंगित हुआ करतल मुख ओढ़ लिया। आनन सुर्ख मन हरा उर में आनंद भरा पलकों के पग कांपे घूंघट पट रजत झरा।…

  • मोहब्बत उसे भी थी | Prem Kavita

    मोहब्बत उसे भी थी ( Mohabbat use bhi thi )   हां मोहब्बत उसे भी थी, वो प्यार का सागर सारा। उर तरंगे ले हिलोरे, अविरल बहती नेह धारा।   नेह सिंचित किनारे भी, पल पल में मुस्काते थे। मधुर स्नेह की बूंदे पाकर, मन ही मन इतराते थे।   कोई चेहरा उस हृदय को,…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *