Jab Seene mein

जब सीने में तूफान दबाना पड़ता है | Jab Seene mein

जब सीने में तूफान दबाना पड़ता है

( Jab seene mein toofan dabana parta hai )

 

जब सीने में तूफान दबाना पड़ता है
हर दिल में इंसान जगाना पड़ता है

जब सुदर्शन धारी चक्र उठाना पड़ता है
धर्मयुद्ध में कृष्ण बल दिखाना पड़ता है

जब घट घट में दीप जलाना पड़ता है
हौसलों से अंधेरा दूर भगाना पड़ता है

जब कलम हथियार बनाना पड़ता है
सच्चाई पर अटल हो जाना पड़ता है

जब गूंगो को बोलना सिखाना पड़ता है
जाने कितने तूफां से टकराना पड़ता है

धर्मयुद्ध में धर्मराज को आना पड़ता है
धर्मरक्षा आतुर युधिष्ठिर जाना पड़ता है

जब धर्म रक्षा हेतु वन जाना पड़ता है
दशानन दंभ हरने राम आना पड़ता है

 

कवि : रमाकांत सोनी

नवलगढ़ जिला झुंझुनू

( राजस्थान )

यह भी पढ़ें :-

शब्दों का शिल्पकार हूं | Shabdon ka Shilpkar

Similar Posts

  • शब्दों को गढ़ना सीख लिया | Shabdon ko Gadhana Seekh Liya

    शब्दों को गढ़ना सीख लिया ( Shabdon ko gadhana seekh liya )    रंग बदलती दुनिया में हमने भी बदलना सीख लिया। भाग दौड़ के जीवन में संभल के चलना सीख लिया। कुंदन बनने की खातिर ज्वाला में जलना सीख लिया। सुरभित सी पुरवाई में मादक बन बहना सीख लिया। सपने सच हो जाएंगे आंखों…

  • जिंदगी जब हम जीने लगे | Hindi Poem on Zindagi

    जिंदगी जब हम जीने लगे ( Zindagi jab hum jeene lage )    जिंदगी जब हम जीने लगे गम के घूंट थोड़े पीने लगे अश्रु टपके नयन से हमारे अपनो को वो पसीने लगे जिंदगी जब हम जीने लगे लबों को धीरे से सीने लगे बातों में वजन कितना है साबित होने में महीने लगे…

  • गोवर्धन गिरधारी | Govardhan Girdhari

    गोवर्धन गिरधारी ( Govardhan girdhari )    पूज रहा है आपको आज सारा-संसार, मौज और मस्ती संग मना रहा त्योंहार। कभी बनकर आये थें आप राम-श्याम, कई देत्य-दुष्टो का आपने किया संहार।। पहना रहे है आपको हम फूलो के हार, जीवन में भर दो हमारे खुशियां अपार। रघुकुल नंदन आप है गिरधारी गोपाल घर-घर में…

  • लघुदीप | Laghudeep

    लघुदीप ( Laghudeep )    सघन तिमिर को तिरोहित कर देती है कक्ष से नन्हीं-सी लौ लघुदीप की। टहनी से आबद्घ प्रसुन बिखर जाते है धरा पर सान्ध्य बेला तक पर, असीम तक विस्तार पाती है– उसकी गन्ध रहता है गगन में चन्द्र पर, ज्योत्स्ना ले आती है उसे इला के नेहासिक्त अंचल तक बाँध…

  • वो घास हैं

    वो घास हैं पाश हो या सफदर हाशमीया हो फिर भगत सिंहइन तीन नाम में छिपे हैं कई और नामडराया गयाधमकाया गयामारा गयाकोशिश की गई उनके विचारों को मिटाने कीक्या फिर भी मिट पाए ये नाम?क्या नेस्तनाबूद हुए उनके विचार ? वो तो घास हैंहर बार उग आते हैं कहीं ना कहींजो जगह कर दी…

  • मित्र वही | Hindi Poem on Mitra

    मित्र वही ( Mitra wahi )      मित्र वही जो खुल कर बोले हिय की बात भी मुंह पर खोले नहीं छुपाए कोई बात देता हर सुख दुख में साथ प्यार का मधुरस दिल में घोले, मित्र वही जो खुल कर बोले।   हर दुःख को वह अपना,समझे बात बड़ी हो पर ना उलझे…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *