Sharabi

शराबी की दुनिया | Sharabi

शराबी की दुनिया

( Sharabi ki duniya ) 

 

शराबी की दुनिया अब बोतल में बंद है।
मधुशाला डेरा बना बस दारू आनंद है।

नदी नाले कीचड़ में कचरे में वो जाता है।
झूम झूम शराबी राहों में शोर मचाता है।

जमीं बिकती ईमान बिके बीवी तज जाती है।
भाई बंधु कुटुंब कबीला प्रीत कहां लुभाती है।

मयखाने का रस्ता पकड़े हाला होती हाथ में।
लड़खड़ाते पांव चलते बस बोतल साथ में।

टूट चुके अरमान सारे टूटा दिल लेकर वो घूमे।
टूट जाता मद का प्याला बार-बार बोतल चूमे।

वीरान सी जिंदगी लेकर शराबी बल खाता है।
उजड़ा चमन सारा मन ही मन वो बतलाता है।

 

कवि : रमाकांत सोनी

नवलगढ़ जिला झुंझुनू

( राजस्थान )

यह भी पढ़ें :-

तन के उजले मन के काले | Tan ke Ujle Man ke Kale

Similar Posts

  • गिरे आंखों से आंसु तो क्या

    गिरे आंखों से आंसु तो क्या गिरे आंखों से आंसु तो क्या ,नहीं मिले गले उनके तो क्या ,तराने लिखने मिले थे दो डगर,नहीं लिख सके मिलन गीत तो क्या ,गिरे आंख से आंसू तो क्या …..सभी कदम तरंग की धुन में ,कोई सुने कुछ कोई कुछ मन में ,मिलाते रहे बिंदुओं को रेख में,जिन्हें…

  • बेजार | Kavita Bejaar

    बेजार ( Bejaar ) पढ़ लिखकर अब क्या करे, होना है बेजार। सौरभ डिग्री, नौकरी, बिकती जब बाजार।। अच्छा खासा आदमी, कागज़ पर विकलांग। धर्म कर्म ईमान का, ये कैसा है स्वांग।। हुई लापता नेकियां, चला धर्म वनवास। कहे भले को क्यों भला, मरे सभी अहसास।। गिरगिट निज अस्तित्व को, लेकर रहा उदास। रंग बदलने…

  • जगन्नाथ भगवान की कहानी

    जगन्नाथ भगवान की कहानी आषाढ़ मास शुक्ल पक्ष द्वितीया शुभ दिन, निकलती है जगन्नाथ भगवान के सवारी। वर्ष भर में आता है एक बार , देखने को इसे भीड़ उमड़ती है भारी। साथ रहते भाई बलभद्र चक्र सुदर्शन, और है साथ लाडली बहना सुभद्रा प्यारी। पांव नहीं है छोटे हाथ अधगढ़ी सी मूरत, धन्य हुए…

  • लफ़्ज़ों की हकीकत | Lafzon ki Haqeeqat

    लफ़्ज़ों की हकीकत ( Lafzon ki Haqeeqat )    मैं तुम्हें लफ़्ज़ों में समेट नही सकती क्योंकि— तुम एक स्वरूप ले चुके हो उस कर्तार का– जिसे मैं हमेशा से गृहण करना चाहती हूँ किन्तु– समझा नही पाती तुम्हें कि– अपने विजन को छोड़कर यथार्थ जीने का द्वंद्व वाकई में कितना भयप्रद है। नकार देती…

  • मकर संक्रान्ति

    मकर संक्रान्ति मकर संक्रान्ति पर्व परहमारे जीवन में नवचिन्तन का सृजन होंऔर आशा हमारे जीवन केहर पल को उत्साह से भरती जायें ।क्योंकि सकारात्मक जीवनव चिंतन का अपना एकअलग ही आनंद और उत्साह है,इससे दुःख की धारा का प्रवाहस्वतः ही पड़ जाता मंद है ।मरना सिर्फ एक ही दिन परजीने के दिन तो अनेक है,सत्य…

  • कवि और कुत्ता

    कवि और कुत्ता मैं कवि हूॅं,आधुनिक कवि हूॅं।शब्दों का सरदार हूॅं,बेइमानों में ईमानदार हूॅं । नेताओं का बखान करता हूॅं,सरकार का गुणगान करता हूॅं,योजनाओं की प्रशंसा करता हूॅं,फायदे का धंधा करता हूॅं,डर महराज का हैपीले यमराज का है। मैं संयोजक हूॅंसपा, बसपा, भाजपा, कांग्रेस का,मुझे महारत है रंग बदलने का,किसी मौसम, किसी परिवेश का,उधार में…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *