Jati Pratha par Kavita

जाति है कि जाती नहीं | Jati Pratha par Kavita

जाति है कि जाती नहीं

( Jati hai ki jaati nahin ) 

 

कई सारी ऐसी जातिया है जो यह जाती ही नही,
खुशियों के पलों को ये कभी आनें देती ही नही।
काश्मीर से लेकर घूम लो चाहें तुम कन्याकुमारी,
मंज़िल पर हमको अपनी पहुंचने देती ही नही।।

सबसे पहले पूछते है कौन जाती के हो मेरे भाई,
चाहें ले विद्यालय में प्रवेश चाहें शादी या सगाई।
मन्दिर मस्जिद जाएं चाहें कोई चर्च या गुरूद्वारा,
ना जाने यह ऐसी रीत कब-किसने क्यों बनाई।।

एक सूरज एक चंद्रमा और एक धरातल है भाई,
काम किसी का छोटा ना होता चाहें करें सफाई।
दुनिया के सारे लोग है अच्छे न करें कोई लड़ाई,
एक दूजे को नीचा न समझो चाहें लोग-लुगाई।।

क्या छोटी जाति में जन्म-लेना है यह अभिशाप,
75 साल आज़ादी को हुआ‌ कब समझेंगे आप।
एक तरह से आना सबका व एक तरह से जाना,
जैसे तन को साफ़ रखते हो मन भी करें साफ़।।

एक है ख़ून सबका जिसका होता है ये रंग लाल,
धर्म-जाति को लेकर मानव नज़रिया ये संभाल।
जातिवाद के नाम पर कोई मत करो ये भेदभाव,
पड़ता है इससे बुरा असर समाज के हर लाल।।

 

रचनाकार : गणपत लाल उदय
अजमेर ( राजस्थान )

 

Similar Posts

  • बरसात का आगमन | Kavita Barsaat ka Aagman

    बरसात का आगमन ( Barsaat ka Aagman ) एक गौरैया बारिश में अपने पंख फैलाकर जब नहाती है तब सूचना देती है वह बारिश के आगमन का। और बादल आपस मे टकराकर टूटते है, बिखरते ही अपनी बूंदो को इस धरा पर दूर किसी बस की खिड़की में तब झाँकता दिखलाई देता है एक धुंधला-सा…

  • आवारा धूप | Awara Dhoop

    आवारा धूप ( Awara dhoop )   धूप तो धूप ही होती है इस कोहरे ठंड से ठिठुरते शहर में धूप का इंतजार रहता है सबको कहीं से थोड़ी सी धूप मिले, सूरज सो गया है कंबल में लिपटकर, धूप को सुला लेता है, आगोश में अपनी , धूप सो जाती है, सूरज की बाँहो…

  • माँ की यादें | Kavita Maa ki Yaadein

    माँ की यादें ( Maa ki Yaadein ) ( 3 ) जिनकी मां स्वयं, वृद्धाश्रम की चौखट पर, बेटे को याद करते हुए, जीवन गुजार दिया था । देख रहीं थीं मां अपलक, बेटे को दूर और दूर जाते, मां को यू अकेले ही छोड़ते, ‌‌बेटे को थोड़ी दया नहीं आई। आज उसके बेटे ने,…

  • मित्र | Kavita Dosti par

    मित्र ( Mitra )   लम्हे सुहाने हो ना हो। चाहत की बातें हो ना हो। प्यार हमेशा दिल में रहेगा, चाहे मुलाकात हो ना हो।   खुशियों में गम़ मे भी शामिल रहेगे। तुझसे अलग हो के कैसे रहेगे। बातें सभी दिल की तुमसे कहेगे। चाहे दिन खुशनुमा ये रहे ना रहे।   लम्हे…

  • मैं थानेदार हूँ | Thanedar par kavita

    मैं थानेदार हूँ! ( Main thanedar hoon )   जो कानून का आँचल फाड़ते हैं, मैं उन्हें फाड़ता हूँ। ऐसे मजनुओं का जुनून मैं, जूतों से कुचलता हूँ। मैं सेवक हूँ आम जनता का, हर जुल्म का प्रहार हूँ, मैं एक थानेदार हूँ।   हर आग से देखो मैं हूँ वाकिफ , जलना मुझे आता…

  • भारत इंडिया | Bharat India

    भारत इंडिया ( Bharat India )    जाने भारत इंडिया शब्दों के, अंतस्थ का यथार्थ निज संविधान उल्लेखित नाम, इंडिया जो कि भारत है । पर इन शब्दों पर आजकल , गर्म थोड़ी सियासत है । भारत राजा भरत प्रतीक, इंडिया सिंधु घाटी भावार्थ । जाने भारत इंडिया शब्दों के, अंतस्थ का यथार्थ ।। एक…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *