Purush

हाँ मैं एक पुरुष हूं | Purush

हाॅं मैं एक पुरूष हूॅं

( Han main ek purush hoon ) 

 

हाॅं मैं एक पुरूष हूॅं,
मेरे परिवार की ज़रूरत हूॅं।
मैं क्रूर एवं उग्र नही शान्त रहता हूॅं,
अपनें परिवार के बारे में सोचता रहता हूॅं।।

रिश्तों को समझता हूॅं,
दर-दर भटकता रहता हूॅं।
तीन बातों का ख़ास ध्यान रखता हूॅं,
रूठना मनाना और मान जाया करता हूॅं।।

तपती रेत पर चलता हूॅं,
इज्ज़तदार बनकर जीता हूॅं।
सूरज चाॅंद तक पहुॅंचना चाहता हूॅं,
परिवार की ख़ुशी में ही मैं ख़ुश रहता हूॅं।।

मैं नारी का अभिमान हूॅं,
उसकी ख़ुशी का खज़ाना हूॅं।
मैं पुरूष अनेंक बोझ तलें दबा हूॅं,
अपनों की ख्वाहिशें पूरी करता रहता हूॅं।‌।

हाॅं मैं ही ऐसा पुरूष हूॅं,
जो सदैव चलता ही रहता हूॅं।
चट्टान तोड़कर राह बना ही लेता हूॅं,
बेख़ौफ़ सीमाओ पर पहरेदारी करता हूॅं।‌।

 

रचनाकार : गणपत लाल उदय
अजमेर ( राजस्थान )

Similar Posts

  • पग बढ़ाते चलो

    पग बढ़ाते चलो ***** कंकड़ी संकरी पथरीली, या हों रास्ते मखमली। हृदय में सदैव जली हो अग्नि, स्वार्थ हमें सब होगी तजनी। सेवाभाव की मंशा बड़ी, रास्ते में मुश्किलें भी होंगी खड़ी। पर जब करने की मंशा हो भली, बाधाएं दूर हो जातीं बड़ी से बड़ी। खुदा के वास्ते न देखो पीछे मुड़कर, बस तू…

  • कर्म | Karm

    कर्म ( Karm)    कर्म करो तुम हे मानव, तू क्यो संताप में डूबा हैं। फल देना है काम मेरा, तू कर जो तेरी पूजा है। मैं हर युग का नारायण जो, हर पल तेरे साथ रहा, संसय त्याग के कर्म करो, उस सा कर्म न दूजा है। मैने ही खंम्भे को फाड कर, के…

  • पापा की यादें | Papa ki Yaadein

    पापा की यादें ( Papa ki Yaadein )    पूछ रहे थे तुम मुझसे आंखें क्यों भर आई है गूथ रही थी आटा में बस यू ही कहा था मैंने याद पिता की आई है बरबस ही बरस पड़ी ये अश्रु की जल धारा बनके सावन के इस मौसम में मन ने बातें दोहराई है…

  • वह आदमी | Kavita Wah Aadmi

    वह आदमी ( Wah Aadmi )   वह आदमी दो कमरों के मकान में बड़ा खुश था कि अन्ना – आन्दोलन ने उसे राजनीति के कच्चे शीशे में जड़ा सपना दिखा दिया . वह आदमी सब पर आरोप मढ़ा हुआ जा बैठा महत्वाकांक्षा के औंधे शिखर पर . वह आदमी चुंकि आम आदमी था लोगों…

  • अंगदान है महादान | Angdaan hai Mahadaan

    अंगदान है महादान ( Angdaan hai mahadaan )   चलों साथियों दिलदार बनों और करों अंगों का दान, महादान का हिस्सा बनकर बन जाओ सभी महान। समझो इसकी अहमियत करों प्रोत्साहित हर इंसान, यह अमूल्य-उपहार है जो बचाता मरीज़ की जान।। जीवित चाहें मृत व्यक्ति जिसका कर सकता है दान, पहले नेत्रदान एवं रक्तदान था…

  • आप जीवित या मृत | Aap Jivit ya Mrit

    आप जीवित या मृत ( Aap Jivit ya Mrit )   एक कविता, और हम दोनों मैं और मेरी मोहब्बत खामोशी में उदास है कहते हैं मैं आज के बाद आपकी चुप्पी स्वीकार नहीं करूंगा मैं अपनी चुप्पी स्वीकार नहीं करूंगा मेरा जीवन आपके चरणों में बर्बाद हो गया है मैं आपका चिंतन करता हूं…..

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *