Hariyali Amavasya

हरियाली अमावस्या | Hariyali Amavasya

हरियाली अमावस्या

( Hariyali amavasya ) 

 

मनाओं सभी हरियाली अमावस्या,
सावन में प्रकृति लाई ढेरों खुशियाॅं।
पर्व का उद्देश्य प्रकृति से प्रेम करो,
हरे भरें खेत देखकर झूमें सखियाॅं।।

जगह-जगह लगते मिठाई के ठेले,
बागों में झूलें और बाजारों में मेले।
सभी मनातें जश्न, त्योंहार परिवार,
युवाओं के साथ झूमें गुरु एवं चेले।।

गेहूं की धाणी और गुड का प्रसाद,
मूॅंग, मक्का, बाजरा बीजते ज्वार
वृक्षों , पोधों में देवताओं का वास,
पर्यावरण से सबको मिलती श्वास।।

ब्रह्मा विष्णु महेश का पीपल वास,
ऑंवले लक्ष्मीनारायण विराजमान।
इनके बिन कोई पत्ता नहीं हिलता,
प्रकृति कण-कण में यह विद्यमान।।

 

रचनाकार : गणपत लाल उदय
अजमेर ( राजस्थान )

Similar Posts

  • सोच की संकीर्णता | Soch ki Sankirnata

    सोच की संकीर्णता ( Soch ki sankirnata )    पानी है अगर मंजिल तुम्हे, तो कुछ फैसले कठोर भी लेने होंगे जिंदगी की हर ऊंचाई का पैमाना निश्चित नही होता.. कभी कभी सोच की संकीर्णता स्वयं की प्रतिभा को ही निखरने नही देता…. बढ़ाएं तो आएंगी ही कभी अपने से कभी अपनों से और कभी…

  • सुनामी | Tsunami

    सुनामी ( Tsunami )    किसी दिन विशेष पर आ जाती है सुनामी शुभ कामनाओं की उस दिन के गुजरते ही मर जाती हैं भावनाएं सारी कामनाओं की रह जाता है शेष शून्य रोज की तरह जल जाते हैं दीए हजारों हर चौखट पर बस जल नही पाता दीप एक हृदय मे प्रेम और मानवता…

  • मेजर ध्यानचंद | Major Dhyanchand

    मेजर ध्यानचंद ( Major Dhyanchand )    राष्ट्रीय खेल दिवस (मेजर ध्यानचंद जयंती) ( 2 ) हॉकी भी कायल हुई, जादू भरी अदाओं पर अलौकिक विलक्षण प्रतिभा , जीवन वृत्त हॉकी परिभाषा । हर गोल विजयी भव पर्याय, अंतर कीर्तिमानी अभिलाषा । तीन बार ओलंपिक स्वर्ण पदक , जग नतमस्तक हिंद फिजाओं पर । हॉकी…

  • अयोध्या सी पावनता | Ayodhya ki Pawanta

    अयोध्या सी पावनता ( Ayodhya ki pawanta )    अयोध्या सी पावनता,अब हर घर द्वार कलयुग अभिव्यंजना त्रेता सम, मानस पटल दिव्य राम नाम । बाईस जनवरी अद्भुत अनुपम, रामलला प्राण प्रतिष्ठा प्रणाम । सर्वत्र सरित उमंग उल्लास, आर्तभाव अनंत आस्था धार । अयोध्या सी पावनता, अब हर घर द्वार ।। निमंत्रण आमंत्रण सर्वजन, प्रभु…

  • आस का दामन | Aas ka Daman

    आस का दामन ( Aas ka Daman ) आस का दामन, मत छोड़ो । वक्त की तरह, तुम भी दौड़ो । जो टूट गया, फिर से जोड़ो । यदि आस ,तुम्हारी टूट गई । समझो कि, ज़िन्दगी रूठ गई । ख़ुद पर तुम, पूरी आस रखो । सब पाओगे , विश्वास रखो । होगा पूरा,…

  • Saraswati vandana | Hindi Kavita- सरस्वती वन्दना

    सरस्वती वन्दना ( Saraswati Vandana ) ? ऐ चन्द्र वदिनी पदमासिनी तू द्युति मंगलकारी तू विद्या ज्ञान की देवी मां प्रकाशिनी कहलाये ? तू शुभ श्वेत वारिणी तू शीष मणि धारिणी तू अतुलित तेज धारी तेरे चरणों में दुनियां सारी ? तू हितकारी सुखकारी तू निर्मल भक्ति पावे तू ज्ञान रूप की देवी हर और…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *