सारथी | Sarathi

सारथी

( Sarathi ) 

 

यूं ही गुजरते रहेंगे दिन महीने साल
लेते रहिए वक्त का भी हाल चाल
लौट कर न आएं कहीं फिर दिन वही
कहना न फिर किसीने कहा नही

आंख मूंद लेने से कुछ बदलता नही
कौन कहता है वक्त फिसलता नही
कैसे कहूं मैं तुम्हे आज शब्दों मे खुले
करो जरा याद ,तुम बहुत कुछ हो भूले

देखते ही गुजर गए साल कैसे पचहत्तर
निरपेक्षता की आड़ मे हुए और बदतर
चाल थी गहरी ,और तुम रहे बेखबर
बढ़ते गए लोग ,तुम होते गए कमतर

भाई चारा मे तुम , चारा ही बने रहे
सर्व धर्म सम भाव में अकड़े तने रहे
उजड़ती रहीं गलियां और बस्तियां सारी
और सुनाई जाती रहीं ,तुम्हे लोरियां प्यारी

समय का परखी तुम्हे भी बनना होगा
अर्जुन तो कहीं सारथी तुम्हे भी बनना होगा
कंधे पर बोझ तुम्हारे कल का है साथी
चलोगे साथ मिलकर , तभी होगे सारथी

 

मोहन तिवारी

 ( मुंबई )

यह भी पढ़ें :-

झूठी शान | Jhoothi Shaan

Similar Posts

  • दीप जलाना होगा | Kavita

    दीप जलाना होगा ( Deep jalana hoga )   बुलंद हौसला बनाना होगा तूफान  से  टकराना  होगा मास्क जरूरी मुंह पर रखना जन-जन को समझाना होगा   वक्त के मारे लोग जगत में मदद को हाथ बढ़ाना होगा दुख की गाज गिरी जिन पर ढांढस  उन्हें  बंधाना  होगा   मन का भेद मिटाना होगा सेवा…

  • भोर की नव बेला || Kavita

    भोर की नव बेला ( Bhor ki naw bela )   मैं करोना को हराकर बाहर आई हूँ खुद की बहादुरीपर थोडा इतराई हूँ मालूम था सफर बहुत कठिन है फिर भी हिम्मत खूब मन में जुटाई है   खूब पिया पानी खूब भाप भी ली खूब प्राणायाम की लगाई झडी लम्बी साँसे छत पर…

  • मैं कोई फरिश्ता नहीं | Farishta

    मैं कोई फरिश्ता नहीं! ( Main koi farishta nahi )   इतना काफी है जमाने को बताने के लिए, आजकल आती नहीं हमको रुलाने के लिए। कहानी तैरती है उसके दिल की झीलों में, उतरती दरिया नहीं बेसुध नहाने के लिए। हुस्न की गागर वो चलने पे छलकती ही है, बढ़ती बेताबियाँ हमको जलाने के…

  • मैं कान हूं | Kavita main kaan hoon

    मैं कान हूं ( Main kaan hoon )   मैं कान हूं अपने जिम्मेदारियों से परेशान हूं। गालियां हों या तालियां अच्छा हो या बुरा सबको सुनकर,सहकर हैरान हूं। खैर छोड़िए मैं कान हूं। चश्में का बोझ ढोकर डंडियों से जकड़ा हुआ आंखों के मामलों में, मैं बना पहलवान हूं। खैर छोड़िए मैं कान हूं।…

  • टूटता तारा | Tootata Tara

    टूटता तारा ( Tootata tara )    एक रात बातों के मध्य तुम एकाएक खामोश हो गए थे मेरे पूछने पर मुझसे कहा मांग लो तुम्हें जो दुआ में माँगना है आज तुम्हारी मुराद पूरी हो जायेगी मैंने कहा – कैसे ? तुमने इशारा किया टूटते तारे का जिससे मैं थी अनभिज्ञ देख लो मेरी…

  • मासूमियत | Masoomiyat par Kavita

    मासूमियत ( Masoomiyat )    मासूम सी वो भोली भाली सूरत वो अल्हड़पन इठलाता सा निश्चल निर्भीक मासूमियत चेहरा कोई अनजाना सा दुनिया के आडंबर से दूर अपने आप में मशगूल बेखबर जहां के दुष्चक्रो से खिलता सा प्यारा फूल मधुर सी मिठास घोलता प्यार भरे मृदु वचन बोलता मासूमियत भरी नैनों में लगा बचपन…

One Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *