मुस्कुराना छोड़ दूं | Muskurana Chhod Doon

मुस्कुराना छोड़ दूं

( Muskurana chhod doon ) 

 

वो ख़फ़ा गर हैं तो क्या मैं मुस्कुराना छोड़ दूं।
खौफ़ से उनके मैं क्या नग़मे सुनाना छोड़ दूं।

ठीक है सरकार की नज़रे इनायत चाहिए
क्या मगर इसके लिए सारा जमाना छोड़ दूं।

लाख कोशिश की मगर फिर भी नहीं खुश है कोई
क्या करूं क्या मैं सभी रिश्ते निभाना छोड़ दूं।

जब भी परखा दोस्तों को मुझको मायूसी मिली
सोचती हूं दोस्तों को आजमाना छोड़ दूं।

आजकल मेरी दुआ जाने हुई क्यों बेअसर
तेरे दर पे ऐ ख़ुदा क्या सर झुकाना छोड़ दूं।

जानती हूं ख़्वाब सब पूरे हुआ करते नहीं
अब भला इसके लिए सपने सजाना छोड़ दूं।

इश्क़ की राहें कठिन दुश्वारियां गर हैं नयन
इससे डर महबूब की गलियों में जाना छोड़ दूं।

 

सीमा पाण्डेय ‘नयन’
देवरिया  ( उत्तर प्रदेश )

यह भी पढ़ें :-

https://thesahitya.com/kam-samajhta-hai/

Similar Posts

  • दर्द में भी मुस्कराना चाहिए

    दर्द में भी मुस्कराना चाहिए हर खुशी को गुन गुनाना चाहिएदर्द में भी मुस्कराना चाहिए जो पड़ी बंजर हमारी भूमि हैअब वहां फसलें उगाना चाहिए तुम नहीं भागो नगर की ओर अबगाँव में मिलकर सजाना चाहिए खोखले हो जाये न रिश्ते सभीयार उनको भी बचाना चाहिए साथ मिलके खाई थी उसने कसमयाद अब उसको दिलाना…

  • मुझपे ऐतबार कर | Ghazal Mujhpe Aitbaar Kar

    मुझपे ऐतबार कर ( Mujhpe Aitbaar Kar ) शिकायतें हज़ार कर तू यार बार बार कर मगर हैं इल्तिज़ा यही की मुझपे ऐतबार कर। खफ़ा हो यूं की प्यार से तुझे मना लिया करूं मगर न बदगुमानियों से दिल को तार तार कर। ये बेनियाज़ी और बेरुखी बढ़ाते तिश्नगी कोई तो कौल दरमियान में कोई…

  • मंदिर मस्जिद | Poem on Mandir Masjid

    मंदिर मस्जिद ( Mandir Masjid )   करना क्या है ? मंदिर मस्जिद और खाना है ! मंदिर मस्जिद भर रक्खी है नफ़रत दिल में कर रक्खा है मंदिर मस्जिद खूब लड़े हैं भाई भाई मुद्दा क्या है ? मंदिर मस्जिद आपका बेटा पढ़ा लिखा है क्या करता है ? मंदिर मस्जिद ख्वाहिश जो पूछो…

  • हम न झेल पाएंगे | Hum na Jhel Payenge

    हम न झेल पाएंगे ( Hum na Jhel Payenge ) हर एक रंग ज़माने के आजमाएंगे I कही सुनी की धनक हम न झेल पाएंगे II हज़ार बात हज़ारों जुबान से होगी I कहाँ हरेक जुबाँ से वफ़ा निभाएंगे II सुरूर इश्क उन्हें झूठ से हुई जब से I यकीं न होगा अगर दर्द हम…

  • रुलाती हमको | Ghazal Rulati Humko

    रुलाती हमको ( Rulati Humko ) खिलातीं रोज़ गुल ये तितलियाँ हैं हुई भँवरों की गुम सब मस्तियाँ हैं हमारे साथ बस वीरानियाँ हैं जिधर देखो उधर तनहाइयाँ हैं ग़ज़ब की झोपडी में चुप्पियाँ हैं किसी मरते की शायद हिचकियाँ हैं रुलाती हमको उजड़ी बस्तियाँ ये कि डूबी बारिशों में कश्तियाँ हैं मुसीबत में नहीं…

  • रहे दिलों में मुहब्बत वतन की

    रहे दिलों में मुहब्बत वतन की दुआ मांगता हूँ हमेशा अमन की ?रहे दिलों में मुहब्बत वतन की न बरसात हो नफ़रतों की कभी भीसलामत रहे बस बहारें वतन की मेरी जान कुर्बान है इस वतन परयहीं आरज़ू है मेरे यार मन की वतन से करो प्यार इतना दिलों सेहमेशा महके हर कली ही चमन…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *