सादा जीवन उच्च विचार | Sada Jeevan ucch Vichar

सादा जीवन उच्च विचार

( Sada jeevan ucch vichar ) 

 

आओ मिलकर नया समाज बनाऍं,
आज ऐसा ये एक इतिहास रचाऍं।
अपनाऍं सादा जीवन, उच्च विचार,
इस जीवन का रखें ये मूल आधार।।

रहन- सहन रखों साधारण ढ़ंग का,
मानव सुखी तब रहेगा हर घर का।
महात्मा और महापुरूष का जीवन,
था महान सॅंत ‌का‌ भी ऐसा ‌जीवन।।

गुणगान करते इसलिए हम उनका,
सादाजीवन उच्चविचार था उनका।
ईमानदारी, सच्चाई ये गुण थें उनमें,
दूसरो के प्रति सहानुभूति थी उनमें।।

धन- दौलत सुविधाओं से रहते दूर,
सहायक बनते निर्धन और मजबूर।
सभी कठिनाई का सामना कर लेते,
सदा शुभ विचार फैलाते चारों और।।

 

रचनाकार : गणपत लाल उदय
अजमेर ( राजस्थान )

Similar Posts

  • ईश प्रार्थना बल देती है

    ईश प्रार्थना बल देती है ( Eesh prarthana bal deti hai )   ईश प्रार्थना बल देती, हिम्मत और संबल देती है। आस्था विश्वास प्रेम से, उर में शक्ति भर देती है।   मनोकामना पूरी करके, खाली झोली भर देती है। आशाओं के दीप जला,ईश प्रार्थना बल देती है।   हर लेते प्रभु संकट सारे,…

  • Hindi Diwas Poem | Hindi kavita -हिंदी हम को प्यारी है

    हिंदी हम को प्यारी है ( Hindi Humko Pyari Hai )   हिंदी हमको प्यारी है, हर भाषा से न्यारी है। तन मन धन सब मेरा, यह तो जान हमारी है।।   मां की ममता में हिंदी, पिता की झमता में हिंदी। पति पत्नी के प्यार में , जीवन के हर कार्य में हिंदी।।  …

  • सोच रही शकुंतला | Soch Rahi Shakuntala

    सोच रही शकुंतला ( Soch rahi shakuntala )   जल में रख कर पाव सोच रही शकुंतला ले गए ओढ़नी मेरी दे गए गहरी पीर मोहे कब आओगे प्रियवर तकत राह ये नैन हूं अधीर बेचैन जल लेने को आई थी जल नैनों से छलके रे विरहन इस अगन को जल से ही शीतल करे….

  • फरेब | Fareb

    फरेब ( Fareb )   गहराई मे डूबने से अच्छा है किनारे ही रह लिया जाय हालात ठीक नहीं हैं इस दौर के अब खामोश ही रह लिया जाय मर सी गई हैं चाहतें दिल की तलाशते हैं लोग वजह प्यार की फरेब मे ही लिपटा है शहर सारा खुद ही खुद मे क्यों न…

  • प्रित का प्रेम | Prit ka Prem

    प्रित का प्रेम ( Prit ka Prem )   मैं तुम्हें लफ्जों में समेट नही सकती क्योंकि– तुम एक स्वरूप ले चुके हो उस कर्तार का– जिसे मैं हमेशा से ग्रहण करना चाहती हूं किन्तु– समझा नही पाती तुम्हें कि– अपने विजन को छोड़कर यथार्थ जीने का द्वंद्व वाकई में किंतना भयप्रद है। नकार देती…

  • रिश्ते | Rishtey par kavita

    रिश्ते ( Rishtey )    खामोशियों से रुकसत हो जाते हैं हर रिश्ते, अगर चुपचाप रहोगे गूंगे हो जाते है हर रिश्ते। कभी कभी बेमतलब ही बात कर लिया करो, बने रहेंगे हमेशा सदा तुम्हारे अपने हर रिश्ते।।   बनाने से बन जाते हैं इस दुनिया में रिश्ते, बिगाड़ने से बिगड़ जाते हैं दुनिया में…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *