Virasat

विरासत | Virasat

विरासत

( Virasat ) 

 

युद्ध और जंग से गुजरते
इस दौर में –

सड़कों पर चलते
एंटी माइनिंग टैंकों और
बख्तरबंद गाड़ियों की आवाज़ों के बीच-

स्कूलों पर गिरती मिसाइलों से
धराशायी होती इमारतों में
मासूमों की चीख पुकार के बीच-

आसमान में उड़ते
अचूक फाइटर जहाजों की
कर्णभेदी ध्वनि के बीच –

ढहे हुए घरों की छत में दबे
किसी बुजुर्ग के हाथों में
अपने जीवनसाथी की निशानी थामे
मिली लाशों की तस्वीरों के बीच –

अपने अपने घरों को छोड़
रास्तों पर मीलों चलते
लाखों विस्थापितों के
मौन संवादों के बीच –

जब हर कहीं
मज़हबी नफ़रतों के उन्माद स्वर
गूंज रहे हैं,
आने वाली पीढ़ियों के लिए
जो एक सबसे अच्छी विरासत
सहेजी जा सकती है,
वो इसी शहर के किसी बंकर में
भरी आंखों से विदा लेती
एक प्रेयसी की मुस्कान है !!

 

वीरेन्द्र जैन

( नागपुर )

यह भी पढ़ें :-

रक्षाबंधन | Raksha Bandhan Kavita in Hindi

Similar Posts

  • सिक्का | Sikka

    सिक्का ( Sikka  )   सिक्का उछालकर देखो कभी सिक्का थमाकर देखो समझ आ जायेगी जिंदगी कभी खुद को भी संभालकर तो देखो…. ये रौनक ,ये चांदनी ढल जायेगी उम्र की तरह दिन भी बदल जायेगा रात मे ही ढलती शाम की तरह…. पसीना बहाकर तो देखो गंध स्वेद की चखकर तो देखो कभी रोटी…

  • राखी भी धन्य हो रही | Rakhi Poem in Hindi

    राखी भी धन्य हो रही ( Rakhi bhai dhanya ho rahi )   राखी भी धन्य हो रही, सज शहीद मूर्ति की कलाई पर रक्षा बंधन अद्भुत अनुपम, अनंत भाई बहन स्नेह । असीम मंगल उर भावनाएं, अथाह आनंद खुशियां मेह। शहादत वंदन अभिनंदन शीर्ष , रक्षा सूत्र बांधती बहन रुलाई पर । राखी भी…

  • तुम उस शर्वरी पढ़ते

    तुम उस शर्वरी पढ़ते खत मेरा अंततः तक,काश ! तुम उस शर्वरी पढ़ते,प्रेम का एक नव रूप,काश ! तुम विभावरी गढ़ते।तुम अगर पढ़ते तो शायद,फैसले आज कुछ और होते,देह से भले विलग रहते,किन्तु ह्रदय से एक रहते।प्रिय ! निर्णय तुम्हारा सहजरूपी,निर्मित ताज होता,शीश मैं झुकाती,पूर्ण सब अभिषेक होते।सोपान उस दिन प्रणय का,काश ! तुम दो…

  • अमराई बौराई

    अमराई बौराई   पीपल के पात झरे पलाश गये फूल। अब भी न आये वे क्या गये हैं भूल। गेंदे की कली कली आतप से झुलसी, पानी नित मांग रही आंगन की तुलसी, अमराई बौराई फली लगी बबूल। पीपल के पात झरे पलाश रहे फूल। काटे नहीं रात कटे गिन गिन कर तारे, कोयलिया कूक…

  • माँ से बना बचपन मेरा

    माँ से बना बचपन मेरा अजब निराला खेल बचपन का lदुनिया ने लिया पक्ष सक्षम का llबचपन ने लिया पक्ष माँ का lआज भी धुन माँ की लोरी की llसुनाओ , फिर से कहानी माँ की lमाँ से बना बचपन मेरा ll किसी ने पूँछा ” मुकद्दर ” क्या है ?मैं ने कहा मेरे पास…

  • थकान | Kavita Thakan

    थकान ( Thakan )   जरूरी नहीं कि हर अंधेरा रोशनी के साथ हि पार किया जाय हौसलों के दीये कुछ दिल में भी जलाये रखा करिये माना कि गम कम नहीं जिंदगी में आपकी जरूरते भी तो कम नहीं पैदल के सफर में लगता है वक्त भी पास की भी दूरी लगती कम नहीं…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *