क़ुबूलनामा | Qubool Nama

क़ुबूलनामा

( Qubool nama )

प्यार छुपाना क्यों बताती क्यों नहीं,
अपने जज़्बात तुम जताती क्यों नहीं,
मिलना न मिलना बात है मुकद्दर की
अपना हूँ एहसास कराती क्यों नहीं।

इश्क़ में आँसू नहीं हम चाहते है खुशी,
बात ये अपनों को समझाती क्यों नहीं।

दुश्मन है जो भी हमारी मोहब्बत के,
बग़ावत में आवाज़ उठाती क्यों नहीं।

मैं तो चाहता हूँ तुम्हें पागलों की तरह,
तुम भी अपना प्रेम दर्शाती क्यों नहीं।

बेचैन हो उठा हूँ मैं तुम्हें पाने के लिए,
तुम अरमां महसूस कराती क्यों नहीं।

रूठ जाने पर जब हो जाता हूँ नाराज़,
मुझे तुम प्यार से तब मनाती क्यों नहीं।

चाह मेरी दो बदन एक जान होने की,
मिलन की आस तुम जगाती क्यों नहीं।

 

कवि : सुमित मानधना ‘गौरव’

सूरत ( गुजरात )

#sumitgaurav

#sumitmandhana

यह भी पढ़ें :-

सुहाना सपना | Suhana Sapna

Similar Posts

  • रैग पिकर और फैशनपुतला | Kavita Ragpicker

    रैग पिकर और फैशनपुतला पहने हो अति सुंदर कपड़े, पुतले बन कर खड़े हुए । फैशन की इस चकाचौंध में, भरमाने पर अड़े हुए ।। मैंने कचरे से बीना है, बोरा परिधान देख लो । मैं नंगा भी तुमसे सुंदर, ध्यान लगा मुझे देख लो।। तुम में मुझमें फर्क यही तुम, प्राणहीन मैं जीवित नर…

  • सौतन | Kavita

    सौतन ( Sautan )   कर में सौतन देके गये ब्रजनाथ राधिका रानी के। खेलते रही अधर पर प्रिय के राज किये मनमानी के।।१   गये श्याम जबसे मथुरा हैं भूल गये गोकुल नगरी, घटा कालिंदी का जल इतना लगती है उतरी उतरी। चले गये चितचोर नैन जलधार बहे राधारानी के।। २   छायी खुशी…

  • हमारे अटल जी

    हमारे अटल जी जो अटल रहा,अटल है उसका क्या बखान लिखूं,जिसे अमरत्व प्राप्त हो उसका जीवनदान लिखूं।जिसने भारतीय भाषाओं को जग में मान देकर,प्रति करूं खुद को समर्पित थोड़ा सा ज्ञान लिखूं।। अटल जी की प्रतिभाओं को सारा जग जानता है,कोई ऐसा लाल नहीं,जो इस लाल को न पहचानता है।जिसने पूरे ब्रह्मांड को अपना ही…

  • बिन बादल बरसात | Kavita bin badal barsaat

    बिन बादल बरसात ( Bin badal barsaat ) महक जाए चमन सारे दिल की वादियां घर हमारे। झूम उठे मेरा मन मयूरा मुस्कुरा उठे चांद वो तारे।   हो जाए दिल दीवाना मधुर सुहानी जब लगती रात। मन का मीत तेरे आने से होती बिन बादल बरसात।   कोई नया तराना लिखता होठों का मुस्कुराना…

  • यकीन | Yakeen

    यकीन ( Yakeen )    भले दे न सको तुम मुझे अपनापन मेरा यूं मेरापन भी ले नाही पाओगे उस मिट्टी का ही बना हुआ हूं मैं भी इसी गंध मे तुम भी लौट आओगे… फिसलन भरी है जमीन यहां की फिसलते ही भले चले जाओगे महासागर बनकर बैठा हुआ हूं मैं मुझी मे तुम…

  • आप जीवित या मृत | Aap Jivit ya Mrit

    आप जीवित या मृत ( Aap Jivit ya Mrit )   एक कविता, और हम दोनों मैं और मेरी मोहब्बत खामोशी में उदास है कहते हैं मैं आज के बाद आपकी चुप्पी स्वीकार नहीं करूंगा मैं अपनी चुप्पी स्वीकार नहीं करूंगा मेरा जीवन आपके चरणों में बर्बाद हो गया है मैं आपका चिंतन करता हूं…..

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *