Ghazal Shikayat na Shikwa

शिकायत न शिकवा | Ghazal Shikayat na Shikwa

शिकायत न शिकवा

( Shikayat na Shikwa )

चलो अब रहा तुम से वादा हमारा,
पलटकर ना तुमको देखेंगे दोबारा !

मुसीबत में डाले खुदी को खुद से,
दिखाया मुहब्बत ने कैसा नज़ारा !

टूटे है कहाँ से कैसे हम बताये,
हुआ कैसा दिल का ख़सारा ख़सारा !

नहीं है शिकायत न शिकवा किसी से,
करें हम किसी से भला क्यों किनारा !

मिटा देना दिल से भरम ये सनम तुम,
चलेगा ना तुम बिन ‘धरम’ का गुज़ारा !!

DK Nivatiya

डी के निवातिया

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