पहेली

Hindi Poetry On Life | Hindi Poem -पहेली

पहेली

( Paheli)

 

जय विजय के बीच मे लो, मै पराजित हो गया।
सामने मंजिल थी मेरी , पर मै थक के सो गया।

 

अपनो पे विश्वास कर मै खुद ही खुद से ठग गया।
आँख जब मेरी खुली तब तक, लवारिस हो गया।

 

छोड करके जा चुके थे जो मेरे अपने रहे ।
जो बचे थे अब वहाँ वो नाम के अपने रहे ।

 

कुछ ने छोडा कुछ ने तोडा, कुछ का समझौता रहा।
कुछ पहेली बनके आये, जो नही अपने रहे ।

 

जिन्दगी का फलसफा टुकडो मे ही मुझको मिला।
इक मुक्मल प्यार था जो इक से न दो से मिला

 

एक यादों का भँवर है दूसरी अब जिन्दगी।
एक प्रीती की लहर सी, दूसरी प्रिया मंजरी।

 

शब्दों मे रम कर कही मनभाव न खुल जाये अब।
शेर मन किसमे है उलझा, जान न जाये ये सब।

 

इक पहेली जिन्दगी है, उसमे ही उलझे रहो।
हुंकार की कविता पढो , मदमस्त मन बहके रहो।

 

✍?

कवि :  शेर सिंह हुंकार

देवरिया ( उत्तर प्रदेश )

??शेर सिंह हुंकार जी की आवाज़ में ये कविता सुनने के लिए ऊपर के लिंक को क्लिक करे

यह भी पढ़ें : 

Romantic Ghazal | Love Ghazal -पहला प्यार

Similar Posts

  • वो आखरी सलाम था | Kavita aakhri salaam

    वो आखरी सलाम था ( Wo aakhri salaam tha )   सीमा से तिरंगे में लिपटा वो अमर सपूत घर आया नैनों से अश्रुधारा बहती सबका कलेजा भर आया जिसके जोश जज्बे का कायल हर दिलवाला था वो देशभक्त मतवाला था वो देशभक्त मतवाला था भारत मां का लाड दुलारा वो राष्ट्रप्रेम पुजारी था बहना…

  • भारतीय वायु सेना दिवस | Poem in Hindi on Indian Air Force Day

    भारतीय वायु सेना दिवस   हिंद की रज रज से,नभम स्पर्शम दीप्तम वंदन चतुर्थ वृहत सैन्य रूप, उत्साह साहस पर्याय । सदा रक्षित राष्ट्र स्वाभिमान, लिख कीर्तिमानी नव अध्याय । इक्कानवीं शुभ वात्सिकी, हर नागरिक अनंत अभिनंदन । हिंद की रज रज से,नभम स्पर्शम दीप्तम वंदन ।। चतुर्दश शतम अतुल्य विमान, एक्य लक्ष सप्तति सहस्त्रम…

  • कैसी बीत गए तुम्हारे साथ | Romantic kavita

    कैसी बीत गए तुम्हारे साथ ( Kaisi beet gaye tumhare saath )   कैसी बीत गए तुम्हारे साथ । कितने पल कितने साल। सच कहूं वह बीते दिन थे बेमिसाल। आज भी चुपके से,तुमको कभी, जी भर के देख लेती हूं नजर चुरा कर। नोकझोंक करती हूं , बस रखती हूं प्यार छुपा कर। आज…

  • कलम की आवाज | Kavita

    कलम की आवाज ( Kalam ki aawaj ) ( मेरी कलम की आवाज सर्वश्रेष्ठ अभिनेता दिलीप साहब जी को समर्पित करती हूं ) “संघर्षों से जूझता रहा मगर हार न मानी, करता रहा कोशिश मगर जुबां पर कभी न आई दर्द की कहानी”। कुल्हाड़ी में लकड़ी का दस्ता न होता तो लकड़ी के काटने का…

  • दबे पैर | Kavita dabe pair

    दबे पैर ( Dabe pair )   वो दबे पैर अंदर आयी जैसे बंद कमरों में ठंड की एक लहर चुपके से आ जाया करती है और बदल गयी सारे रंग मेरे जीवन के, जैसे पहली बारिश धरा को बदल ज़ाया करती है अंकुर फूटे भावनाओं के और मदिरा सी मस्ती छा गयी कुछ ना…

  • अस्तित्व | Astitv

    अस्तित्व ( Astitv )    समाज ही होने लगे जब संस्कार विहीन तब सभ्यता की बातें रह जाती हैं कल्पना मात्र ही सत्य दब जाता है झूठ के बोझ तले अवरुद्ध हो जाते हैं सफलता के मार्ग चल उठता है सिर्फ दोषा रोपण का क्रम एक दूसरे के प्रति मर जाती है भावनाएं आपसी खत्म…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *