Ghazal | क्या खता थी नजर मिलाना था
क्या खता थी नजर मिलाना था
( Kya Khata Thi Nazer Milana Tha )



प्यार की अब होती फुवार कहाँ ( Pyar ki ab hoti phuvar kahan ) प्यार की अब होती फुवार कहाँ दिल उसी का अब बेक़रार कहाँ शबनमी रूठी प्यार की ऐसी हो रही फूलों की बहार कहाँ भूलने के जतन किये हर इक याद से उसकी ही क़रार कहाँ सूखा…

नज़र तिरछी करे घायल सभी को इस ज़माने में ( Nazar Tirchi Kare Ghayal Sabhi Ko Is Jamane Mein ) नज़र तिरछी करे घायल सभी को इस ज़माने में। है मिलता ज़ख्म वो दिल को नहीं आता बताने मे।। उसी की याद आती है सदा दिन -रात घायल को। करो कोशिश भले…

ख़फ़ा सी नज़र ( Khafa si nazar ) ख़फ़ा ख़फा सी नज़र सनम की बिला वज़ह के अड़ी हुई है टिकी रहे हर घड़ी हमीं पर नजर नहीं हथकड़ी हुई है। नहीं लिखा वो लक़ीर में जब भला मुकद्दर बने कहां से मगर वही दिल कि चाह है बस निगाह उस पर गड़ी हुई…

बारिशें नफरतों की शुरू हो गयी बारिशें नफरतों की शुरू हो गयी! ख़त्म बू प्यार की अब गुलू हो गयी इसलिए टूटा रिश्ता उसी से कल है तल्ख़ उससे बहुत गुफ़्तगू हो गयी खो गये भीड़ में बेबसी की रस्ते ख़त्म अब मंजिल की जुस्तजू हो गयी प्यार की दोस्ती…

मैं लिखता रहा अश्क धोते रहे मैं लिखता रहा अश्क धोते रहे।सफे किस्मत के खुद पे रोते रहे। हम सुनाते रहे दास्तां दिल की अपनी।रात सारी सिर कंधे पे रख वो सोते रहे। उन्हें लगता था हम जिंदा है पर थे नहीं।अपनी ही लाश हम कंधों पर ढोते रहे। गंवाया नहीं आंखों से निकला अश्क।उठा…

तेरा ये शबाब ( Tera ye shabab ) खिलता हुस्न का तू गुलाब है! ग़जब का तेरा ये शबाब है नशा क्यों न हो इश्क़ का मुझे लब तेरे सनम जब शराब है जिसे पढ़ना बाकी कभी जरा तू वो शायरी की क़िताब है उसे देखने को मचलता दिल ढला न वो चेहरे से…