आज का समाचार

Kavita Aaj ka Samachar | आज का समाचार

आज का समाचार

( Aaj Ka Samachar )

 

कोरोना इस बार

पार कर गया

लाख एक और पंद्रह हजार

रहें सतर्क

करें न कुतर्क

यह महामारी है

सारे रोगों पर भारी है

यमराज से इसकी यारी है

धरी रह गई सारी तैयारी है

टीके पर टिकी उम्मीद है अब सारी

लगवाने की अब बारी है हमारी

ना मत करना

पछताओगे

दूसरों को भी मरवाओगे

खुदा ना करे

प्यारे अल्ल्लाह के हो जाओगे!

कितना दिल दूसरों का दुखाओगे?

नवाब मंजूर

लेखकमो.मंजूर आलम उर्फ नवाब मंजूर

सलेमपुर, छपरा, बिहार ।

यह भी पढ़ें : – 

 

पड़ोसी धर्म निभाएं | Padosi par Kavita

Similar Posts

  • शेर की कविताएं | Kavitayen Sher Ki

    शेर की कविताएं ( Sher ki kavitayen )   हाँ दबे पाँव आयी वो दिल में मेरे, दिल पें दस्तक लगा के चली थी गयी। खोल के दिल की कुण्डी मैं सोचूँ यही, मस्त खूँशबू ये आके कहा खो गयी॥ हाँ दबे पाँव…. * सोच मौका दोबारा मिले ना मिले, ढूँढने मै लगा जिस्म सें…

  • वात्सल्य की प्रतिमूर्ति-हिन्दी

    वात्सल्य की प्रतिमूर्ति-हिन्दी मेरी हिन्दी, प्यारी हिन्दी।सब की है दुलारी हिन्दी। सब भाषायें दुनिया भर की,हुई समाहित हिन्दी में।पर संस्कृत है रही प्रमुख ही,अपनी प्यारी हिन्दी में। महावीर हरिश्चन्द्र आदि ने,समय समय पर अपने ढंग से,खूब संवारी अपनी हिन्दी।हर भाषा से प्यारी हिन्दी। बोलें हिन्दी में जब भी हम,मन मिश्री घुल जाती।मां सम लोकाचार सिखाती,अनुपम…

  • भावना | Bhavna

    भावना ( Bhavna )    भावनाएं ही मूल हैं जीवन की सार्थकता मे आपसी संबंधों का जुड़ाव लगाव,प्रेम,द्वेष ,ईर्ष्या,नफरत सभिक्रियाओं का उधमस्थल भावनाएं ही तो हैं …. भावना की मधुरता मे जहां रिश्ते फलते फूलते और पल्लवित होते हैं, वहीं मारी हुई भावनाएं इंसान को दानावपन की और अग्रसित करती हैं….. भावनाएं बंधन भी हैं…

  • नशा मुक्त अपना भारत बनाएं | Nasha mukti par kavita

    नशा मुक्त अपना भारत बनाएं ( Nasha mukt apna bharat banaen )   आओ मिलकर ऐसा समाज बनाएं, नशा मुक्त अपना भारत देश बनाएं। छोड़ो इस नशें की आदत को यारो, आहिस्ता ही सही पर बदलाव लाएं।।   छोड़े हर‌ किस्म की नशें की आदत, नशा मुक्त बनाऍं अपना यह भारत। स्वस्थ तंदरुस्त रखो अपना…

  • मजदूर पर कविता | Mazdoor

    मजदूर पर कविता ( Mazddor par kavita )   दोजून निवाला सही से नसीब ना हुआ मेरे हाथो आज तेरा सुंदर महल बन गया अपना तो झोपड़े में गुजारा हो गया कभी ठंड मे ठीठुर कर मैं सो गया कभी बारिश में भीग कांपता रह गया, कभी पसीने से लथपथ हो गरम थपेड़े सह गया…

  • श्री गुरु नानक देव जी | Guru Nanak par kavita

    श्री गुरु नानक देव जी ( Shri Guru Nanak Dev Ji )    प्रथम गुरुवर आप है गुरु नानक सिख समुदाय, सभी की ज़ुबान पर आपका नाम पहला आय। वाहेगुरु जी का खालसा वाहेगुरु जी की फतेह, बिना गुरु के मंजिल तक कोई पहुॅंच नही पाय।।   कल्याणचन्द पिता थें जिनके व तृप्ता थी माता,…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *