मैं फिर आऊँगा

मैं फिर आऊँगा | Kavita Main Phir Aunga

मैं फिर आऊँगा

( Main phir aunga )

 

सुनो..तुम याद रखना

मैं फिर आऊँगा

टूटा हुआ विश्वास लौटाने

टूटी हुई उम्मीद पाने को

अपने बीच पड़ चुकी

अविश्वास और नाउम्मीदी

की गाँठ को खोलने के लिए….

मैं फिर आऊँगा

एक न एक दिन

ये तुम्हें यकीन दिलाता हूँ

कि लौटना कठिन क्रिया नहीं है

बस..दिल में मिलन की

एक आस जरूरी है….!

सुनो..तुम याद रखना

मैं फिर आऊँगा

तुमसे मिलने

तुम्हारे ही शहर….!!

 

कवि : सन्दीप चौबारा

( फतेहाबाद)

यह भी पढ़ें :-

सीख लिया है | Kavita

 

Similar Posts

  • मेरे जीवन में ये शिक्षक | Kavita on Teacher

    मेरे जीवन में ये शिक्षक ( Mere jeevan mein ye shikshak )    दीपक की ज्योति बना, अंधकार में रोशनी बना, मार्ग का मार्गदर्शन दिया, बुद्धि का जिसने विकास किया, कलम से जिसने लिखना सिखाया, शब्दों का सही अर्थ बतलाया, टूटे धागों से माला के मोती पिरोना, मुश्किलों में भी धैर्य नहीं खोना, खुद पर…

  • नेह शब्द नही | Neh Shabd Nahi

    नेह शब्द नहीप्रसंग का विषय नहीयह दृष्टिगोचर नही होतायह कहा भी नही जातायह सिर्फ और सिर्फअनुभूत करने का माध्यम हैयह अन्तरतम मेंउठा ज्वार हैनितान्त गहराजिसमें केवल समाहित होना हैउसके बाद फिर होश ही कहाँ रहता हैयह एक ऐसा आल्हाद हैजिसको शब्दातीत, वर्णातीतनही किया जा सकता।यह शब्दों के बंधनों में नहीं बंधतासिर्फ अनुभूत किया जा सकता…

  • वाह रे वाह टमाटर | Wah re Wah Tamatar

    वाह रे वाह टमाटर ( Wah re wah tamatar )   वाह रे टमाटर क्या इज्जत पाई है। भाव भी ऊंचे शान तेरी सवाई है। टमाटर से गाल जिनके मिल जाए। खजाना भर माल चल पास आए। भाव उनके भी बढ़ जाते दुनिया में। लाल लाल टमाटर सा मुंह बनाएं। अब आलू नहीं टमाटर हो…

  • बादल | Badal par kavita

    बादल ( Badal ) *** ओ रे ! काले काले बादल, बरस जा अब, सब हो गए घायल ! धरती अंबर आग उगल रहे, ऊष्मा से ग्लेशियर पिघल रहे! सूख गए हैं खेतों के मेड़, बरसो जम कर- अब करो न देर । ओ रे ! काले काले बादल… बरसो … हर्षे बगिया, हर्षे मुनिया।…

  • गूंज उठी रणभेरी | Gunj uthi Ranbheri

    गूंज उठी रणभेरी ( Gunj uthi ranbheri )    गूंज उठी रणभेरी, अंतर्मन विजय ज्योत जला आन बान शान रक्षा, दृढ़ प्रण दृष्टि श्रृंगार । शक्ति भक्ति धार धर, हिय भर सूरता आगार। अजेय पथ गमन कर, सर्वत्र बैठी घात लगा बला । गूंज उठी रणभेरी, अंतर्मन विजय ज्योत जला ।। स्मरण कर स्वप्न माला,…

  • भूले से चेहरे | Geet bhoole se chehre

    भूले से चेहरे  ( Bhoole se chehre )     भूले  से  चेहरे  कितने  ही, आँखों में घिर आए हैं ! अपना भी चेहरा है उनमें, या हम फिर भरमाए हैं !!   प्रातः कीआशा बन आये, हैं जग में कब से उजियारे लेकिन अबभी अन्धियारों से,भरे हुए घरके गलियारे मैं अपने आँगन में बैठा…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *