Abhilasha kavita

अभिलाषा | Abhilasha kavita

“अभिलाषा”

( Abhilasha )

 

चाह बहुत  मनमंदिर मे भारत वीरो का गान करूं
 उनकी त्याग तपस्या का सदा मान सम्मान करूं

 

 श्रद्धा सुमन से ईश्वर की निसादिन करूं मैं पूजा
 भक्ति भाव में जो सुख पाऊं और कहां है दूजा

 

दिल मे ईच्छा गुरु चरणों में बना रहे मेरा ध्यान
शून्य ह्रदय में भर जाए जीवन का सच्चा ज्ञान

 

मन चाहे निज तात मात की हरदम करूं मैं सेवा
ममता के कर कमलों से जीवन भर करूं कलेवा

 

अखिल विश्व के जन-मानस में मानवता भर जाए
दया धर्म उपकार के पथ पर आगे कदम बढ़ाएं

 

सभी सुखी हो वसुधा पर कोई न भूखा  सोवे
कष्ट मलिनता पाप दूर हो कोई दुखी ना होवे

 

प्रेम भाव हो जन-जन में बना रहे भाईचारा
एक दूसरे के कंधों का मिलता रहे  सहारा

 

 प्रबल कमाना जग जीवन से दूर होय अंधियारा
अज्ञान तिमिर का नाश हो खिले ज्ञान उजियारा

 

 

?

कवि : रुपेश कुमार यादव ” रूप ”
औराई, भदोही
( उत्तर प्रदेश।)

यह भी पढ़ें :-

नवरात्रि नव रूप | Navratri kavita

Similar Posts

  • चांदनी | Chandni

    चांदनी ( Chandni )    पूनम के चांद से सब कतराने लगे अमावस की चांदनी मे नहाने लगे जलने लगी है अब उन्हे सूरज की धूप हैलोजन की फ्लैश मे ही नचाने लगे रंगीन बालों मे ही दिखती है जवानी बूढ़े भी अब तो सिर मे विग लगाने लगे युवतियों के कपड़े उतारने लगे तन…

  • अजेय इंडिया हमारा

    अजेय इंडिया हमारा आन-बान-शान की निशानी है इंडिया जीत टी-20 का प्रमाण है इंडिया परचम अजेय का गगनचुम्बी है इंडिया पंख जज्बा-जोश की बुलंदी है इंडिया विजयी विराट की लहर है इंडिया वैश्विक चुनौतियों का सामना है इंडिया शेखर कुमार श्रीवास्तव दरभंगा( बिहार) यह भी पढ़ें :-  बचपन लौटा दो | Kavita Bachpan lauta do

  • Kavita | अपना बचपन

    अपना बचपन ( Apna Bachpan )   बेटी का मुख देख सजल लोचन हो आए, रंग बिरंगा बचपन नयनों में तिर जाए । भोर सुहानी मां की डांट से आंखे मलती, शाम सुहानी पिता के स्नेह से है ढलती। सोते जागते नयनों में स्वप्निल सपने थे, भाई बहन दादा दादी संग सब अपने थे। फ्राक…

  • चाँद की व्यथा | Kavita Chand ki Vyatha

    चाँद की व्यथा ( Chand ki Vyatha ) चाँद सागर से कहता रहा रात भर, तुम मचलते रहो मैं तरसता रहूँ ।। तुम उफनते रहो अपनी लहरों के संग मैं तो खामोश तुम को तकता रहूँ l अपनी पलकों में तुमको छिपाये हुए, मैं यूँ ही उम्र भर बस पुलकता रहूँ ।। अपने दामन को…

  • स्नेहका संचार | Kavita Sneh ka Sanchar

    स्नेहका संचार ( Sneh ka Sanchar )   आदमी का मानवीय व्यवहार होना चाहिए ! हर हृदय में स्नेह का संचार होना चाहिए !! खिल सके अपना चमन, यह एकता के भाव से ! हो उल्लसित सारा जहां स्नेह व सद्भाव से !! त्यागकर इंसानियत को बढ़ नहीं पाएंगे हम ! अपनेपन से ही सभी…

  • बुजुर्ग ठंडी छांव | Buzurg Thandi Chhaon

    बुजुर्ग ठंडी छांव ( Buzurg thandi chhaon )    बगिया को महकाने वाले, प्रेम सुधा बरसाने वाले। घर में रौनक लाने वाले, संस्कार सिखलाने वाले। आओ कर ले उनका वंदन लाड प्यार दुलार जो देते, जीवन को संवार वो देते। कदम कदम पे बने सहारा, खुशियों का उपहार जो देते। आओ कर ले उनका वंदन…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *