Author: Admin

  • चाय पर : हाइकु

    चाय ( Chai )    गरमाहट लाती हैं चुस्कियां गर्म चाय की ।। बातें भी होती गरमा गर्म चाय के साथ सभी ।। कुछ पुरानी कुछ नई बाते हैं, मुलाकाते हैं ।। सबको बुलाए आओ चाय बनाएं ताजा हो जाएं।। पकौड़े साथ मसाला वाली चाय आज हो जाएं।। किस्से सुनाते, विसराए पल भी , हाँ…

  • राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त | Maithili Sharan Gupt

    राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त ( Rashtrakavi Maithili Sharan Gupt )   खड़ी बोली के महत्वपूर्ण एवं प्रथम-कवि थें आप, हिंदी-साहित्य में दद्दा नाम से पहचानें जाते आप। बांग्ला हिन्दी और संस्कृत भाषाऍं जानते थें आप, अनेंक उपाधियों से सम्मानित हुऍं गुप्त जी आप।। मैथिलीशरण गुप्त जी था जिनका प्यारा ‌यह नाम, महावीरप्रसाद द्विवेदी की प्रेरणा से…

  • भ्रष्ट नेता | Bhrasht Neta

    भ्रष्ट नेता! लहू जनता का पीता ******** सभी बड़ी हस्तियां शामिल हैं यहाँ के भ्रष्टाचार में फूटी कौड़ी नहीं दी है जनता ने,किसी को उधार में! लाखों करोड़ों की गड्डियां जो निकलती हैं, उनके दराजों से… आम आदमी का लहू है, मटिया तेल नहीं! जो ये टिन के डब्बे में छिपा कर रखते हैं अपने…

  • भागो नहीं, जागो | Bhago Nahi Jago

    परिस्थितियों कभी समस्या नहीं बनती , समस्या इसलिए बनती हैं क्योंकि हमें उन परिस्थितियों से सही से लडना नहीं आता है । परिस्थिति तो अपने आप मे एक ही होती है, सबके अलग- अलग नजरिये होते है कि वो उसको किस रूप में लेता है। वैसे काफी हद तक इसमें हमारे कर्म-संस्कार के कारण हमारे…

  • चाहत | Chaahat

    चाहत ( Chaahat )    चाहत के मौन गलियारों में, नेह का मृदुल स्पंदन उर तरंग नवल आभा, प्रसून सदृश मुस्कान । परम स्पर्शन दिव्यता, यथार्थ अनूप पहचान । मोहक स्वर अभिव्यंजना, परिवेश सुरभि सम चंदन । चाहत के मौन गलियारों में, नेह का मृदुल स्पंदन ।। अनुभूति सह अभिव्यक्ति , मिलन अहम अभिलाषा ।…

  • प्रदूषण की समस्या | Poem on Pollution in Hindi

    प्रदूषण की समस्या ( Pradushan ki samasya )  हिन्दुस्तान में हरियाणा, पंजाब, दिल्ली हैं प्रदूषण का आगाज़, मजहबी इमारतों में शोर गुल सूरज से पहले है प्रदूषण का आगाज़।। शादी-ब्याह हो या सियासतदानों की रैली जुलूस तो है प्रदूषण, कलश यात्रा, शोभायात्रा में बजते डीजे होती ऊंची आवाज़ तो प्रदूषण।। तीनों सूबों और नजदीक इलाकों…

  • हे राम | Hey Ram

    हे ! राम ( Hey Ram ) नज़्म शिकायत किसी की न करते हैं राम, एक प्लेटफार्म पे जीना सिखाते हैं राम। आज्ञाकारी पुत्र तो वो बनकर दिखाए ही, समाधान धैर्य से निकालते हैं राम। राज -परिवार के वो बेटे तो थे ही, जीवन की कला सिखाते हैं राम। हार क्या होती है, जानते नहीं,…

  • स्त्री हृदय | Strī Hridaya

    स्त्री हृदय ( Strī hridaya )    प्यार भरा हृदय आंखों में हया है, फिर भी यह जीवन तो सवालों से घिरा है माना अहसास है एक अपने अगल होने का हमें स्त्री का खुलकर जीना भी क्या यहाँ कोई सजा है ??????? बिखरे रंगों से पुस्पों की भांति ही सजाते हैं हम रंगोली प्रतिपल…

  • जीत | Jeet

    जीत ( Jeet )  मनहरण घनाक्षरी   दिल जितना चाहो तो, दिल में उतर जाओ। मीठे बोल प्यार भरा, गीत कोई गाइए। जग जितना चाहो तो, लड़ना महासमर। शौर्य पराक्रम वीर, कौशल दिखाइए। औरों के हित जो लड़े, समर जीत वो जाते। दीन हीन लाचार को, गले से लगाइए। जीतकर शिखर से, अभिमान ना करना।…

  • पति की तड़प | Pati ki Tadap

    पति की तड़प ( Pati ki tadap )    प्यार की हैं पहली परिभाषा जिसके साथ रहो वही तमाशा पत्नी की जब बोली हो तगड़ी पति की होती घर में खिचड़ी , सर्पों की भाषा बोले जो प्राणी पत्नी पति का खून पीने वाली।। सजनी के बिन न होए भावर, साजन के बिन न भाए…