तपन | Tapan
तपन ( Tapan ) तपन है जैसे तपती रेत मे नंगे पांव की मिली न बसर जिंदगी मे किसी छांव की चलता ही रहा ,फजर से शामेरात तक मिली न सराय कोई ,शहर से गांव तक बच्चों ने कहा ,भविष्य है उनके बच्चों का बेटियों ने कह दिया ,पापा हमे भूल गए अपनों की…
तपन ( Tapan ) तपन है जैसे तपती रेत मे नंगे पांव की मिली न बसर जिंदगी मे किसी छांव की चलता ही रहा ,फजर से शामेरात तक मिली न सराय कोई ,शहर से गांव तक बच्चों ने कहा ,भविष्य है उनके बच्चों का बेटियों ने कह दिया ,पापा हमे भूल गए अपनों की…
याद आया ( Yaad Aya ) कोई अनजान सफ़र याद आया अजनबी कोई बशर याद आया तेरा चेहरा ही नज़र में उतरा जब कभी दर्दे जिगर याद आया धूप ने जब भी सताया हमको बारहा बूढ़ा शजर याद आया इक मेरा दोस्त पुराना था जो कुछ लगी देर मगर याद आया अपनी ख़ुशक़िस्मती समझेंगे…
नारी एक रूप अनेक ( Nari Ek Roop Anek ) किसी का मुकद्दर संवारती है , किसी का मुकद्दर बिगाड़ती है , नारी अगर जिद्द पर आ जाए राजा को भी वो रंक बनाती है! -1 हमसफर का साथ निभाती है, पूरा जीवन समर्पित करती है , नारी अगर जिद्द पर आ जाए बेवफाई…
मेरी धरती माँ ( Meri dharti maan ) मेरी धरती माँ प्यारी है भारत की ख़ुशबू फ़ैली है ऐसा न कहीं देश मिलेगा गंगा जमना जो मिलती है उगते है गुल उगती सरसों धरती माँ देखो ऐसी है सैनिक करे है हिफाज़त कर सकता न अदू ज़ख्मी है नफ़रत के दुश्मन ख़त्म हुई उल्फ़त…
फ़िक्र जहां की! ( Fikr jahan ki ) बेवजह दिल दुखाना मुनासिब नहीं, जग में नफरत बढ़ाना मुनासिब नहीं। फूल खिलते रहें सारी दुनिया में यूँ, बैठी तितली उड़ाना मुनासिब नहीं। धरती नभ से मिले ये तो मुमकिन नहीं, तोड़ ढूँढों नहीं, ये मुनासिब नहीं। कोई कुदरत के हक़ को मिटाने लगे, फ़िक्र हो…
वाह भाई वाह ( Wah Bhai Wah ) बालपन से बनना चाहतें कवि-लेखक साहित्यकार, मन में थी उनके ऐसी आशा उसको किया साकार। तारक मेहता का उल्टा चश्मा शो से बनाएं पहचान, शैलेश लोढ़ा नाम है जिनका सपनें किया साकार।। ९ वर्ष की उम्र में जिन्होंने बाल-कवि उपनाम पाया, ये साहित्य की प्रेरणा इन्होंने…
नारी ( Nari ) ( 2 ) हर युग को झेला है जिसने हार नहीं पर मानी वह नारी। स्वाभिमान को गया दबाया सिर नहीं झुका वह है नारी। जीवन के दो पहलू कहलाते फिर भी इक ऊँचा इक नीचा। विष के प्याले पी पी कर भी अमृत से जग को नित सींचा। कंटक पथ…
सावन में चले शिव के द्वार ( Sawan mein chale shiv ke dwar ) अगम अगोचर अविनाशी औघड़ दानी सरकार। महादेव शिव शंकर शंभू जटा बहती गंगा धार। सावन ने चले शिव के द्वार डम डम डमरू वाले बाबा गले सर्प की माला। भस्म रमाए महाकाल शिव तांडव है मतवाला। शशि शेखर ध्यान मग्न…
जीना है तो गेहूं छोड़ दो ( Jeena hai to gehun chhod do ) आज से ही सब छोड़ दो यह गेहूं की रोटियां खाना, नहीं तो यारों पहुॅंचा देगा यह सभी को सफाखाना। खा खाकर जिससे सब लोग आज बढ़ा रहें है तोंद, जीना है तो गेहूं छोड़ दो सब मानो हमारा कहना।।…
अंतर ( Antar ) निर्वस्त्र कपड़ों मे कैसी दिखती होगी वह मांशल जिस्म उभरे वक्षस्थल कामिनी काया लिए हवस परी सी…. ठीक अनुभव किया तुमने वह वैसी ही थी ,ठीक जिसने तुम्हे पैदा किया जिसने तुम्हे राखी बांधी जिसकी डोली उठी घर से ठीक, उस जैसी ही … क्या फर्क लगा , उस और…