Author: Admin

  • नशामुक्त अभियान | Nasha Mukt Abhiyan

    नशामुक्त अभियान ( Nasha mukt abhiyan )    सबको मिलकर रचना है इतिहास हिन्दुस्तान में, नामुमकिन कुछ नहीं इंसानों के लिए जहान में। दीप ज्ञान का जलाना‌ है ये लिया क़लम हाथ में, नशीलें-पदार्थ ना आनें देंगे हिन्ददेश महान में।। जीतेंगे यह युद्ध भारतीय नशामुक्त अभियान में, बीड़ी-सिगरेट और तंबाकू जला देंगे श्मशान में। नही…

  • खाक में न मिलाओ वतन को कोई | Khaak mein na Milao Watan ko

    खाक में न मिलाओ वतन को कोई! ( Khaak mein na milao watan ko koi )   आग कहीं पे लगाना मुनासिब नहीं, होश अपना गंवाना मुनासिब नहीं। दे के कुर्बानी किए चमन जो आजाद, ऐसी बगिया जलाना मुनासिब नहीं। तुमने जो भी किया आज देश है खफ़ा, हक़ किसी का मिटाना मुनासिब नहीं। सबकी…

  • घर की इज्जत, बनी खिलौना | Ghar ki Izzat

    घर की इज्जत, बनी खिलौना ( Ghar ki izzat, bani khilauna )    अब कहां कोई खेलता है, खिलौनों से साहब?? अब तो नारी की अस्मिता से खेला जाता है। यत्र पूज्यंते नार्याः, रमंते तत्र देवता, बस श्लोकों में ही देखा जाता है। तार तार होती हैं घर की इज्जत, बड़ी शिद्दत से खेल सियासत…

  • इंसान | Insaan

    इंसान ( Insaan )    हर सू हैं झूठे इंसान अब कम हैं सच्चे इंसान मेरी मुट्ठी में भगवान करता है दावे इंसान अपनी ख़ुदग़र्ज़ी में अब भूल गया रिश्ते इंसान सोच समझ के कर विश्वास अब कम हैं अच्छे इंसान लोगों को जो चुभ जाये शौक़ न वो पाले इंसान जिस रस्ते पर दाग़…

  • जायज | Jayaz

    जायज ( Jayaz )    विरोध के लिए ही विरोध होना जायज नहीं विरोध योग्य हो तो विरोध भी जरूरी है सत्य है हर आदमी हर कहीं सही नही होता किंतु ,वही हर जगह गलत भी नहीं होता स्वयं को देखकर ही और का भी विरोध, हो लबादे मे रहकर,कीचड़ फेंकना ठीक नही होगा रास्ता…

  • इक पल | Ik Pal

    इक पल ( Ik pal )    वक्त के गुबार से निकला हुआ अधूरे अधजले ख्वाबों की खाक में लिपटा हुआ वो इक ‘पल’ रूबरू आ गया हो जैसे… खुद ही उसकी राख उतार खारे पानी से धो संवारकर संजोकर संभाल कर उस इक ‘पल’ को अब कई बार जी जाना है मुझे   लेखिका…

  • कभी कभी | Kabhi Kabhi

    कभी कभी ( Kabhi kabhi )    कभी कभी ही होता है दिल बेचैन इतना कभी कभी ही उठता है ज्वार सागर मे कभी कभी ही होती है बारिश मूसलाधार कभी कभी ही आते हैं ख्याल इंतजार मे… कभी कभी ही चांद निकला है ओट से कभी कभी ही होता है एहसास गहरा कभी कभी…

  • मोक्ष की ओर बढ़ें | Moksh

    मोक्ष की ओर बढ़ें! ( Moksh ki ore badhen )   हे ! उसकी कृपा बरसे, दुनिया सदा हरषे। आकर के जग में, प्रभु की शरण में, मोक्ष की ओर बढ़ें। हे! उसकी कृपा बरसे, दुनिया सदा हरषे। साँसों के तारों से, जीवन की धारों से, मिलके जहां से चलें । हे ! उसकी कृपा…

  • ग़लती हमारी थी | Galti Hamari thi

    ग़लती हमारी थी ( Galti hamari thi )   हुआ जो हादसा ए इश्क़ वो गलती हमारी थी खड़ी सरकार के हक़ में लड़ी आवाम सारी थी। लगेंगी तोहमतें हम पर बहुत ये इल्म़ था हमको वही अच्छे वही सच्चे हमें ये जानकारी थी। वफ़ा करके भी हम हरदम खटकते हैं नज़र में क्यूं यही…

  • स्वप्न | Swapan

    स्वप्न ( Swapan )    घरों से दूर होते तो कोई बात न होती हम तो आज दिलों से ही दूर जा रहे हैं ललक तो सभी को है कुछ कर गुजरने की मगर करना है क्या सही,ये ही भूले जा रहे हैं समझ बैठे हैं खुद को ही ,अफलातून हम जीत की होड़ मे,बुजुर्ग…