कहानियां

  • गिरदावरी | Girdawari

    शहर के नए पटवारी सोहनलाल जी हाल ही में ज्वाइन होकर अपने आफ़िस में काम पर आए थे । अगले महीने राज्य के मुख्यमंत्री जी स्वयं उनके शहर आने वाले थे, क्योंकि मुख्यमंत्री जी को पिछले साल मौसम के कारण ख़राब हुई फ़सल के लिए वहाँ के चुनिंदा किसानों को मुआवजा राशि वाले चेक प्रदान…

  • देश की माटी | Kahani Desh ki Mati

    अभी रमेश को 15 दिन भी नहीं आए हुए थे पता चला उसकी मां को लकवा मार गया है । वह बहुत चाहता था मां के पास पहुंचे लेकिन चाह कर भी घर नहीं जा सकता था। रात्रि में जब वह लेटा हुआ था तो उसे नींद नहीं आ रही थी। वह सोचता रहा की…

  • दर्पण | Laghu Katha Darpan

    “मालिक, आप दर्पण क्यों देखते हैं ॽ” रामू ने साहस करते हुए अपने मालिक से पूछा। “संवरने के लिए।” मालिक ने कहा। “संवरती तो नारी है, आप नारी हैं क्या ? ” मुंँह लगा रामू ने चुस्की लेते हुए कहा। “डंडे पड़ेंगे, जो ऐसा कहांँ तो।” फिर मालिक ने उसे हिदायत करते हुए कहा। “सच…

  • कहाँ तक | Kahani Kahan Tak

    ”  हलो ..भाई साहब , आप मेजर गौरव शर्मा बोल रहे है न ? ओके , मैं लाहौर से मरियम रहमान बोल रही हूँ । भाई  साहब शायद मेरे शौहर आपके साथ भारत- पाक , जंग में आपके साथ थे । उन्ही के विषय मे मैं आपसे बात करना चाहती हूँ। क्या आप मेरी दस…

  • परिया बाबा | Kahani Pariya Baba

    चीनू, मीनू , रामू, दिनेश , भोलू और टीनू पांच से दस वर्ष के बच्चे हाथों में गेंद उठाये शोर मचाते हुए घरों से निकले और खुले मैदान में आ कर गेंद को पैरों से लुढ़का लुढ़का खेलने लगे । दूर से आती बाँसुरी की धुन ने बच्चों का ध्यान आकर्षित किया और दिनेश ने…

  • जंगल मे | Laghu Katha Gungle Mein

    कोई एक शब्द भी नहीं बोलेगा। मैने अभी-अभी किसी बाघ की आहट सुनी है और उसके पैरों के ताजा निशान देखकर आ रहा हूं, जो कि हल्की गीली मिट्टी मे बने हुए थे…., हरीश ने लगभग फुसफुसाते हुए कहा-“सब लोग फटाफट सामान बांधो और गाड़ी की तरफ चलो….।” डब्बू उसके पिता हरीश, बहन नेहा, जीजा…

  • त्रिकालदर्शी बाबा | Kahani Trikaldarshi Baba

    भारतीय समाज में पाखंड और अंधविश्वास इतना फैला है कि कौन सच्चा कौन झूठा इसका निराकरण करना बड़ा मुश्किल है। ऐसे लोग समाज में अंधविश्वास एवं पाखंड फैलाकर और गर्त में डाल देते हैं। यही कारण है कि भारत में वैज्ञानिक प्रतिभा का विकास नहीं हो पाता है। सुदेश नामक एक बालक समाज से ऐसे…

  • रंग | Kahani Rang

    कमर के नीचे मिनी स्कर्ट ,छह इंच ऊँची एड़ी को सेंडिल , कीमती जेवर ,चार इंच पेट दिखाती लाल रंग की टॉप और होठो में सिगार दबाए मोना अपनी शेवरले गाड़ी में धुँए कर छल्ले छोड़ती फर्राटे भरती सडक़ पर दौड़ी जा रही थी कि अचानक उसे गङ्गा बैराज का पुल नजर आया तो देखते…

  • भूतों का एजेंट | Kahani Bhooton ka Agent

    रात्रि का लगभग 9:00 बज रहा होगा। प्रयागराज की एक मजार पर बहुत सी स्त्रियां अभुआ सुसुआ आ रही थी। एक कह रही थी कि -“मैं इसके शरीर को नहीं छोडूंगी। मैं उसकी जान लेकर के रहूंगी। ” खुले बाल कमर को चारों तरफ से नचाती हुई वह सवाल जवाब किए जा रहे थी। वहां…

  • स्वयंसिद्धा | Kahani Swayamsidha

    जीत ने जैसे ही घर का ताला खोल घर मे प्रवेश कदम रखा कि मोहल्ले की औरतों ने भी उसके साथ प्रवेश किया। वे सब उससे उसका हाल चाल पूछ रही थीं और वह बड़े संयत ढंग से उन सभी के प्रश्नों का उत्तर देती जा रही थी। लगभग दो घण्टो के बाद भीड़ छंटनी…