कविताएँ

  • स्तवन | Stavan

    स्तवन *सरस्वती शारद ब्रम्हाणी!जय-जय वीणा पाणी!!*अमल-धवल शुचि,विमल सनातन मैया!बुद्धि-ज्ञान-विज्ञानप्रदायिनी छैंया।तिमिरहारिणी,भयनिवारिणी सुखदा,नाद-ताल, गति-यतिखेलें तव कैंया।अनहद सुनवाई दो कल्याणी!जय-जय वीणापाणी!!*स्वर, व्यंजन, गण,शब्द-शक्तियां अनुपम।वार्णिक-मात्रिक छंदअनगिनत उत्तम।अलंकार, रस, भाव,बिंब तव चारण।उक्ति-कहावत, रीति-नीति शुभ परचम।कर्मठ विराजित करते प्राणीजय-जय वीणापाणी!!*कीर्ति-गान कर,कलरव धन्य हुआ है।यश गुंजाता गीत,अनन्य हुआ है।कल-कल नाद प्रार्थना,अगणित रूपा,सनन-सनन-सन वंदनपवन बहा है।हिंदी हो भावी जगवाणीजय-जय वीणापाणी!! संजीव सलिल यह…

  • देश अब तुम्हें पुकारे

    देश अब तुम्हें पुकारे वापस आओ देश के लालोदेश अब तुम्हें पुकारेदेखो हाल इस धरती काजो तुम कर गए हमारे हवालेवापस आओ देश के लालोदेश अब तुम्हें पुकारे भूल गए सब तुम्हारी कुर्बानीलहू तुम्हारा बहा कटे हाथ और पैरमां बहन पत्नी और बेटीरोती थी तब घर में अकेलीवापस आओ देश के लालोदेश अब तुम्हें पुकारे…

  • हिन्दी तो है, बन्दूक की गोली

    हिन्दी तो है,बन्दूक की गोली करती प्रहार मार कर बोली,हिन्दी तो है,बन्दूक की गोली। तुम मुझे खून दो,मैं तुम्हें आजादी दूँगासुभाष ने देश में, खड़ी कर ली टोलीकरती प्रहार मार कर बोली,हिन्दी तो है,बन्दूक की गोली। अंग्रेजो तुम भारत छोड़ोगांधी ने ललकार है जब मारीकरती प्रहार मार कर बोली,हिन्दी तो है,बन्दूक की गोली। जय जवान,जय…

  • बच्छराज काकासा के हीरक जयन्ती वर्ष

    बच्छराज काकासा के हीरक जयन्ती वर्ष नई भोर नव ऊर्जा आनंदनव प्रभात के हम अभिलाषी है।सूरज की पहली किरण संग ! काकासाउजास ! आरोग्य !आनंद और विकास !हो वर्धमान ,रहे प्रकाशमान ! काकासाआपके जीवन के हर पल में संग !बच्छराज काकासा का20 जनवरी को जबजन्मदिन आता है तोहमको यह बात बताता है किहम सदैव फूलों…

  • नशे से हुआ इंसान बर्बाद

    नशे से हुआ इंसान बर्बाद उड़ता युवा नशा मुक्त समाज की ओर बढ़ते कदम,एक सपना है जो सच होने की उम्मीद है।।नशे की जंजीरों से मुक्त होकर,हम एक नए युग की ओर बढ़ सकते हैं। नशा मुक्त समाज में हर कोई होगा स्वस्थ,हर कोई होगा खुशहाल, हर कोई होगा समृद्ध।नशे की लत से मुक्त होकर,हम…

  • रंग दे बसंती चोला

    रंग दे बसंती चोला रंग दे बसंती चोला,मेरे देश की धरती को,रंग दे बसंती चोला। तेरी खुशबू से महके,मेरे देश की हवा को,तेरी खुशबू से महके। तेरे रंग से रंगे,मेरे देश की धरती को,तेरे रंग से रंगे। तेरी खुशियों से खिले,मेरे देश की फसलें को,तेरी खुशियों से खिले। तेरे प्यार से प्यारे,मेरे देश के लोगों…

  • आदिवासी समाज

    आदिवासी समाज संस्कृतिमें हमारीप्रेम अपार है,प्रेम से ही सुगन्धितसारा संसार आदिवासी समाजने पहलकी प्रकृतिकी, प्रकृतिके बिना खवाबोंका नकोई आकार है…”“समय आने परदिखा देना किआपने क्या किया है मानवता की खातिरजरूरत सेज़्यादा मौनआपके पक्ष कोकमज़ोरसाबित करता है…“जंगल के जीवों सेआपका उचित हैव्यवहारजिससे आपके यश काहोता है विस्तार…”“माटी ने आवाज़दी है साथियों, आजफिर एक रण लड़ा जाएप्रकृति…

  • उरी विजय की गूंज

    उरी विजय की गूंज जंगलों में गूंजे थे धमाके,भारत की सेना ने किया था हमला,नियति की दिशा बदल दी थी,सर्जिकल स्ट्राइक का था ऐलान। शेर की तरह ललकारते हुए,हमने दुश्मन को घेरा था,उरी की धरती पर निशान छोड़ा,शौर्य का इतिहास फिर से लिखा था। हमारे दिलों में जज्बा था,आत्मविश्वास से भरे थे हम,किसी भी चुनौती…

  • अलौकिक प्रतिष्ठा

    अलौकिक प्रतिष्ठा तुम शब्दों से परे हो,तुम्हें बयाँ करना मेरे लिए आसान नहीं।तुम्हारी सरलता में छिपा है गहराई का सागर,तुम्हारी मुस्कान में है दुनिया का उजाला। तुम वो हो, जो खुद को भूलकर,हर पल दूसरों के लिए जीता है।तुम्हारी सोच, सकारात्मकता का एक दर्पण है,जो हर अंधकार में रोशनी लाती है। तुम्हारे कंधों पर समाज…

  • मकर संक्रांति का आगमन

    मकर संक्रांति का आगमन पूस माह कीठंडी ठिठुरती रातेंऔर मकर संक्रांति काआगमन,लोहड़ी, बिहू, उगादि, पोंगलदेते दस्तक दरवाजों पर,मन प्रसन्न हो उत्सवके जश्न में जुट जाता,समझा जातातिल, गुड़, खिचड़ी,दान- धर्म – पुण्यके महत्व को।छोड़ सूर्यदेव दक्षिणायन को,प्रस्थित होते उत्तरायण में।थमें हुए समस्त शुभ-कार्यप्रारम्भ होतेइस दिन से।इसी दिन त्यागी देह,भीष्म पितामह ने,माँ यशोदा नेव्रत अनुष्ठान किया।माँ गंगा…