कविताएँ

  • बदलते रिश्ते | Poem badalte rishtey

    बदलते रिश्ते ( Badalte rishtey )   रिश्ते बदलते सारे रिश्तो की अब डोर संभालो। प्रेम की धारा से खींचो प्यार के मोती लुटा लो।   मतलब के हो गए हमारे सारे रिश्ते नाते। खो गया प्रेम पुराना खोई सब मीठी बातें।   स्वार्थ रूपी शेषनाग डस रहा है रिश्तो को। सद्भाव प्रेम को भूल…

  • मिलने की आस | Poem milne ki aas

    मिलने की आस ( Milne ki aas )   मिलना हो तुझसे ऐसी तारीख मुकर्रर हो जाए मैं जब भी आऊं तेरा बनकर तू भी मेरी हो जाए न रहे दूरियां एक दूजे में कुछ ऐसा वो पल हो लग जाउँ गले से तेरे मैं तू मेरे सीने से लग जाए ये ख्वाब भी कितने…

  • उठो पार्थ | Kavita utho parth

    उठो पार्थ (  Utho parth )     उठो पार्थ प्रत्यंचा कसो महासमर में कूद पड़ो। सारथी केशव तुम्हारे तुम तो केवल युद्ध लड़ो।   धर्म युद्ध है धर्मराज युधिष्ठिर से यहां महारथी महाभारत बिगुल बजाओ उद्धत होकर हे रथी।   कर्ण भीष्म पितामह से महायोद्धा है सारे भारी। धनंजय धनुष बाण लेकर करो युद्ध…

  • राम | Shri ram ji ki kavita

    राम ( Ram )   १. रघुपति राघव रघुनाथ राम,भव भंजक प्रभु लीला ललाम आदर्शों के अवतार तुम्हें ,भारत की संस्कृति के प्रणाम! २. हे सर्वश्रेष्ठ मानव स्वरूप , तुम हर युग के इतिहास नवल जग में कोने कोने फैले , तुमसे जीवन विश्वास धवल! ३. यह एक शब्द का “राम” नाम,है जीवन का आधार…

  • हंसते हंसते लोटपोट | Kavita hansate hansate lotapot

    हंसते हंसते लोटपोट ( Hansate hansate lotapot )     खिलखिलाकर हंस पड़े लोटपोट हो गए सारे। कहकहे गूंज उठे गगन में भी मुस्कुराए तारे।   हंसो हंसाओ सबको आनंद की बरसात हो। हंसी खुशी में दिन बीते खुशियों भरी रात हो।   हंसी मजाक की बात करें हंसमुख कहलाते वो। हंस-हंसकर जीवन में स्वर्ण…

  • ओ निर्मोही | Kavita o nirmohi

    ओ निर्मोही ( O nirmohi )   ओ निर्मोही ओ निर्मोही चले गए क्यों, छोड मुझें परदेश। तपता मन ये तुम्हें बुलाए, लौट के आजा देश। तुम बिन जीना नही विदेशिया,पढ लेना संदेश। माटी मानुष तुम्हे बुलाए, छोड के आ परदेश।   2. चटोरी नयन  चटोरी नयन हो गयी, पिया मिलन की आस में। निहारत…

  • मेरे श्री राम | kavita mere shri Ram

    मेरे श्री राम ( Mere Shri Ram )   त्याग तपस्या मर्यादा के प्रति पालक मेरे श्रीराम जन जन आराध्य हमारे सृष्टि संचालक प्रभु राम   हर लेते है पीर जगत की दीनबंधु दयानिधि राम मंझधार में अटकी नैया पार लगाते मेरे प्रभु राम   दुष्टों का संहार करें प्रभु सकल चराचर के स्वामी घट…

  • तपन | Kavita Tapan

    तपन ( Tapan )   कितनी प्यारी सी तपन भरी थी उनकी मुस्कान में फरिश्ता  सी  लगने  लगी हमें भीड़ भरे जहान में   मदद को बढ़ा दिए हाथ साथ दे दिया जीवन में उनके प्यार की तपन से खिल गए फूल चमन में   महकी फुलवारी सारी प्रीत भरी बयार बहने लगी सद्भावों की…

  • युग | Kavita yug

    युग ( Yug )   युगो युगो से परिवर्तन की आंधी चलती आई हम बदलेंगे युग बदलेगा सब समझो मेरे भाई   सत्य सादगी सदाचरण जीवन में अपनाओ युग निर्माण करने वालों प्रेम सुधा बरसाओ   त्रेतायुग में रामचंद्रजी मर्यादा पुरुष कहलाए द्वापरयुग में द्वारिकाधीश माखन मिश्री खाए   कलयुग में महापुरुषों ने शुभ कर्म…

  • कमरे की घुटन | Kavita kamare ki ghutan

    कमरे की घुटन ( Kamare ki ghutan )   बंद कमरे में सिमट कर रह गई दुनिया सारी टूट रहे परिवार घरों से बिखर गई है फुलवारी   मनमर्जी घोड़े दौड़ाए बड़ों का रहा लिहाज नहीं एकाकी सोच हो गई खुलते मन के राज नहीं   बंद कमरों की घुटन में नर रहने को मजबूर…