कविताएँ

  • गणपति वंदना | Ganpati Vandana

    गणपति वंदना : दुर्मिल-छंद ( Ganpati Vandana )   बल बुद्धि विधाता,सुख के दाता, मेरे द्वार पधारो तो। जपता हूं माला,शिव के लाला, बिगड़े काज सवारों तो। मेरी पीर हरो,तुम कृपा करो, भारी कष्ट उबारो तो। तेरा दास जान,तुम दयावान, मेहर करो भव तारो तो।।   सिर मुकुट जड़ा है,भाग बड़ा है, बड़ी सोच रखवाले…

  • स्वामी- विवेकानंद | Swami Vivekananda Par kavita

    स्वामी- विवेकानंद ( Swami Vivekananda ) ( 3 )  कोलकाता के कुलीन कयस्थ परिवार में पुत्र उत्पन्न हुआ। पिता विश्वनाथ दत्त,माता भुनेश्वरी देवी जग में महान थी, जिसके घर में स्वयं विश्व धर्म मार्गदर्शन गुरू प्रकट हुआ।। देशभक्त सन्यासी बनकर मातृभूमि का नमन करू जो, सारे जीवों में स्वयं परमात्मा का अस्तित्व है वंदन करे…

  • तलाश | Talaash par Kavita

    तलाश ( Talaash )   हर्षित मन में उठती लहरें, लगता कोई खास है। जन्मो जन्मो का नाता है, जिसकी हमें तलाश है।   खिल उठा विश्वास मन का, जो अजब एहसास है। ह्रदय के कोने कोने में, मोहक मधुरता का वास है।   लगे सुहानी शाम हर पल, जिंदगी रोशन सारी। ढूंढ रही पलकें…

  • प्रथम पूज्य आराध्य गजानंद | Kavita

    प्रथम पूज्य आराध्य गजानंद ( Pratham pujya aradhya gajanand )   बुद्धि विधाता विघ्नहर्ता, मंगल कारी आनंद करो। गजानंद गौरी सुत प्यारे, प्रभु आय भंडार भरो।   प्रथम पूज्य आराध्य गजानंद, हो मूषक असवार। रिद्धि-सिद्धि संग लेकर आओ, आय भरो भंडार।   गणेश देवा गणेश देवा,जन खड़े जयकार करे। लंबोदर दरबार निराला, मोदक छप्पन भोग…

  • प्रथम पूज्य आराध्य गजानन | Kavita

    प्रथम पूज्य आराध्य गजानन ( Pratham pujy aradhy gajanan )   आओ मिल करते अभिनंदन। देव अग्रज गणपति को वंदन।।   ज्ञान के दाता बुद्धि विधाता, चौड़ा मस्तक हमें सिखाता, दर्शन दो प्रभु द्वार खड़े हैं, पार्वती शिव के हो नंदन। देव अग्रज गणपति को वंदन।।   गज सा बदन लिए हो भारी। मूषक पर…

  • मैं हिंदी हूँ | Hindi Diwas par Kavita

    मैं हिंदी हूँ  ( Main Hindi Hoon )   मैं हिंदी हूँ हिंद की जय बोलती हूँ, देश के कण-कण में मेरे प्राण बसे प्रेम-भाईचारे के भाव से सभी के दिलों को जोड़ती हूँ मैं हिंदी हूँ, हिंद की जय बोलती हूं । मैं हिंदी हूँ, हिंद की जय बोलती हूं ।   भारतवर्ष देश है…

  • सृजन का दीप जले दिन रात | Srijan ka Deep

    सृजन का दीप जले दिन रात (  Srijan ka deep jale din raat )   लिखें लेखनी सोच समझ कर,देख नए हालात। विषय सामयिक सृजन का,दीप जले दिन रात।।   चार स्तंभ अटल खड़े हैं,राष्ट्र का मान बढ़ाने को । कलम की ताकत बनी हमेशा,उच्च शिखर पहुंचाने को। सोया देश जगाने को, ना करें कोई…

  • अंतर्मन की बातें | Kavita

    अंतर्मन की बातें ( Antarman ki baatein )   अंतर्मन की बातें निकल जब, बाहर आती हैं। हर पल बदलती जिंदगी, कुछ नया सिखाती है।।   खुशी से हर्षित है ये मन, निशा गम की छा जाती है । कभी बिछुड़न बना है दर्द, मिलन से खुशियां आती है।।   कभी ऐसे लगे जीवन ,खुशनसीब…

  • बेटी | Kavita

    बेटी ( Beti )   बेटी- है तो, माँ के अरमान है, बेटी- है तो, पिता को अभिमान है! बेटी- है तो, राखी का महत्त्व है, बेटी- है तो, मायका शब्द है!   बेटी- है तो, डोली है, बेटी- है तो, बागों के झुले हैं! बेटी- है तो, ननद- भाभी की ठिठोली है! बेटी- है…

  • शिक्षक दिवस | Kavita Shikshak Divas

    शिक्षक दिवस ( Shikshak divas ) ( 2 )  शिक्षक देता है सदा सबको ज्ञान। शिक्षक सदा ही रखता सबका ध्यान।। शिक्षक है जीवन में ऐसे जैसे कुम्हार। शिक्षक सदा ही करें जीवन उद्धार।। शिक्षक के सदा ही रहते कर्जदार। शिक्षक सदा ही होते ईमानदार।। शिक्षक करता चमन गुलजार। अच्छे गुरु का जीवन में रहता…