शिक्षक दिवस

शिक्षक दिवस | Kavita Shikshak Divas

शिक्षक दिवस

( Shikshak divas )

( 2 ) 

शिक्षक देता है सदा सबको ज्ञान।
शिक्षक सदा ही रखता सबका ध्यान।।
शिक्षक है जीवन में ऐसे जैसे कुम्हार।
शिक्षक सदा ही करें जीवन उद्धार।।
शिक्षक के सदा ही रहते कर्जदार।
शिक्षक सदा ही होते ईमानदार।।
शिक्षक करता चमन गुलजार।
अच्छे गुरु का जीवन में रहता इंतजार।।
शिक्षक जीवन देता सदा उभार।
शिक्षक का जीवन में सदा करें आभार।।
शिक्षक करें सबके मन के दूर अंधकार।
शिक्षक ही जीवन को देता है आकार।।
शिक्षक का सदा करें सत्कार।
शिक्षक सदा करें दूर मन के विकार।।
शिक्षक से ही होते सपने साकार।
शिक्षक ही जीवन के कर्णधार।।
शिक्षक है जीवन के सच्चे अलंकार।
शिक्षक की सदा करें जय जयकार।।
स्वरचित और मौलिक कविता

सुनील कुमार
नकुड़ सहारनपुर
उत्तर प्रदेश भारत

( 1 ) 

सतगुरु संत सुजान आपका,
कैसे मैं गुणगान करूं।
शरण पड़ा हूंआप उबारो,
नित चरणों में ध्यान धरूं।।

मैंअनजाना चला जा रहा,
मुझको पथ का ज्ञान नहीं।
घटा घिरी है दुख की भारी,
कैसे उबरूं भान नहीं ।

खुदआप बनो अनजान नहीं।
मैं विनती बारंबार करूं ।।
शरण पड़ा हूं आप उबारो,
नित चरणों में ध्यान धरूं।।

पाप कपट का खेल रचा है
,माया ने आ घेरा है।
अंधकारमय जीवन मेरा,
दिखता नहीं सवेरा है।

काल बली ने डाला डेरा
कौन जन्म का दंड भरूं।
शरण पड़ा हूं आप उबारो,
नित चरणों में ध्यान धरूं।।

जड़मति हूं अज्ञानी हूं मैं,
भटक रहा भवसागर में।
डगमग डोले नैया मोरी,
पार लगाओ आकर के।

सत्य वचन मधुरस पाकर के,
खुले चमन में मस्त फिरूं।।
शरण पड़ा हूं आप उबारो,
नित चरणों में ध्यान धरूं।।

कच्ची माटी का हूं पुतला,
आकर तुम आकार भरो ।
देशभक्ति मानवता भर दो,
छल कपट अहंकार हरो।

जांगिड़ सच्चा प्यार भरो तुम,
पर सेवा उपकार करूं।।
शरण पड़ा हूं आप उबारो,
नित चरणों में ध्यान धरूं।।

?

कवि : सुरेश कुमार जांगिड़

नवलगढ़, जिला झुंझुनू

( राजस्थान )

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