कविताएँ

  • 24+ Desh Bhakti Kavita in Hindi देश भक्ति कविता हिंदी में

    यह विद्वानों और उत्कृष्ट कवियों द्वारा लिखित हिंदी में सर्वश्रेष्ठ देशभक्ति कविताओं (desh bhakti kavita in hindi) का संग्रह है। हर साल 26 जनवरी को भारत अपने गणतंत्र दिवस पूरे उत्साह के साथ मनाता है। इस दिन, सेना परेड शुरू करती है, एयर शो प्रदर्शित करती है, और सैनिकों और योग्य उम्मीदवारों को बहादुरी पुरस्कार…

  • नाग पंचमी विशेष | Nag Panchami Par Kavita

    नाग पंचमी विशेष ( Nag Panchami Par Kavita )   इक प्याले मे दूध लिए, पत्नी आई मुस्कराई। तुमको मेरे प्राण नाथ, नाग पंचमी की बधाई।   पी लो हे प्रिय नटराजा के, विष तो तुमरी वाणी है। एक वर्ष में एक बार ही, विष में धार लगानी है।   क्यों मै ढूंढू अन्य नाग…

  • प्रीति के गीत | Hindi Poetry

    प्रीति के गीत ( Preeti ke geet )   प्रीत के गीत गाकर सयानी हुई, मै हूं मीरा जो मोहन दीवानी हुई।   राग  और  रागिनी में समाई हूं मैं, ताल और छंद संग लेकेआई हूं मैं। सुर सरिता की मैं एक कहानी हुई। मै हूं मीरा जो मोहन दीवानी हुई।   हिन्द कीशान और…

  • यह मेरा हिंदुस्तान है | Hindi Poetry

    यह मेरा हिंदुस्तान है ( Yah mera hindustan hai )   यह मेरा हिंदुस्तान है, यह मेरा हिंदुस्तान है। ध्वज तिरंगा हाथों में, ले राष्ट्रगीत गाते हैं।   सरहद के सिपाही, सीमा के सभी जवान। आंधी तूफानों से भिड़, आगे बढ़ते जाते हैं।   कूद पड़े मैदानों में, धरती मां के लाडले। बलिदानी राहों पर,…

  • हृदय मेरा पढ़ पाए | kavita

    हृदय मेरा पढ़ पाए ( Hriday mera padh paye )   अन्तर्मन में द्वंद बहुत है, जाकर किसे दिखाए। ढूंढ रहा हूँ ऐसा मन जो, हृदय मेरा पढ़ पाए।   मन की व्याकुलता को समझे,और मुझे समझाए। राह दिखे ना प्रतिद्वंदों से, तब मुझे राह दिखाए।   बोझिल मन पर मन रख करके,हल्के से मुस्काए।…

  • सावन आया उमड़ घुमड़ | Geet

    सावन आया उमड़ घुमड़ ( Sawan aya umad ghumad )   बरस रही है राष्ट्रधारा, सावन उमड़ा आता। रिमझिम रिमझिम मेघा बरसे, उर आनंद समाता   काली बदरिया उमड़ घुमड़, घूम घूम घिर आये। हरियाली से भरी धरा, सबको सावन भाये।   झूम झूम मस्ती में गाते, सब मिलकर नया तराना। मंद मंद बहारें बहती,…

  • शिव महिमा | Shiv Mahima Par Kavita

    शिव महिमा  ( Shiv Mahima Par Kavita )   हिम शिखरों से भोले के, जयकारे आते है, शंख और डमरू मिलकर, शिव कीर्तन गाते हैं।   शिव ही गगन धरा भी शिव ही, हमें बताते है, गान संग है गीत भी शिव, हम महिमा गाते हैं।   पंचतत्व निर्मित शिव से, शिव रूप दिखाते है,…

  • कजरी सावन | Sawn Par Kavita

    कजरी ‘सावन’ ( Kajari savan )   अबकी सावन में हमै चाही चीज मनमानी सैंया। बरसइ रिमझिम पानी सैया, सबदिन कहां जवानी सैंया ना।। सासु ससुर तीरथ यात्रा पर चार महीने डटे रहें। ननद रहे ससुराल में अपने जेठ भी घर से हटे रहें। पास पड़ोसी घर न आवै दूर-दूर ही कटे रहें। नदी नार…

  • बचपन के दिन | kavita

    बचपन के दिन ( Bachapan ke din ) पलकों  पे  अधरों  को  रख कर, थपकी देत सुलाय। नही रहे अब दिन बचपन के, अब मुझे नींद न आय।   सपने  जल गए भस्म बन गई, अब रोए ना मुस्काए, लौंटा दो कोई  बचपन के दिय, अब ना पीड़ सहाय।   किससे मन की बात कहे,…

  • क्रांतिवीर | Kranti Diwas Par Kavita

    क्रांतिवीर ( क्रांति दिवस पर अमर शहीदों के जज्बातों को सादर वंदन )   है हिमालय सा हौसला, सागर सी गहराई है। क्रांति काल में वीरों ने, प्राणों की भेंट चढ़ाई है। हंसते-हंसते झूल गए, वो क्रांतिवीर कमाल हुए। राजगुरु सुखदेव भगतसिंह, भारत मां के लाल हुए।   आजादी का दीवाना, वो जिद पर अड़…