कविताएँ

  • मोहन सी प्रीति | Kavita Mohan see Preeti

    मोहन सी प्रीति ( Mohan see Preeti ) मन का भोलापन कैसे बताए, कभी खिला-खिला कभी मुरझाए। कहता नहीं फिर भी कहना चाहे, बिन जाने सुने तर्कसंगत बन जाए। गम का छांव लिपटस सा लिपट ले, तो अनमना मन कभी रूदन को चुन ले। संघर्ष से डरता नहीं फिर भी अग्रसर नहीं, तूफानो से भिड़ता…

  • मनुष्य जीवन | Kavita Manushya Jeevan

    मनुष्य जीवन ( Manushya Jeevan ) मानव जीवन की गाथा तुमको सुनता हूँ। जीवन का एक सत्य तुमको बताता हूँ। मानवता का दृश्य भी तुमको दिखता हूँ। किस्मत का भी खेल तुमको बताता हूँ।। आया हो संसार में लेकर मानव जन्म। पूरब भव में तुमने किये थे अच्छे कर्म। इसलिए तो तुमको मिला है मानव…

  • बरसात का आगमन | Kavita Barsaat ka Aagman

    बरसात का आगमन ( Barsaat ka Aagman ) एक गौरैया बारिश में अपने पंख फैलाकर जब नहाती है तब सूचना देती है वह बारिश के आगमन का। और बादल आपस मे टकराकर टूटते है, बिखरते ही अपनी बूंदो को इस धरा पर दूर किसी बस की खिड़की में तब झाँकता दिखलाई देता है एक धुंधला-सा…

  • वर्जिन सुहागन | Kavita Virgin Suhagan

    वर्जिन सुहागन ( Virgin Suhagan ) कब मेरा अस्तित्व, वेदनाओं, संवेदनाओं,दर्दो ओ ग़म का अस्तित्व बना पता ही न चला। एहसासों के दामन तले जीते गए भीतर और भीतर मेरे समूचे तन ,मन प्राण में, उपजे मासूम गुलाबों को, कब हां कब तुमने कैक्टस में बदलना शुरू किया, हमें पता ही न चल पाया। अहसास…

  • छेंड़ कर | Kavita Chhed Kar

    छेंड़ कर ( Chhed Kar ) छेंड़ कर इस तरह न सताया करो, रूठ जाऊॅ अगर तो मनाया करो, दिल मेरा तेरी यादों की है इक गली, याद बनकर कभी इनमे आया करो। गीत कारों ने नज्में लिखे हैं बहुत, गीत मेरे लिए भी कोई गाया करो, इस तरह से मेरी कट पाएगी नहीं, दर्दे…

  • श्रोताओं का आनंद | Kavita Shrotaon ka Anand

    श्रोताओं का आनंद ( Shrotaon ka Anand ) बहुत कुछ मैंने अपने गीतों कविताओं में लिखा। जिनके हर शब्दो में प्यार बहुत झालाकता है। इसलिए तो परिवर्तन की लहर चल रही है। और लोगों की देखो सोच कैसे बदल रही है।। मेरे ही शब्द अब मुझको बहुत ही चुभ रहे है। पर दुनिया के लोगों…

  • किस्सा कागज़ का | Kissa Kagaz ka

    किस्सा कागज़ का ( Kissa Kagaz ka ) ज़िंदगी का पहला कागज़ बर्थ सर्टिफिकेट होता है। ज़िंदगी का आख़िरी कागज़ डेथ सर्टिफिकेट होता है। पढ़ाई लिखाई नौकरी व्यापार आता है काम सभी में, ज़िंदगी का सारा झमेला भी कागज़ ही होता है। चूमती है प्रेमिका महबूब का खत अपने होंठो से, प्रेम का आदान-प्रदान भी…

  • उधम सिंह सरदार | Kavita Udham Singh Sardar

    उधम सिंह सरदार ( Udham Singh Sardar ) आन-बान थे देश की, उधम सिंह सरदार। सौरभ’ श्रद्धा सुमन रख, उन्हें नमन शत बार।। वैशाखी की क्रूरता, लिए रहे बेचैन। ओ डायर को मारकर, मिला हृदय को चैन।। बर्बरता को नोचकर, कर ओ डायर ढेर। लन्दन में दहाड़ उठा, भारत का ये शेर।। बच्चा-बच्चा अब बने,…

  • रिमझिम बूंदों की बहार | Rimjhim Boondon ki Bahar

    रिमझिम बूंदों की बहार ( Rimjhim boondon ki bahar ) रिमझिम बूँदों की बहार आई, हरियाली चहुॅओर देखो छाई। श्रृंगार करने को आतुर धरित्री, रीति नवल अभ्यास देखो लाई। मिट्टी से सोंधी महक उठ रही, मलय सौरभ से मस्त हो रही। न भास्कर न रजनी आते गगन में, बस सावन की रिमझिम बरस रही। तन…

  • सूझबूझ | Soojh – Boojh

    “माँ, तुम मंदिर जाती हो न?” सुधीर ने अपनी मांँ से सवाल किया। ” हांँ, जाती तो हूँ।” मांँ ने अपने बेटे के पूछे सवाल का जबाब दिया। “तब, धर्म और अधर्म ये दोनों कौन हैं? जिनके नारे जय और नाश के लिए लगाए जाते हैं।” सुधीर की बातें मां को अच्छी नहीं लगी फिर…