कविताएँ

  • तुम ही तो माँ | Kavita Tum Hi to Maa

    तुम ही तो माँ ( Tum Hi to Maa ) सुबह सवेरे जब तुम मुझे उठाती थी, एक रौशनी सी मेरे आंखों को छू कर जाती थीं। उठ कर, हाथों से जब मैं आंखें मलती थी, ” सुबह हो गई बेटा ” कह कर तुम सीने से मुझे लगाती थी। देख कर तुम्हारी प्यारी सी…

  • धर्म साधना का महीना | Dharma Sadhana ka Mahina

    धर्म साधना का महीना ( Dharma Sadhana ka Mahina ) लगा है सावन का महीना विचारो में आस्था जगी है। धर्म की ज्योति भी देखो दिलों में जल उठी है। तभी तो सावन में देखो मंदिरो में भीड़ लगी है। और प्रभु दर्शन पाने की सभी में होड़ लगी है।। सिर अपना झूका कर प्रभु…

  • प्रेम का नाता | Kavita Prem ka Nata

    प्रेम का नाता ( Prem ka Nata ) यह कैसा, प्रेम का नाता है? कितनी भी ,अनबन हो चाहे । यह पुनः ,लौट कर आता है। जितना बचना ,चाहें इससे । यह उतना, बढ़ता जाता है। हटाकर घृणा, को यह पुनः। अपना स्थान, बनाता है । सबकी चालों, को सहकर भी। यह हर क्षण ,…

  • डॉ. सत्यवान सौरभ की कविताएं | Dr. Satyawan Saurabh Hindi Poetry

    “ये कांवड़ उठाने से कुछ नहीं होगा” कांवड़ उठाए घूम रहा है,कंधों पे धर्म लादे जा रहा है,गांव का होनहार मर गया,माँ बेटे की राख छू रही है……और सरकार चुप है। शिक्षक था बाप, फिर भी मौन रहा,सिखा न सका—कि आस्था नहीं, पढ़ाई बचाती है!पर वो चुप रहा…क्योंकि आस-पास मंदिर थेऔर इलेक्शन नज़दीक था। बच्चा…

  • दोस्त | Kavita Dost

    दोस्त ( Dost ) ( 2 ) दोस्त बिना है जीवन अधूरा लड्डू सी है गजब दोस्ती आटा संग जैसे रमे बूरा बिन कहे पहचान सब जाए ह्दय मन हलचल का हाल पूरा मित्रता नमक और पानी धरती और फसल धानी ना शर्म झिझक ना कोई बने ज्ञानी कृष्ण सुदामा की अनुपम कहानी बचपन से…

  • मित्र दिवस | Kavita Mitra Divas

    मित्र दिवस ( Mitra Divas ) चेहरा भूल जाओगे तो, शिकायत नहीं करेंगे। नाम भूल जाओगे तो, गिला नहीं करेंगे। और मेरे दोस्त, दोस्ती कि कसम है तुझे। जो दोस्ती भूल जाओगे, तो कभी माफ नहीं करेंगे। खुशी से दिल, आबाद करना मेरे दोस्त। और गम को दिल से आज़ाद करना। हमारी बस इतनी, गुजारिश…

  • गठबंधन | Kavita Gathbandhan

    गठबंधन ( Gathbandhan ) तेरे मेरे मिलन से हम लोग खुश है। मानो जैसे जिंदगी अब करीब आ गई हो। जतन किये थे हमने इसलिए मिल गये हो। और मेरी जिंदगी में फूल खिला दिये हो।। प्यार मोहब्बत करते नही तो हम दोनों मिल नहीं पाते। जिंदगी की हकीकत को हम समझ नही पाते। और…

  • सावन की फुहार | Kavita Sawan ki Fuhar

    सावन की फुहार ( Sawan ki Fuhar ) सावन की पड़ें फुहार तन मन में मस्ती छा जाए मेघा गाएं राग मल्हार जियरा धक-धक करता जाए ।। जियरा धक-धक करता जाए दिल में कोई हूक उठाए धरती अंबर का ये प्यार जियरा धक-धक करता जाए।। सावन की पड़े फुहार तन-मन में मस्ती छा जाए ।।…

  • आज़ादी | Hindi Poem Azadi

    आज़ादी ( Azadi ) है कोई सैनानी सड़कों पर आ कर हम को भी दिलाऐ मंहगाई,बेरोजगारी, अशिक्षा और असमानता से, भूखमरी, अल्प पगारी, मिलावट और मक्कारी से, आज़ादी,,,!!! है कोई सैनानी सड़कों पर आ कर हम को भी दिलाऐ पूंजीवाद, जमाखोरी, भ्रम और भ्रष्टाचारी से, घृणा,अपमान, छूआछूत की बिमारी से, आज़ादी,,,!!! है कोई सैनानी सड़कों…

  • गौर किया कर | Kavita Gaur Kiya Kar

    गौर किया कर ( Gaur Kiya Kar ) जुमला है ये कठिन मगर कर, सोच समझ अपनाया कर, किसी को हानि न पहुचे वो कर, खुद को भी हर्षाया कर, जोड़ के अपने दोनो कर, सदा बड़ों का आदर कर, कहा गया जो सदा ही कर, प्रभु सम्मुख शीश झुकाया कर, मत औरों की निंदा…