कविताएँ

  • सावन मास | Kavita Sawan Maas

    सावन मास ( Sawan Maas ) सावन के मास में वो, शिवजी पर जल ढारत है। बेल पत्ती और फूलों से, पूजा नित्यदिन करती हैं। मनोकामना पूरी कर दो, सावन के इस महीने में। मिलवा दो प्रभु अब मुझे, उस जीवन साथी से। जिसके सपने देख रही, मानो कितने वर्षों से। अब की बार खाली…

  • हम भारत और नेपाल हैं | Kavita Nepal Bharat Sambandh Par

    हम भारत और नेपाल हैं ( Hum Bharat Aur Nepal Hain )  हम भारत और नेपाल हैं एक सुदामा तो एक गोपाल हैं सदियों से हम एक हैं भिन्नताएं न अनेक है एक पहाड़ के छांव है एक ही शहर गांव है हम दोनों ठहरते हैं जहां मानो एक ही चौपाल है एक सुदामा एक…

  • राज़ | Kavita Raaj

    राज़ ( Raaj ) दिवाली की रात आने वाली है, पर दिवाली ही क्यों? रोजमर्रा की जरूरत गरीबी ,लाचारी, सुरसा के मुंह की तरह मुंह खोल खड़ी है। जाने क्या गज़ब ढाने गई है वो? लौट के जब आएगी, चंद तोहफ़े लायेगी। भूख ,प्यास से, बिलख रही है उससे जुड़ी जि़दगीयां अचानक अचंभा हुआ—— कुछ…

  • सावन महिना भाता है | Sawan Mahina Bhata Hai

    सावन महिना भाता है ( Sawan Mahina Bhata Hai ) सावन का महीना चल रहा शिव-पार्वती जी का आराम। गृहस्थ और कुवारों को भी काम काज से मिली है छुट्टी। जिसके चलते कर सकते है शिव-पार्वती जी की भक्ति। श्रध्दा भक्ति हो गई कबूल तो मिल जायेंगे साक्षात दर्शन।। कहते है साधु-संत और भक्तगण होता…

  • सावन फुहार | Kavita Sawan Fuhaar

    सावन फुहार ( Sawan Fuhaar ) रिमझिम जो सावन फुहार बरसी, जमीं को बुझना था फिर भी तरसी, जो बिखरीं जुल्फों मे फूटकर के, वो बूंद जैसे जमीं को तरसी, रिमझिम जो…………. हमारे हाॅथों मे हाॅथ होता, पुकार सुनकर ठहर जो जाते, बहार ऐसे न रूठ जाती, बरसते सावन का साथ पाते, अजी चमन मे…

  • कुंदन बना दिया | Kuundan Bana Diya

    कुंदन बना दिया ( Kuundan Bana Diya ) रक्तरंगी हादसों ने काम ये किया शारदा की साधना में रंग भर दिया आसमाँ की चाह थी ना आसमाँ मिला भूमि पर भी चैन मुझे लेने ना दिया सात फेरे भूख से है प्यास से लीव ईन वक्त ने दो पाट को बीवी बना दिया स्वप्नमाला से…

  • हालाते जिंदगी | Halat-E-Zindagi

    हालाते जिंदगी ( Halat-E-Zindagi ) अचानक एक ख़्याल ने, हमें अपने में बांध लिया। ताने-बाने बुनती जिजिविकाओं, ज़िंदगी के हालातो से रूबरू कराने के प्रयास ने हमें, उस मोड़ पर न जाने कितने बरसों पीछे ले जाकर छोड़ दिया। और फिर हां फिर एक-एक चेहरा शतरंज के मोहरे सा मानस पटल पर अपनी, मौजूदगी स्थापित…

  • एकता का सूत्र | Kavita Ekta ka Sutra

    एकता का सूत्र ( Ekta ka Sutra ) समय की पुकार को समझो और अपने आप को बदलो। हम इंसान है और इंसानो की इंसानियत को भी समझो। अनेकता में एकता को देखों आबाम की बातों को सुनों। शांति की राह को चुनो और शांति स्थापित करो।। देश दुनिया की बातें करते है अपने आप…

  • डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम | Kavita Dr. A.P.J. Abdul Kalam

    डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम ( Dr. A.P.J. Abdul Kalam ) तुझे महकता फूल कहूँ या, तुझे  अनंत  आकाश कहूँ। पूर्व राष्ट्रपति  मिसाइल मैन, या तुझे मैं  हिंदुस्तान  कहूँ। कलम में इतनी  शक्ति नहीं, मैं कैसे तेरा गुणगान करूँ? हे!   कर्मयोगी,   शिक्षाविद, किन शब्दों में  बयान करूँ। युवा पीढ़ी की शक्ति थे तुम, जाति – पाँत से  परे थे तुम।…

  • कोई प्रहरी | Geet Koi Prahari

    कोई प्रहरी ( Koi Prahari ) कोई प्रहरी काश लगा दे,ऐसा भी प्रतिबंध । किसी ओर से बिखर न पाये,धरती पर दुर्गंध ।। दिया हमीं ने नागफनी अरु,बबूल को अवसर क्यों बैठे हम शाँत रहे, सोचा कभी न इस पर कभी तो कारण खोजो आये,कैसे यहाँ सुगंध ।। गुलमोहर -कचनार-पकड़िया , आम -नीम-पीपल आज चलो…