कविताएँ

  • बुद्धसिस्ट | Kavita Buddhist

    बुद्धसिस्ट  ( Buddhist )   बुद्ध विशुद्ध मुक्ति का मार्ग बुद्ध विशुद्ध ज्ञान का मार्ग बुद्ध थर्म नहीं धम्म है बुद्ध में मानव सम्म है मन तन वचन तीन ताप बुद्ध मत में तीन पाप बुद्ध शर्ण गच्छामि शुद्ध संस्कार धम्म शर्ण गच्छामि शुद्ध संस्कार संघ शर्ण गच्छामि मुक्ति दाता बुद्ध विशुद्ध ज्ञान ध्यान दाता…

  • समय का न करें दुरुपयोग

    समय का न करें दुरुपयोग   समय का ना करों मित्र मेरे दुरुपयोग मुश्किल से मुश्किल घड़ी आने का बन रहा है योग देखों, दिख रहा है महंगाई का प्रकोप झेलना पड़ रहा है भारी इनका रौद्र रूप योग समय का ना,,,,,,,,, भाग नहीं सकेंगे इनसे यह है बड़ा कठोर वियोग इसमें समाएं जा रहा…

  • मानव, पानी और कहानी

    मानव, पानी और कहानी   जीवन झर झर झरता, है झरने सा, झरना झर झर बहता, है जीवन सा, मानव के ऑखो मे पानी, नदी, कूप, तालों मे पानी, पानी की कलकल है जरूरी, ऑखों की छलछल है जरूरी, मानव, पानी और कहानी, है धरती की यही निशानी, जीवन की जो कहानी है, झरने में…

  • विश्व चाय दिवस | Kavita International Tea Day

    विश्व चाय दिवस   प्रेम के रंग ,चाय के संग आधुनिक जीवन शैली, चाय महत्ता अद्भुत विशेष । भोर काल प्रथम स्मृत बिंदु, स्पर्श सह आनंद अधिशेष । हाव भाव प्रियेसी सम, चुस्की अंतर अपनत्व कंग । प्रेम के रंग,चाय के संग ।। मृदुल मधुर संवाद सेतु , चिंतन मनन भव्य आधार । स्वभाव उष्ण…

  • ज़िन्दगी | Kavita Zindagi

    ज़िन्दगी ( Zindagi )   कभी शोला, कभी शबनम, कभी मधुर झनकार ज़िदगी। कभी है तन्हाई का गीत, न जाने कब आयेंगे मीत, मिलन जब होगा परम पुनीत, धन्य जब होंगे नयन अधीर, लगती है अभिसार जिंदगी। बगीचे में जो रोपे फूल, बने फिर आगे चल कर शूल, नहीं मिलता है कोई कूल, जिगर के…

  • जल ही है जीवन का संबल

    जल ही है जीवन का संबल   जल ही है जीवन का संबल, जल ही जीवन का संचार! वन्य जीव फसलें जीवित सब, जल ही है सुख का आधार!! जल विहीन हो जीना चाहें, ऐसा संभव नहीं धरा पर! जल संचय करना हम सीखें, बर्बादी को रोकें परस्पर!! पर्यावरण प्रदूषित ना हो, वृक्ष से करें…

  • प्रेयसी सी लगती मधुशाला

    प्रेयसी सी लगती मधुशाला   दुःख कष्ट पीड़ा संग, परम मैत्री अनुभूति । असफलता बिंदु पर , नवल प्रेरणा ज्योति । सघन तिमिर हरण कर , फैलाती अंतर उजाला । प्रेयसी सी लगती मधुशाला ।। तन मन पट नव चेतना, उत्साह उमंग अपार । अपनत्व सा मृदुल स्पर्श , अंतर्द्वन्द अवसानित धार । अदम्य हौसली…

  • इंसानियत की राह पर | Insaniyat ki Raah Par

    इंसानियत की राह पर ( Insaniyat ki Raah Par )   इंसानियत की राह पर इंसान जब चलने लगेगा ! हृदय में तम से घिरा जो नूर है स्वयं ही दिखने लगेगा!! मंदिर मस्जिद गुरुद्वारे चर्च में तुमको नहीं दिख पाएगा! दीन दुखी निबलों विकलों की सेवा में वो मिल जाएगा !! मंत्र, जप- तप,…

  • साथ लम्हों का मिल जाए | Saath Lamhon ka

    साथ लम्हों का मिल जाए ( Saath lamhon ka mil jaye ) साथ लम्हों का मिल जाए। चेहरा मेरा भी खिल जाए। मिल जाएगा चैन मुझे भी। मस्त बहारें मन को हर्षाए। जब तू चाले चाल मोरनी की। मन मयूरा झूम झूमकर गाए। बज उठे दिल की घंटियां भी। लबों पर मधुर मुस्कानें छाए। तेरा…

  • तेरी दहलीज पर पापा | Teri Dehleez Par Papa

    तेरी दहलीज पर पापा   तेरी दहलीज पर पापा दो दिन का ठिकाना है। इसी में हंस लूँ,मुस्कुरा लूँ, यही विधि और विधान है। जिसने प्रेम से पाला पोसा वही हमारी नहीं दुनिया में। दूसरा कौन भला सोच हमारी? बचपन से मेरा है मेरा है घर, एक झटके में हो सब पराया। जन्म-जन्म का यह…