ग़ज़ल

  • बहकी-बहकी सी | Ghazal Behki Behki Si

    बहकी-बहकी सी ( Behki Behki Si ) बहकी-बहकी सी वो रहती तो है कब से, मन ही मन में कुछ वो कहती तो है कब से ! चल रहा है क्या ना जाने दिल में उसके, बन शिला सी सब वो सहती तो है कब से ! राज कुछ तो है छुपा दिल में दबाये,…

  • जो ख़त पढ़ो | Ghazal Jo Khat Padho

    जो ख़त पढ़ो  ( Jo Khat Padho ) जो ख़त पढ़ो तो इबारत पे ग़ौर मत करना हमारा ज़िक्र किताबों में और मत करना छुपाये बैठे हैं दिल में ख़िजां के ज़ख़्मों को हमारे फूल से चेहरे पे ग़ौर मत करना हरेक सिम्त ही रुसवाइयों के चर्चे हैं यूँ अपना ज़िक्र मेरे साथ और मत…

  • उसी के दिल में | तरही ग़ज़ल

    उसी के दिल में ( Usi ke dil me ) उसी के दिल में बसी मेरी जान थोड़ी है अकेली मुझपे वही मेहरबान थोड़ी है हँसी-मज़ाक है , वो बदज़बान थोड़ी है कि मुझसा उसका कोई क़द्रदान थोड़ी है सभी ने हुस्न की मलिका उसे कहा है यहाँ हमारा एक ये तन्हा बयान थोड़ी है…

  • अपना लिया बेगाने को | Ghazal Apna Liya

    अपना लिया बेगाने को ( Ghazal Apna Liya Begane ko ) मैंने देखा है न बोतल को न पैमाने को शैख आते हैं मगर रोज़ ही समझाने को जाम पर जाम दिये जायेगी जब उनकी नज़र कौन जा सकता है इस हाल में मैख़ाने को निकहत-ओ-नूर में डूबी हुई पुरक़ैफ फ़िज़ा इक नया रंग सा…

  • तितली लगती है | Ghazal Titli Lagti Hai

    तितली लगती है ( Titli Lagti Hai ) माह धनक खुशरंग फ़जा तितली लगती है पाक़ीज़ा फूलों सी वो लड़की लगती है। सौदा बेच रही है वो ढॅंक कर पेशानी बातों से ढब से सुलझी सच्ची लगती है। देख के उसको दिल की धड़कन बढ़ जाती है ना देखूं तो सांस मेरी रुकती लगती है।…

  • आजमाने लगे हैं | Aazamane Lage Hain

    आजमाने लगे हैं ( Aazamane Lage Hain ) जिन्हे दोस्त अब तक खजाने लगें हैं । वही दोस्ती आजमाने लगे हैं ।। हरिक झूठ जिनकी मुझे है अकीदत। मिरे सच उन्हे बस बहाने लगे हैं ।। नही मोल गम आसुओं की,तभी तो । बिना वज़्ह हम मुस्कुराने लगे है ।। शजर काटता वो बड़ी जालिमी…

  • नाम तेरा | Naam Tera

    नाम तेरा ( Naam Tera ) नाम तेरा सदा गुनगुनाता रहा । मन ही मन सोचकर मुस्कराता रहा ।। जब कभी ख्वाब में आप आये मेरे । रात फिर सारी घूँघट उठाता रहा ।। क्या हुआ मुश्किलों से जो रोटी मिली । प्रेम से तो निवाला खिलाता रहा ।। बद नज़र है जमाने की सारी…

  • ज़माने की हुक्मरानी | Ghazal Zamane ki Hukmarani

    ज़माने की हुक्मरानी ( Zamane ki Hukmarani ) भरी दिमागों में जिन जिन के बेइमानी है उन्हीं के बस में ज़माने की हुक्मरानी है बना रहे हैं ये नेता सियासी मोहरा हमें नशे में मस्त मगर अपनी नौजवानी है सितम शिआर मेरा हौसला तो देख ज़रा कटी ज़बान है छोड़ी न हक़ बयानी है खड़े…

  • आज की रात | Ghazal Aaj ki Raat

    आज की रात ( Aaj ki Raat ) आज की रात इधर से वो हो कर गुजरी लाख की बात सहर सी हो कर गुजरी थाम के हाथ चले थे जब भी वो मेरा वक्त के साथ नहर सी हो कर गुजरी मान कर बात कहा था उसने ऐसे ही चाह के हाथ लहर सी…

  • दिल लगा मत दिल्लगी में

    दिल लगा मत दिल्लगी में है सुकूँ बस दोस्ती में ! चैन उजड़े दुश्मनी में ए ख़ुदा पैसे मुझे दे जी रहा हूँ मुफ़लिसी में कौन मिलता प्यार से है अब नहीं उल्फ़त किसी में दे ख़ुशी अब तो खुदाया ग़म भरे है जिंदगी में हिज्र बस आज़म मिलेगा दिल लगा मत दिल्लगी में शायर: आज़म…