शेरो-शायरी

  • मतदान करें | Nazm Matdan Karo

    मतदान करें ( Matdan Karen ) ( 2 ) कोई नफरत की हवा न दो, चलो मतदान करें, पुरानी राख न कुरेदो, चलो मतदान करें। नया ख्वाब, नया भारत, नया मौसम है आया, गूँज रहे हैं फिजाओं में नारे,चलो मतदान करें। बदले की आग जला न दे तेरे मन का नक्शा, खता, वफ़ा, अदावत छोड़,चलो…

  • हुनर | Hunar

    हुनर  ( Hunar )   बेहतर से बेहतरीन की आस है, मुझको मेरे “हुनर” की तलाश है, मुझको सारा “आसमान” चाहिए, अभी तो फ़क़त..ज़मीं मेरे पास है, दिल के ही”तहखाने” में क़ैद हूँ मैं, इलाज बेमानी मेरे, ऐसी वैद्य हूँ मैं, अपने हुनर को चमकाना न आया, ऐसी कोरे काग़ज़ सी ‘सफेद’ हूँ मैं, माना…

  • मेहरबान | Meherbaan

    मेहरबान ( Meherbaan ) उन मेहरबान शख़्सियत के बारे में क्या लिखूं, उनको अपना रहबर या फिर सायबान लिखूं, उनकी बातों में एक अजब जादू सा होता है , जो दिल-ओ-ज़हन को अपनी ओर खिंचता है, एक घने दरख़्त की मानिंद मुझ पर साया किया है, मान-मनाए के रिश्ते को दिल से निभाया किया है,…

  • ख़्वाब में तुम | Ghazal Khwab mein Tum

    ख़्वाब में तुम ( Khwab mein Tum )   मेरे ख़्वाब में तुम आए थे या फ़क़त वहम था, तुम ही तुम दिख रहे थे ऐसा खोया ज़हन था, तुम्हारी कुर्बत का एहसास…कभी जाता नहीं, आँखें खुली तो दिल तन्हाईं से गया सहम था, ख़्वाब ही बेहतर लगते हैं मुझको हक़ीक़त से, ख़्वाब में सुकून…

  • इल्म की रौशनियाँ | Ilm ki Roshniyan

    इल्म की रौशनियाँ ( Ilm ki Roshniyan )   सही रास्ते की पहचान कराए इल्म की रौशनियाँ, गहरी खाई में हमें गिराए जहालत की तारीकियाँ, ज़िंदगी से कुछ लम्हे चुरा पनाह लेना किताबों में, बड़ा दिलफ़रेब पुरसुकूं होती किताबों की दुनियाँ, थक जाओ गर तुम रिश्ते की गिरहें सुलझाते हुए, किताबोंमें आराम पाएगी तुम्हारी बेबस…

  • दास्तान ए दिल | Dastan-e-Dil

    दास्तान ए दिल ( Dastan-e-Dil )   चले जाओगे इक रोज दूर मुझसे चले जायेंगे दूर हम भि तुझसे फ़क्र है तब भी मुझे तुझ पर यादों में हम जरूर आयेंगे निभा लो आज जैसा भि चाहो करें क्या शिकवा गिला तुमसे भले सिवा दिल के हमारे न हुए इक रोज हम भी रूह में…

  • नन्हीं लाडली | Nanhi Ladli

    नन्हीं लाडली ( Nanhi Ladli ) अम्मा की लाडली…अब्बा की प्यारी थी मैं, थोड़ी नटखट सी…थोड़ी गुस्से वाली थी मैं, मेरे अपनों के दिलों पे बस मेरा ही राज़ था, उनके होंठों पर मुस्कान बनके खिली थी मैं, न जाने कितनी ही हसरतें पलकों पे सजे थे, जब अब्बा की दहलीज़ छोड़के चली थी मैं,…

  • मन्नत | Poem Mannat

    मन्नत ( Mannat )   खूबसूरत है वो कुदरत मखमली लिबास हो जिसका, क्या मन्नत मांगू उस कुदरत से नाम ओंठो पर जिसका। मैं बात करूं तो कुदरत भी हैरानी की नज़र देखती है, छेड़-छाड़ हो रहा है कुदरत से क्या मायना रखती है। ग़ैर मुहज़्ज़ब है वो लोग जो कुदरत को अनदेखा करें, फ़ाजिर…

  • आ जाइए जनाब | Aa Jaiye Janab

    आ जाइए जनाब ( Aa Jaiye Janab )   होली उमड़ रही अभी आजाइए जनाब। व्यंजन बड़े लज़ीज़ हैं खा जाइएजनाब। सबपे चढ़ा हुआ यहां है इश्क रंग खास, तो देर किसलिए भला छा जाइए जनाब। छोड़ो शिकायतें सभी खुशियां अभी बटोर, दौलत बड़ी ये काम की पा जाइए जनाब। लेकर अबीर हाथ में दिल…

  • कैसा यह ज़माना | Kaisa yeh Zamana

    कैसा यह ज़माना ( Kaisa yeh Zamana )   देखो न अब आ गया है यह कैसा ज़माना, हर कोई जुटा है छिनने में दूसरों का दाना, काटके दरख़्तों को बनाया अपना बिछौना, बेघर कर छिन लिया परिंदों का आशियाना, सुबह घर से निकले तो शाम को लौटेंगे ही, घरका हश्र देख रुके कैसे उनका…