Holi ke chhand

होली | मनहरण घनाक्षरी | Holi ke chhand

होली

( Holi )

 

गोरा गोरा गाल गोरी,
राधा रंग ले आओ जी,
आओ खेलें संग होली,
रंग बरसाइये।

 

फूलों की होली भावन,
मत रंग लगाओ जी,
रंगीलो फागुन आयो,
मस्ती भर गाइये।

 

हंसी-खुशी मस्ती छाई,
होली आज मनाओ जी,
झूम झूम नाचो गाओ,
त्योहार मनाइये।

 

ले पिचकारी रंग की,
मोहन संग आवोजी,
चंग धमाल छा गई,
गुलाल लगाइये।

 ?

कवि : रमाकांत सोनी

नवलगढ़ जिला झुंझुनू

( राजस्थान )

यह भी पढ़ें :-

होली मुक्तक | Holi par Muktak

Similar Posts

  • सीमा | Seema par Chhand

    सीमा ( Seema )  मनहरण घनाक्षरी   सरहद पे जवान, चलते सीना तान। देश का सम्मान वीर, रखते संभाल के। लड़ते वीर सीमा पे, गोलाबारी गोली से। दुश्मन को मात देते, तिलक है भाल के। अटल सेनानी वीर, महा योद्धा रणवीर। पराक्रम दिखाते वो, तेवर कमाल के। भारतमाता के लाल, शूरवीर है कमाल। बुलंद हौसले…

  • कोहरा | Kohara par Chhand

    कोहरा ( Kohara  )    मनहरण घनाक्षरी   ठंडी ठंडी हवा चली, शीतलहर सी आई। ओस पड़ रही धुंध सी, देखो छाया कोहरा। ठिठुरते हाथ पांव, बर्फीली हवाएं चली। कुदरत का नजारा, कांप रही है धरा। धुआं धुआं सा छा रहा, धुंधली दिखती राहें। कोहरा की भरमार, संभल चले जरा। पड़ रही ओस बूंदे, पत्तों…

  • राम | घनाक्षरी छंद

    राम घनाक्षरी छंद ( 8,8,8,7 )   दोऊ भाई लगे प्यारे, बने धर्म के सहारे। फहराने धर्म ध्वजा, आये मेरे श्री राम।। दुखियों के दुख टारे, सब कुछ दिए वारे। वचन निभाने चले, वन को किए धाम।। राम -राज बना आज, पूरन हो सभी काज। बिगड़ी बनाते यही, रे – मन जपो नाम।। राम-राम रटे…

  • वृद्धाश्रम | Bridhashram Chhand

    वृद्धाश्रम ( Bridhashram )   मनहरण घनाक्षरी   पावन सा तीर्थ स्थल, अनुभवों का खजाना। बुजुर्गों का आश्रय है, वृद्धाश्रम आइए।   बुजुर्ग माता-पिता को, सुत दिखाते नयन। वटवृक्ष सी वो छाया, कभी ना सताइए।   हिल मिलकर सभी, करें सबका सम्मान। वृद्धाश्रम में प्रेम के, प्रसून खिलाइए।   जीवन के अनुभव, ज्ञान का सागर…

  • शिव महिमा -शिवगौरा

    शिव महिमा -शिवगौरा ( राधेश्मामी छंद ) शिव गौरा मुख बैठे नंदी, ये सावन लगा सुहाना है।अविनाशी की महिमा प्यारी,अब हर-हर भोले गाना है।झंकृत डमरू नाद सुरीला, वो बम बम भोला लहरी है।रम कर बैठे भोले बाबा,मन बसा प्रेम की नगरी है। गंगा धारण करने वाले,वो बम भोले भंडारी है।जो भी इनको मन से ध्याया,तो…

  • गजानंद | Chhand Gajanand

    गजानंद ( Gajanand )   मनहरण घनाक्षरी   गजानंद गौरी सुत, गणपति गणराज। विघ्नहर्ता पीर हरे, गणेश मनाइए।   आय पधारो देव हे, एकदंत विनायक। रिद्धि-सिद्धि संग प्रभु, लंबोदर आइए।   प्रथम पूज्य देव हे, संकटमोचन नाथ। यश कीर्ति वैभव दे, निशदिन ध्याइये।   सुख समृद्धि प्रदाता, श्री गणेश महाराज। मूषक वाहन सोहे, मोदक चढ़ाइए।…

One Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *