Chini par Kavita

चीनी है मीठा ज़हर | Chini par Kavita

चीनी है मीठा ज़हर

( Chini hai meetha zehar ) 

 

गुड़ सभी खाओ लेकिन यह चीनी कोई न खाओ,
समझो और समझाओं यह बात सबको बताओ।
यही चीनी है दुनिया मे सभी के लिए हानिकारक,
बिमारियों का घर बना देती है यारों इसे छुडाओ।।

यह चीनी शरीर में ट्राइ-ग्लिसराइड को बढ़ाता है,
जिससे पक्षाघात लकवा अटैक ख़तरा बढ़ता है।
ये कोलेस्ट्रॉल मोटापा व ब्लडप्रेशर भी बढ़ाता है,
एवम शरीर को खोखला व अनियंत्रित करता है।।

ये चीनी है मीठा ज़हर‌ धीरे-धीरे बना ‌देती बीमार,
कई हानिकारक रसायनों से इसको करतें तैयार।
डायबिटीज़ एवं मधुमेह का प्रमुख कारण है यही,
फिर भी खानें व जीवन शैली में ना करते सुधार।।

चिकित्सा मे इसकी मिठास को सुक्रोज़ है कहते,
जिसको इन्सान व जानवर दोनों पचा ना सकते।
अब हर इन्सान को इसके बारे में जानना चाहिए,
नुकसान ही नुकसान है फ़ायदे कुछ नही इसके।।

अंग्रेजों ने बिछाया था यही चाय, चीनी का जाल,
यें देशी गुड़ छुड़वाकर खडे़ कर गए कई सवाल।
चीनी बनाने में गन्धक का प्रयोग सर्वाधिक होता,
फिर भी आज मनुष्य इसका कर रहा इस्तेमाल।।

 

रचनाकार : गणपत लाल उदय
अजमेर ( राजस्थान )

Similar Posts

  • हमको नशा है | Kavita in Hindi on desh bhakti

    हमको नशा है ( Humko nasha hai )      हमको नशा है अपने वतन के ध्वज का, भारत के प्यारे अपने इस संविधान का। राष्ट्रीय-गीत और हमारे राष्ट्रीय-गान का, हिन्द का गौरव इस हिंदी राजभाषा का।।   राष्ट्रीय पक्षी मोर व राष्ट्रीय पशु बाघ का, खेल में हाकी व राष्ट्रीय मुद्रा रुपया का। चिन्ह…

  • शहर रात भर रोता रहा | Kavita shahar raat bhar rota raha

    शहर रात भर रोता रहा ( Shahar raat bhar rota raha )    त्रासदी ने झकझोर दिया भारी नुकसान होता रहा त्राहि त्राहि कर उठा हृदय शहर रात भर रोता रहा   जाने किसकी नजर लगी क्या अनहोनी आन पड़ी खुशियां सारी खफा हो गई जिंदगियां बेजान खड़ी   कुदरत का कोई कहर था कितना…

  • दोहा दशक | Doha Dashak

    दोहा दशक ( Doha Dashak )   फिर  चुनावी  मौसम  में, बारूदी  है  गंध। खबरों का फिर हो गया,मजहब से अनुबंध।   अपनों  से  है  दूरियां,उलझे हैं संबंध। भावों से आने लगी,कड़वाहट की गंध।   ढूंढ़ रहे हैं आप जो,सुख का इक आधार। समझौता  हालात  से, करिए  बारंबार।   उसका ही संसार में,है जीवन अति…

  • सेना की चाहत | Poem sena ki chahat

    सेना की चाहत ( Sena ki chahat )   मैं भारतीय सेना की आन,बान और शान हूं।     पर देश द्रोहियों के लिए मौत का सामान हूं।। भारत माता की रक्षा का चाहत लिए कटिबद्ध हूं।     अपने प्राण न्यौछावर करता देश का वीर जवान हूं।। जन्म देने वाली माँ से मैं भले…

  • बंजारा के दस कविताएं

    1 प्रवाह ——- सोचता हूं कि दुनिया की सारी बारूद मिट्टी बन जाये और मैं मिट्टी के गमलों में बीज रोप दूं विष उगलती मशीनगनों को प्रेम की विरासत सौप दूं . पर जमीन का कोई टुकड़ा अब सुरक्षित नहीं लगता . कि मैं सूनी सरहद पे निहत्था खड़ा अपने चश्मे से, धूल -जमी मिट्टी…

  • ओ निर्मोही | Kavita o nirmohi

    ओ निर्मोही ( O nirmohi )   ओ निर्मोही ओ निर्मोही चले गए क्यों, छोड मुझें परदेश। तपता मन ये तुम्हें बुलाए, लौट के आजा देश। तुम बिन जीना नही विदेशिया,पढ लेना संदेश। माटी मानुष तुम्हे बुलाए, छोड के आ परदेश।   2. चटोरी नयन  चटोरी नयन हो गयी, पिया मिलन की आस में। निहारत…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *