कोरोना का कहर
कोरोना का कहर

कोरोना का कहर

( Corona ka kahar )

 

 

हर सिम्त चल रही है,बस मौत की हवा।

थम  जाये  कोरोना, अब  कीजिए  दुआ।

 

संकट में नौकरी है,दहशत में ज़िन्दगी,

आई है कहर बनके,यह बला सी वबा।

 

भयभीत हैं सब लोग,दुबके हैं घरों में,

खता किसी की है,हमको मिली सजा।

 

उपचार  के बिना ही,मरने लगे हैं लोग,

सिस्टम की खराबी से,मिले बेड न दवा।

 

मॅंहगी  पड़ेगी  सबको, नियमों की उपेक्षा,

हैं मास्क ज़रूरी और,दो गज का फासला।

 

✍️

कवि बिनोद बेगाना

जमशेदपुर, झारखंड

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