Dhanyavad

धन्यवाद | Dhanyavad

धन्यवाद

( Dhanyavaad )

 

जीवन में सीख लेना सदा
मदद करे कोई जब तुम्हारी
धन्यवाद तुम्हारी प्रथम जिम्मेदारी
चाहे फिर छोटा या बड़ा हो कोई
धन्यवाद करना आदत हो तुम्हारी ।।

ये जीवन हैं बहुत ही छोटा सा
जो कभी सम्मान हो तुम्हारा
दिल खोल धन्यवाद करना यारा
मिलता हर घड़ी नया ही अनुभव
धन्यवाद भरा हो जीवन तुम्हारा ।।

जो तुम्हें कोई अच्छी बात सुनाए ,
सदा ही तुम्हारा भला जो भी चाहे
जब कोई मार्गदर्शन करे तुम्हारा
उस व्यक्ति को कभी भूल न जाना
धन्यवाद करके मानवता दिखाना ।।

आशी प्रतिभा दुबे (स्वतंत्र लेखिका)
ग्वालियर – मध्य प्रदेश

dubeyashi467@gmail.com

यह भी पढ़ें :-

गीता ज्ञान | Geeta Gyan

Similar Posts

  • पूस की ठंड | Poos ki thand par kavita

    पूस की ठंड ( Poos ki thand )    पूस की ठंडी ठिठुरन में तन मन जा रहा है कांप। आसमान तक फैली है सर्दी सूरज गया लंका दिशि चाप।।   बीती रात जब हुआ सवेरा धरती को कोहरे ने घेरा। दिन का है कुछ पता नहीं चारों तरफ बस धुआं अंधेरा।।   ठंड से…

  • जगाने कौन आया है | Geet

    जगाने कौन आया है ( Jagane kaun aaya hai )   भरी बरसात में मुझको जगाने कौन आया है, अंधेरी रात में दीपक जलाने कौन आया है।   ये कैसा कहर कुदरत का ये कैसा शहर मुर्दों का, खुशियों से कहीं ज्यादा लगे प्रभाव दर्दों का।   जगाओ चेतना अब तो बढ़ चलो आमरण सब…

  • नदिया | Kavita Nadiya

    नदिया ( Nadiya )   नदिया बही जा रही धीरे धीरे दरिया की ओर बढ़ी जा रही धीरे धीरे लगी है भीड़ नहाने की देखो कोई डूब रहा कोई डूबा रहा देखो चली ये कैसी हवा धीरे धीरे जहर हि दवा बनी धीरे धीरे बचना नहीं है किसी को नदी से चली आ रही हकीकत…

  • रात पूस की!

    रात पूस की! **** पवन पछुआ है बौराया, बढ़ी ठंड अति- हाड़ मांस है गलाया! नहीं है कोई कंबल रजाई, बिस्तर बर्फ हुई है भाई। किट किट किट किट दांत किटकिटा रहे हैं, कांपते शरीर में नींद कहां? निशा जैसे तैसे बिता रहे हैं। चुन बिन कर लाए हैं कुछ लकड़ियां- वहीं सुनगा रहे हैं,…

  • ऋषि नार | Rishi naar kavita

    ऋषि नार ( Rishi naar )   विश्वामित्र मुनि संग वन गए जब लक्ष्मण राम ताड़क वन ताड़का मारी रघुपति नंदन श्रीराम   मार्ग में प्रस्तर शिला बनी गौतम ऋषि घरनार अहिल्या पतित पावन तब प्रभु ने किया उद्धार   राम जी अवतारी है लक्ष्मण जी बलधारी है दीनों के रखवारे राम राम की लीला…

  • चीर को तुम | Cheer ko tum

    ” चीर को तुम “ ( Cheer ko tum )   समझ पाते अविरल चक्षु नीर को तुम। कब तक खींचोगे हमारे चीर को तुम।।   बहुत कुछ खोया तब पाया है तुम्हे, भूखी रहकर भी खिलाया  है तुम्हे।    आज मैं हर मोड़ पे मरने लगी हूं, मेरे उदरज तुमसे ही डरने लगी हूं।…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *