दिल को अब किसी की जरूरत नहीं | Dil ko Ab

दिल को अब किसी की जरूरत नहीं

( Dil ko ab kisi ki jarurat nahi )

 

ढूंढ लेता खुशियां दिल कहीं ना कहीं।
दिल को अब किसी की जरूरत नहीं।
आ गया अब जीना दुनिया में दिल को।
ठिकाना सुहाना प्रीत की सरिता बही।

सिंधु लेता हिलोरें मोती बरसे प्यार के।
मनमौजी मतवाला झूम उठा बहार में।
मन ही मन कितनी बातें दिल ने कही।
दिल को अब किसी की जरूरत नहीं।

दिल की बगिया महकी तराने फूट पड़े।
गीत ग़ज़ल छंद लबों से गाने छूट पड़े।
महफिल सजा देखो दिल झूमता वही।
दिल को अब किसी की जरूरत नहीं।

दिल हुआ है दीवाना झूमने गाने लगा।
मन को मोहित कर गीत सुनाने लगा।
भरी महफिल में घुल जाता दिल कहीं।
दिल को अब किसी की जरूरत नहीं।

 

कवि : रमाकांत सोनी

नवलगढ़ जिला झुंझुनू

( राजस्थान )

यह भी पढ़ें :

सबके सहारे राम | Sabke Sahare Ram

Similar Posts

  • अधर में आदमी | Kavita adhar mein aadmi

    अधर में आदमी ( Adhar mein aadmi )   अधर आदमी लटक रहा नीचे विषधर फैले हैं। भगवान रखवाला सबका जीवन के झमेले हैं।   जो दिग्गज है जोर उनका वही डोर हिलाते हैं। जो कमजोर पड़ा वक्त पे धराशाई हो जाते हैं।   महंगाई ने कमर तोड़ दी भागमभाग जिंदगी सारी। भ्रष्टाचार ने फन…

  • भाई में फौजी बणग्यो

    भाई में फौजी बणग्यो   छोड़ गाॅंवा की खेती-बाड़ी भाई में फ़ौजी बणग्यो, मूॅंछ मरोड़ कर निकलूं हूॅं भाई में नौकरी लागग्यो। गैंती फावड़ों और खुवाडयो‌ं चलाबो अब भूलग्यो, सीमा पर करुं रखवाली बन्दूक चलाबो सीखग्यो।। कलतक कोई न पूछतो अब रुतबो म्हारो बढ़ग्यो, आबा लागी घणी-सगाईया आज में भी परणग्यो। जनटर मनटर बणर आउॅंला…

  • बादल प्यारे | Kavita Badal Pyare

    बादल प्यारे ( Badal Pyare )   जल मग्न होती यह धरती घिर आए जब जून में बादल काले काले बदरा प्यारे प्यारे उमड़ घुमड़ जब छाए बादल।। अंबर से जब बरसे मेघ अमृत खुशहाली छाए झूम के आए बरखा की बहार संग ये सावन पुकारे धरती तुमको प्रिय बादल।। त्राहि त्राहि जब होता जग…

  • रक्तदान पर कविता

    रक्तदान पर कविता रक्तदान महादान, ईश्वर भक्ति के समान, वक्त में मिल जाए गर, बॅच सके किसी की जान, पुण्य हो कल्याण हो, सहृदयता का भान हो, सफल हो जीवन यात्रा, जब जरूरत मंद को, वक्त मे हम दान दें, रक्त की कुछ मात्रा, रक्त बिन जो जा रहा, लौट के न आएगा फिर, करो…

  • चापलूसी एक हूनर | Chaaploosi par kavita

    चापलूसी एक हूनर ( Chaaploosi ek hoonar )    चापलूसी भी एक कला है जो चमचागिरी कहलाती। सत्ता के गलियारों में यह नेताओं को बहुत लुभाती।   चापलूसी के दम पे कई शहरों में ठेकेदार बन आए। मीठी चाशनी में भीगे शब्द मोहक रसीले खूब भाए।   चमचों की संगठित टीम चापलूसी का हुनर रखते।…

  • वर्षा भैया भारी | Varsha bhaiya bhari

    वर्षा भैया भारी ( Varsha bhaiya bhari )   शाम  शाम  के  होन  लगी  है  वर्षा  भैया भारी, जगह जगह पे छिपन लगे है सबरे नर और नारी।   कहीं हवाये, कहीं है बिजली, कहूँ बरसो है भारी, एसो  मौसम  देख  देख  के  हमरो  दिल है भारी।   हो रहो हैरान किसान हमारो आंतक मच…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *