ईवीएम मशीन दुखियारी

ईवीएम मशीन दुखियारी

बिना बात के ही हैं कोसी जाती ,
फिर भी चुपचाप सब सह जाती
मशीन हैं इसलिए कुछ न कह पाती
झूठे सारे आरोप ये दुनिया लगती ।।

यही ईवीएम जब किसी पक्ष को जीताती
तो उस पक्ष की ये फिर सगी बन जाती
वही विपक्ष से तब ये खाती हैं गाली
झूठे परिणाम बताने वाली ये कहलाती ।।

ईवीएम मशीन काश बोल पाती
असहमति जताते हैं जो भी यहां
उन पर ये भेद ये सारे खोल पाती
हाय रे ईवीएम मशीन दुखियारी।।

जीत जाने पर ये सही हो जाती ,
परिणाम जो आए न हक में तो गलत हो जाती
अपने ही दिमाग की लगाते सब चाबी
कम बोट मिलने पर ये नकली हो जाती ।।

आज यदी कह पाती तो सबको बताती ,
इसकी निष्कपट भावना यह बतलाती
जिसका बटन दबाया होगा वोट उसी ने पाया होगा
यही बस में कहना चाहती ईवीएम मशीन दुखियारी।।

आशी प्रतिभा दुबे (स्वतंत्र लेखिका)
ग्वालियर – मध्य प्रदेश

यह भी पढ़ें :-

बुद्ध होना चाहती हूं | Buddh Hona Chahti Hoon

Similar Posts

  • दीप | Deep

    दीप ( Deep )    न सही विश्वास मेरा, पूछ ले उस दीप से। जो रात सारी रहा जलता, साथ मेरे बन प्रतिबम्ब।। हाल सारा जायेगा कह, दीप वह जो बुझ गया। जगने का सबब मेरा, और जलने के मजा।। मांगतीं विश्वास का बल, देख ले इक नजर भर। बस वही लेकर मैं संबल, जलती…

  • झूठ की दौड़ | Jhoot ki Daud

    झूठ की दौड़ ( Jhoot ki daud )    झूठ के मुरब्बों में मिठास तो बहुत होती है किंतु,देर सबेर हाजमा बिगड़ ही जाता है झालर मे रोशनी,और कागजी फूलों की महक जैसे…. हमाम मे तो नंगे होते हैं सभी बाहर मगर निकलते कहां हैं दाल मे नमक बराबर ही हो तो अच्छा शक्कर बराबर…

  • भारतीय संविधान | Samvidhan par kavita

    भारतीय संविधान ( Bhartiya samvidhan )    कोटि कोटि कंठो से निकली एक यही स्वर धारा है सबसे न्यारा सबसे प्यारा सुसंविधान  हमारा  है,   शत् शत् नवल प्रणाम तुम्हें एक तुम्हीं सहारा है बहते दरिया में नावों का सुंदर एक किनारा है ,   समता का अधिकार दिया यह शिक्षा का उजियारा है नारी…

  • गठबंधन | Kavita Gathbandhan

    गठबंधन ( Gathbandhan ) तेरे मेरे मिलन से हम लोग खुश है। मानो जैसे जिंदगी अब करीब आ गई हो। जतन किये थे हमने इसलिए मिल गये हो। और मेरी जिंदगी में फूल खिला दिये हो।। प्यार मोहब्बत करते नही तो हम दोनों मिल नहीं पाते। जिंदगी की हकीकत को हम समझ नही पाते। और…

  • किसानों का दर्द | Kavita Kisano ka Dard

    किसानों का दर्द ( Kavita Kisano ka Dard )      देख कर फसलों की सूरत जीवित है कौन? टूटकर  बिखरा  है   हृदय तन मन है मौन   छींट  कर  बीजों  को  मैंने उम्मीद पाली, काट दिया अब हाथ जैसे यह वर्फ जाली।   कष्ट भरा किससे कहें हम अपनी कहानी, ले   गया   आशाएं  सारा…

  • यूँ आजादी नहीं मिली है | Azadi par kavita

    यूँ आजादी नहीं मिली है ! ( Yun azadi nahi mili hai )    जिसने भी दिलायी आजादी, उन वीरों को सलाम है। जिसने खाई सीने पे गोली, उसको भी सलाम है।   यूँ आजादी नहीं मिली है, नदियों खून बहाया है। कितने घर के चराग बुझे, तब शुभ दिन ये आया है।   उस…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *