मौसम

मौसम | Beautiful Ghazal In Hindi

मौसम

( Mausam )

 

फिर बदलने को है

हवा सर्द होने जो लगे

धूप सुस्ताने लगे

चलो ,आओ,

इन कपड़ों,

पापड़, आचार के संग

फूफूंद लग रहे ये

अपने रिश्ते भी

कुछ देर

धूप में रख दें

फिर से ये

ताजा दम हो

कुछ निखर जायेंगे

कुछ संवर जायेंगे….

 

Suneet Sood Grover

लेखिका :- Suneet Sood Grover

अमृतसर ( पंजाब )

यह भी पढ़ें :-

बिखरा बिखरा |  Suneet Sood Grover Poetry

Similar Posts

  • Hindi Kavita | Hindi Poetry On Life | Hindi Poem -बाप

    बाप ( Baap ) १. बाप रहे अधियारे  घर में बेटवा क्यों उजियारे में छत के ऊपर बहू बिराजे क्यों माता नीचे ओसारे  में २. कैसा है जग का व्यवहार बाप बना बेटे का भार जीवन देने वाला दाता क्यों होता नहीं आज स्वीकार ३. कल तक जिसने बोझ उठाया आज वही क्यों  बोझ  बना…

  • नवरात्रि पर्व ( चैत्र ) सप्तम दिवस

    नवरात्रि पर्व ( चैत्र ) सप्तम दिवस हिल – मिल नवरात्रि पर्व का उत्सव मनाएं ।भुवाल – माता के सब मिल मंगल गीत गाएं।श्रद्धा और समर्पण का ले संबल चरण बढ़ायें।भुवाल माता के स्मरण से अध्यात्म दीप जलायें ।सागर में लहरें ज्यों अहं भावना का विलय करें ।आत्म – पक्ष के सही लक्ष्य को अपनायें…

  • हकीकत | Haqeeqat

    हकीकत ( Haqeeqat )   सजाने लगे हैं घर, फूल कागज के अब किसी भी चमन में रवानी नही है बुझे बुझे से हैं जज्बात दिलों के सभी अब किसी भी दिलों में जवानी नहीं है बन गया है शौक, खेल मुहब्बत का भीतर किसी को दिली लगाव नहीं है इल्म भी वफा के अब…

  • श्री गुरु चरण | Shri Guru Charan

    श्री गुरु चरण ( Shri Guru Charan )    श्री गुरु चरण कमल नित वंदन मुदित मना मानस मुनियों सा, ध्यान चिंतन उत्तम ज्ञान । नीतिमान निष्कपट सुनिष्ठ, सतत निरत नैतिक आह्वान । प्रेरणा पुंज व्यक्तित्व कृतित्व, चरित सुरभित सदृश चंदन । श्री गुरु चरण कमल नित वंदन ।। शमन दमन अंधविश्वास आडंबर, शुभ सुख…

  • कुंडली | Kundali par Kavita

    कुंडली ( Kundali )   आम जनता झेल रही विकट समय की मार कोरोना ने कर दिया जग का बंटाधार जग का बंटाधार कहर कोरोना बनकर डसता जहरी नाग कालिया जन को तनकर कह सोनी कविराय जगत का जीना हराम कैसी आई लहर संकट में पिसता आम   कवि : रमाकांत सोनी नवलगढ़ जिला झुंझुनू (…

  • नया साल | Poem Naya Saal

    नया साल ( Naya Saal )     सर्द सी इस शाम में सोचा कुछ तेरे नाम लिख दूँ…..   शायद लफ्ज़ों की गर्मी से पिघल जाये जमी है जो बर्फ तेरे मेरे दरमियां   गिले शिकवे जो हो ‘ गर चले जायें साथ ही जाते हुये साल के….   क्यों न आगाज़ करें इक…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *