Guru Gobind Singh Ji Par Kavita

सिखों के दसवे गुरु गुरुगोबिंद सिंह जी | Guru Gobind Singh Ji Par Kavita

सिखों के दसवे गुरु गुरुगोबिंद सिंह जी

( Poem on Guru Gobind Singh Ji in Hindi )

सिखों के दसवें गुरु, गुरु गोबिंद सिंह जी महान,
याद करता रहेगा आपको सदैव ही सारा जहान।
पौष-शुक्ला सप्तमी को हुआ था आपका जन्म,
सन्त और लेखक बनकर बनाई अमिट पहचान।।

प्रकाश पर्व के रूप में जन्मोत्सव मनाता है देश,
प्रेम एकता व भाईचारे का सदैव दिया है संदेश।
नही किसी से डरना और नही किसी को डराना,
ऐसी दी‌ है ढ़ेर शिक्षाएं और दिए अनेंक ‌उपदेश।।

कोई हुआ नही आप जैसा और नहीं कोई होगा,
जिंदगी में आपने वो देखा जो किस ने ना देखा।
आम इन्सान ऐसे रास्ते से भटक डगमगा जाता,
लेकिन आपके संग ऐसा कुछ भी नही हुआ था।।

परदादा गुरु अर्जुनदेव जी की शहादत से लेकर,
चारो पुत्रो की वीरता व शहीदो की मिसाल बनें।
कई घटनाएं घटित हुई फिर भी आप अडिग रहें,
महान सेनानी और खालसा पंथ संस्थापक बने।।

सभी सिखों के लिए पंच ककार अनिवार्य किये
केश, कंघा, कच्छा, कड़ा, कृपाण धारण किये।
चंडी दी वार जाप साहिब जफरनामा रचना रचें,
खालसा महिमा एवं बचित्र नाटक आप ही रचें।।

 

रचनाकार : गणपत लाल उदय
अजमेर ( राजस्थान )

 

Similar Posts

  • दुआ रही सबकी | Kavita Doa Rahi Sabki

    दुआ रही सबकी ये दुआ रही हम सबकी, हो जाए सारी जहां आपकी। यह खुशी का दिन सदा, आते रहे आपके जीवन में रोजाना। बनिए खिलकर सुगन्धित फूल। हो रोशनमय आपसे ,आपका कुल। जन्म का सद्फल है आपको पाना। माया के तम में ना हो कभी डगमगाना। नित गुणगान हो आपके व्यक्तित्व की। ये दुआ…

  • मुझको कभी भी आज़मा कर देख लेना | Poem aazma kar dekh lena

    मुझको कभी भी आज़मा कर देख लेना ( Mujhko kabhi bhi aazma kar dekh lena )     मुझको कभी भी आज़मा कर देख लेना। हो सके मुझसे दिल लगा कर देख लेना।।   एक पल भी मुझसे दूर नहीं रह पाओगे। कितना भी फासला बना कर देख लेना।।   चाहे लाख नज़रें भी चुराओ…

  • रास्ते | Raste

    रास्ते ( Raste )    खुले हैं अनगिनत रास्ते बंद नहीं द्वारा किसी का करना है चयन आपको इस पर बंधन नहीं किसी का रिश्ते भी निभाने हैं आपको पानी है कामयाबी भी चलना भी होगा अपने ही कदमों से बनानी होगी पहचान भी अलग से ही बाधाओं का जाल होगा उलझनों का जंजाल होगा…

  • दर्द की रेखा | Dard ki Rekha

    दर्द की रेखा ( Dard ki rekha )   जुडा हो जिसका रिश्ता दर्द से वही समझ सकता है किसी का दर्द मिली हो वसीयत जिसे पुरखों की उसे संस्कार भी मिला होना चाहिए सभ्यता तो देन है शिक्षित ज्ञान की व्यवहार भी देखकर सीख जाते हैं संस्कार ही पहचान कराते हैं ज्ञान की कपड़े…

  • सालासर बालाजी धाम | Kavita Salasar Balaji Dham

    सालासर बालाजी धाम   मनोकामनाएं पूर्ण हो रहीं, सालासर दरबार में राजस्थान सुजानगढ़ अवस्थित, बाला जी महाराज परम स्थल । हर कदम दिव्यता स्पंदन, आध्यात्म ओज प्रभाव सकल । दर्शन अनुपमा हर्षल प्रियल, अनंत खुशियां भक्त वत्सल चमत्कार में । मनोकामनाएं पूर्ण हो रहीं, सालासर दरबार में ।। शुभ स्थापना श्रेय मोहन दास , मूर्ति…

  • पेड़

    पेड़ ?   पत्र पुष्प फलादि माया कौन देता। पेड़ न होते तो छाया कौन देता।।   बगीचों को काट रेगिस्तान न कर, प्राण वायु जो खपाया कौन देता।।   पेड़ों में भी जान है जहान भी है, चूल्हे में लकड़ी लगाया कौन देता।   “दसपुत्र समद्रुमः”शेष बतलाते हो, औषधी जीवन बचाया कौन देता।  …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *