हमारी बेटी | Hamari Beti

हमारी बेटी

( Hamari Beti ) 

 

सारी बेटी सबसे ज्यादा होनहार है भारत की बेटी,
हम सब की बेटी और हैं सब भारत की बेटी।

घर में आती जिस दिन जब जन्म लेती है बेटी,
संसार और समाज का मान बढ़ाया करती है बेटी।

सम्भालती है हमेशा हमारे घर की डोर सदा अपनी बेटी,
नाम रोशन करती और सिर ऊंचा करती सदा अपनी बेटी।

दुर्गा, सावित्री,सीता और भी बहुत से रूपों में है बेटी,
लक्ष्मी, सरस्वती,राधा, रूक्मिणी के रूपो में है बेटी।

हर साल,हर युग में भी नयी दिशा देती है हमारी बेटी,
त्याग और बलिदान समर्पण की भावना है हमारी बेटी।

लड़ाई में लक्ष्मीबाई और अहिल्याबाई भी है हमारी बेटी,
आसमान में कल्पना सुनीता भी तैराकी में है हमारी बेटी।

खेल में मचलती रहती उषा, मल्लेश्वरी, सिन्धु हमारी बेटी,
खेल में उछलती रहती,मिताली,सानिया,बिछेनद्री हमारी बेटी।

चमकती है हमेशा विजया इन्दिरा सुषमा ये भी है हमारी बेटी,
कड़कती है प्रशासन में हमेशा किरन बेदी भी है हमारी बेटी ‌

मैत्रेयी गार्गी है विद्वानों में यह भी है हमारी बेटी,
अमृता प्रीतम, महादेवी वर्मा साहित्य में हमारी बेटी।

कोई मुकाम खाली नहीं आज के दिन जहां नहीं हमारी बेटी,
चुनौतियां का सामना कर जीतती है जीवन में हमारी बेटी ‌

भारत देश का मान सम्मान सदा रखेगी जीवन में हमारी बेटी,
मां बाप गांव मुहल्ले हरियाणा देश का अभिमान है हमारी बेटी।

ये सब सीमा पर लड़े और घर सम्भालती है सदा हमारी बेटी,
खान मनजीत के घर में भी एक बेटी जो इज्जत सम्भालती है हमेशा हमारी बेटी ‌।

Manjit Singh

मनजीत सिंह
सहायक प्राध्यापक उर्दू
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय ( कुरुक्षेत्र )

यह भी पढ़ें :-

कहां हो मेरे पुरखों | Kahan ho Mere Purakhon

Similar Posts

  • अलविदा से स्वागत

    अलविदा से स्वागत गुज़रा साल बहुत ही अच्छा था,हर हाल में इतिहास वह रचा था;गुजरा कल सारा वो भी सच्चा था,हर पल जो ख़ुशीओं में बीता था। वक्त आएगा और निकल जाएगा,सोच अपनी अपनी कैसे जिएगा;गर बुरी आदतों को छोड़कर रहेगा,अच्छी आदतों से खुशियां पाएगा। अब सारी बुराइयां हम मिटा देंगे,जीवन में सदा सभ्यता को…

  • हृदय मेरा पढ़ पाए | kavita

    हृदय मेरा पढ़ पाए ( Hriday mera padh paye )   अन्तर्मन में द्वंद बहुत है, जाकर किसे दिखाए। ढूंढ रहा हूँ ऐसा मन जो, हृदय मेरा पढ़ पाए।   मन की व्याकुलता को समझे,और मुझे समझाए। राह दिखे ना प्रतिद्वंदों से, तब मुझे राह दिखाए।   बोझिल मन पर मन रख करके,हल्के से मुस्काए।…

  • शिव आरती | Shiva Aarti

    शिव आरती ( Shiva Aarti )    ओम जय डमरूधारी, तेरी महिमा अतिभारी। मात -पिता तू मेरे, मात-पिता तू मेरे, आया तेरे द्वारी। ॐ जय डमरूधारी… (2) श्वेताम्बर, पीताम्बर सोहे अंग तेरे, शिव सोहे अंग तेरे। भांग, धतूर ही लाया, भांग, धतूर ही लाया और न कुछ मेरे। ओम जय डमरूधारी…. ओम जय डमरूधारी, तेरी…

  • शौक | Shauk

    शौक ( Shauk )   जले हैं हाथ हमारे चिरागों से आग की लपटों से खेलने का शौक नहीं उठे हैं सवाल नजरों पर भी हमारे जज्बातों से खेलने का हमे शौक नहीं यकीनन होने लगी है दिल से दिल्लगी किसी के ख्वाबों से खेलने का हमें शौक नहीं जहां बिकने लगी हो चाहतें अब…

  • मुल्क के सुमन | Poem Mulk ke Suman

    मुल्क के सुमन ( Mulk ke suman )   हम मुल्क के मासूम सुमन हम धरती माता के धन हम कोमल है पर सबल है धुर्ब जैसे सदैब अटल गगन उगलता आग हो छिड़ा मरण का राग हो लहू का अपना फाग हो हम वही अनुराग है क्या कर सकेगा दौरे जमां हमारा मिट जायेंगें…

  • गुरु कृपा | Guru Kripa

    गुरु कृपा ( Guru Kripa )   शब्द ही शब्द की परिभाषा थी शब्द थे उसके नेत्र शब्द का ज्ञान था उसमें शब्द ही उसके भेद दिया था यह शब्द ज्ञान जिसने वह गुरु कृपा ही थे ईश्वर कृपा से पहले उनकी कृपा थी उस गुरु कृपा बिन कैसे तर पाएंगे गुरु ज्ञान बिना ही…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *