Happy Birthday par Kavita

हैप्पी बर्थडे | Happy Birthday par Kavita

हैप्पी बर्थडे सेलिब्रेट

( Happy birthday celebrate ) 

 

घर-परिवार और रिश्तेदारों ने किया हमें विश,
लो जी आ गया फिर हमारा भी जन्म-दिवस।
बनवाकर लाये इस रोज़ बड़ा सारा एक कैक,
उजियारा था चारो तरफ़ बरसे धनाधन किश।।

जीवन का एक वर्ष हमारा हुआ इसदिन कम,
मोमबत्ती बुझाकर काटे है कैक झूमकर हम।
जगमग करते बल्ब जलाए एवं लगाएं गुब्बार,
देर रात तक नाचे उस दिन घर वाले संग हम।।

क़िस्मतों से मिलते है ऐसे बेहतर-बेहतर लोग,
शुभकामनाएं बधाइयां देकर सुनाएं वो जोक।
हंसी-मजाक में मल दिया मुंह पर हमारे कैक,
और मित्रों ने पिला दिया बीयर विस्की कोक।।

नही मनाया ४६ वर्षो में हमने ऐसा जन्म-दिन,
अर्द्धरात्रि तक नाच रहे सभी गानो की ये धून।
हैप्पी बर्थडे बोल बोलकर कर रहे थे सेलिब्रेट,
संस्कृति को भूल गये सब मित्र हो गये थे टून।।

जन्म-दिवस मनाने का यह कैसा आज चलन,
मुबारक बाद तो ठीक है नशें से हटाएं क़दम।
ख़ुशी से बीते सबका दिन और सुहानी ये रात,
सबसे अच्छा दूध-जलेबी खाएं कच्चा ब़दाम।।

 

रचनाकार : गणपत लाल उदय
अजमेर ( राजस्थान )

 

Similar Posts

  • छलकती जवानी | Kavita Chalakti jawani

    छलकती जवानी ( Chalakti jawani )    जुल्फों में खोने के दिन देखो आए, निगाहों से पीने के दिन देखो आए। छलकती जवानी पे दिल उसका आया, छूकर बदन मेरा दिल वो चुराया। सुलगती अगन को कैसे दबाएँ, निगाहों से पीने के दिन देखो आए, जुल्फों में खोने के दिन देखो आए। मेरी जिन्दगी का…

  • कम खाना और ग़म पीना | Kam Khana aur Gam Peena

    कम खाना और ग़म पीना ( Kam khana aur gam peena )    अपने इस स्वास्थ्य को बेहतर सभी रखना, खानें के लिए नही जीने के लिये है खाना। पाचनशक्ति ठीक व वज़न को कम रखना, सदा कम ही खाना एवं यह ग़म पी जाना।। बिना दवाईयों के सबको पेट ठीक रखना, स्वयं समझदार बनकर…

  • किताबी ज्ञान | Geet kitabi gyan

    किताबी ज्ञान ( Kitabi gyan )   जीवन का अनुभव सच्चा है झूठा है अभिमान ढाई आखर प्रेम का सच्चा व्यर्थ किताबी ज्ञान सभ्यता संस्कार जीवन में व्यवहार सिखाते हैं किताबी ज्ञान के दम पर मानव ठोकरें खाते हैं हम तूफां से टकराते हैं माना पुस्तक मार्गदर्शक राह सही दिखलाती है असल जिंदगी में तो…

  • तपती दोपहरी | Poem tapti dopahar

    तपती दोपहरी ( Tapti dopahar )   सन सन करती लूऐ चलती आसमां से अंगारे। चिलचिलाती दोपहरी में बेहाल हुए पंछी सारे।   आग उगलती सड़कें चौड़ी नभ से ज्वाला बरसे। बहे पसीना तन बदन से पानी को प्यासा तरसे।   आंधी तूफां नील गगन में चक्रवात चले भारी। गरम तवे सी जलती धरा फैले…

  • कहने को नया साल है

    कहने को नया साल है   कहने को नया साल है, मेरा तो वही हाल है। वही दिन महीने वही खाने-पीने वही मरना जीना जिंदगी का जहर पीना वही जी का जंजाल है .. कहने को नया साल है.. वही मन में सपने जो पूरे नहीं अपने जिसके लिए मन प्यासा हर साल नयी आशा…

  • कर्जदार | Karjdar | Kavita

    कर्जदार ( Karjdar)   धरती अंबर पर्वत नदियां सांसे हमने पाई है। पेड़ पौधे मस्त बहारें सब दे रहे हमें दुहाई है।   मातपिता का कर्ज हम पर प्रेम बरसाते। कर्जदार जन्मभूमि के पावन रिश्ते नाते।   देशभक्त मतवाले रहते जो अटल सीना तान। कर्जदार हम उनके लुटा गए वतन पर जान।   रात दिन…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *