Hey Kavi

हे कवि | Hey Kavi

हे! कवि 

( Hay kavi ) 

 

 

हे कवि! कविता कुछ खास लिखो

अंतर्मन का विश्वास लिखो

रुक रुक कर कलम चलाओ ना

खुल कर अपनी हर बात लिखो

 

तुम कवि तुमको अधिकार मिला

कलमों जैसा हथियार मिला

धिक्कार है तेरी कलमों को

यदि सच का ना इतिहास लिखा।

 

श्रृंगार वीरता लिखते हो

लिख व्यंग्य जोर से हंसते हो

अब कौन लिखेगा करुणा पर

क्यों देख देख चुप रहते हो।

 

लिख करोगे क्या कविता सारी

जब जख्म सहे हर दिन नारी

क्या दिखता नहीं न लिखते हो

क्यों बने हुए, कवि दरबारी।

 

उठ जगो जगाओ जगती को

मानव मानवता नियती को

लिख लिख कलमों से लिख जाओ

हे कवि! कविता के पंक्ती को।

 

उठ कलमों से संहार करो

कवि हो कवि का व्यवहार करो

या बंद करो लिखना कविता

पर सच को न शर्मशार करो

 

है धधक रही है आग यहां

तुम कलम लिए हो छिपे कहां

आजादी तुम्हीं दिलायी थी

फिर पड़ी जरूरत आज यहां

 

शासन का डर या नेता का

या अपने किसी चहेता का

ना कवि कवित्व बदनाम करो

लालच में किसी विजेता का।

 

छोड़ो कल परसों की बातें

अब आज की बातें आज लिखो

हे कवि! कविता कुछ खास लिखो

अंतर्मन का विश्वास लिखो।

रचनाकार रामबृक्ष बहादुरपुरी

( अम्बेडकरनगर )

यह भी पढ़ें :-

तेरे आने से | Beti ke Janam par Kavita

Similar Posts

  • भक्त से भगवान | Poem Bhakt Se Bhagwan

    भक्त से भगवान  ( Bhakt se bhagwan )   भक्त से भगवान का रिश्ता अनोखा होता हैl जब जब बजेगी बांसुरिया राधा को आना होता हैl द्रौपदी की एक पुकार पर वचन निभाना पड़ता हैl लाज बचाने बहना की प्रभु को आना पड़ता हैl मीरा के विश के प्याले को अमृत बनाना पड़ता हैl कृष्ण…

  • वो एक क़िताब | Kitaab par Kavita

    वो एक क़िताब ( Wo ek kitaab )    सम्पूर्ण इतिहास समेटकर रखती वो एक क़िताब, देश और विदेशों में पहचान बढ़ाती यही क़िताब। शक्ल सूरत से कैसे भी हो देती सबको ये सौगात, हर प्रश्न का उत्तर है एवं श्रेष्ठ सलाहकार क़िताब।। क़िताबें पढ़कर आगें बढ़ता संसार का यें नर नार, भरा पड़ा है…

  • घी दही संग खिचड़ी खाए

    घी दही संग खिचड़ी खाए विष्णु ने काटा असुर सिर,सिर गाड़ दिया मंदराचल परजीत सभी संक्रान्ति पर्व मनाये,रवि उत्तरार्द्ध होकर मकर जाए । चीनी की पट्टी, गुड़ का डुन्डा,तिल का लड्डू मन को भाये।कुरई में रखकर लाई चूरा,घी दही संग खिचड़ी खाये। राज्यों में अनेक नाम प्रसिद्ध,कहीं खिंचड़ी कहीं लोहड़ी तो,कही पोंगल माघी, उत्तरायण,देशवासी मकर…

  • जीत की आदत | Kavita jeet ki aadat

    जीत की आदत  ( Jeet ki aadat )  जीत की आदत बनाना ही होगा, ना करें बहाना आगे बढ़ना होगा। झूल रहीं उनकी मझधार में नैया, जो परेशानियों से घबराया होगा।।   जीतने का‌ जज़्बा रहता सब को, जीत लेते है जो पक्के ‌ठान लेते। सो बातों की है यह एक ही बात, निड़र होकर…

  • देवा श्री गणेशा | Deva Shree Ganesha

    देवा श्री गणेशा ( Deva shree ganesha )    रिद्धि सिद्धि के दाता सब विध्नहर्ता, सब कार्यों में प्रथम पूज्य शुभारंभ कर्ता। देवा श्री गणेशा……. सबसे निराले और विलक्षण रूप धारी, शुभ और लाभ दाता हैं मंगल कारी। देवा श्री गणेशा…… इनकी पूजा बिना न कोई काम होवे, इनको है भाते मावा, लड्डू और खोवे।…

  • चोर चोर मौसेरे भाई | Geet chor chor mausere bhai

    चोर चोर मौसेरे भाई ( Chor chor mausere bhai )   सड़क पुल नदिया निगले घोटालों की बाढ़ आई। चारा तक छोड़ा नहीं नेता वही जो खाए मलाई। महकमे में भ्रष्टाचार फैला लगे जैसे सुरसा आई। जनता की कमर तोड़ दी ऊपर से बढ़ती महंगाई। चोर चोर मौसेरे भाई,चोर चोर मौसेरे भाई   सांठगांठ से…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *