सुरेन्द्र पाल जी की स्मृति में

सुरेन्द्र पाल जी की स्मृति में

सुरेन्द्र पाल जी की स्मृति में

जब दिल पत्थर हो जाए
हंसते खेलते रोना आ जाए
मानवीय भावनाए
हमें जीवित रखने के लिए
कभी डिफ़ाल्ट होना पड़ जाए
हंसते खेलते रोना आ जाए
जब दिल पत्थर हो जाए।

पाल सर कभी खुशीयों की ताली बजवाते थे
मानवता और प्रेम का हमेशा पाठ पढ़ाते थे
हार को जीवित रखो विजय पथ पर बढ़ाते थे
कितनों की आप ढाल बन कर आए
जब दिल पत्थर हो जाए
हंसते खेलते रोना आ जाए ।

जब ऐसी स्थिति उत्पन्न होती है
व्यक्ति को अपनी परिस्थितियों
से निपटना ही पड़ता है।
कठिनाइयों को स्वीकार करना ही पड़ता है
हमें धैर्य रखना चाहिए.
फिर दिल पत्थर से धड़कता है!
हम आगे चलते जाएं
हंसते खेलते हुए रोना आ जाए।

हृदय में संवेदनशीलता का अभाव है।
वह दर्द बर्दाश्त नहीं कर सकता
सहानुभूति भी नहीं दिखा सकते
दूसरों का दर्द समझने में असमर्थता
विजया की आंखों में भी आंसू आ जाते हैं
ऐसे हृदय होने वाले
क्या आप समझ पाते
एक मानवतावादी का काम
जब दिल पत्थर हो जाए
फिर भी आंखों में पानी आए।

जब दिल पत्थर हो जाता है
नारियल जैसा लगता है
वह बाहर से सख्त दिखता है
लेकिन अंदर से नरम
लोग समझते हैं कि यह पत्थर है
जब दिल पत्थर हो जाए
हंसते खेलते हुए रोना आ जाए।

पिछली घटना
पिछले साल घटी
घासो ना बच पाया
मैं बहुत संवेदनशील हुआ
जज़्बाती हुआ रोना आया
वहीं किस्सा दोहराया कुदरत ने
कौमी बचेगा कुदरत से
वो क्या कोई इंसान जिसमें इंसानियत नहीं बची है
कहते हैं दिल पत्थर का होता है.
मनजीत खान की भावनाओं को नहीं समझती।

Manjit Singh

मनजीत सिंह
सहायक प्राध्यापक उर्दू
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय ( कुरुक्षेत्र )

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