सच्चाई (सत्य घटना पर आधारित)

सच्चाई (सत्य घटना पर आधारित)

जैसे ही यश पब्लिक स्कूल की छुट्टी हुई, वैसे ही कक्षा 10 में पढ़ने वाली प्रिया और रजनी घर जाने के लिए (अपनी बस में ना बैठकर) दूसरी बस में बैठ गई। गलत बस में बैठा देखकर उस बस से जाने वाली प्रिंसिपल मैडम सविता जी ने उन बच्चों से इस बस में बैठने का कारण पूछा। प्रिया बोली-

“प्रिंसिपल मैडम जी, हम आगे चौपला चौराहे पर उतर जाएंगे। हमें दयाल बुक डिपो से कुछ बुक्स खरीदनी है। बुक्स खरीदकर हम रिक्शा से घर चले जाएंगे। हमारा घर आगे पास ही है।”

किताबें खरीदने की बात सुनकर सविता जी ख़ामोश हो गई। उन्होंने उनसे और ज्यादा कुछ पूछना उचित न समझा। प्रिया काफी तेज तर्रार लड़की थी जबकि रजनी सीधी सादी। विपरीत स्वभाव का होने के बावजूद, उन दोनों की आपस में काफी घुटती थी।

सविता जी को घर पहुंचे हुए 2 घंटे बीत चुके थे। खाना बनाकर जैसे ही वे खाना खाने के लिए बैठी, तभी स्कूल के प्रबंधक महोदय मनोज की उन पर कॉल आई।

“सविता जी, कक्षा 10 में पढ़ने वाली प्रिया और रजनी अभी तक अपने घर नहीं पहुंची हैं। उनके बारे में आपको कोई जानकारी है?”

“क्या कहा सर, प्रिया और रजनी अभी तक घर नहीं पहुंची हैं?” सविता ने आगे बताते हुए कहा-

“सर, प्रिया और रजनी हमारी बस से ही दयाल बुक डिपो से किताबें खरीदने के लिए चौपले पर उतरी थी। उन्होंने बताया था कि उनका घर वहाँ से मात्र 20 मिनट की दूरी पर है।”

“मैडम जी, अब तो स्कूल की छुट्टी हुए 2 घंटे से ज्यादा हो गए हैं। उन्हें अब तक पहुंच जाना चाहिए था। मैडम जी, जब वे लड़कियों अपनी बस छोड़कर आपकी बस में बैठी थी तो आपको हमें इस बारे में बताना चाहिए था कि वे दोनों आपके पास दूसरी बस में है। हमने सभी अध्यापकों को इस बारे में निर्देश दे रखें हैं कि अगर इस तरह कोई बच्चा दूसरी बस में बैठकर घर जाता है तो इसकी सूचना स्कूल प्रबंधन को अवश्य दें ताकि किसी भी तरह की असुविधा से बचा जा सके। बच्चों को घर तक सकुशल पहुंचाने की जिम्मेदारी स्कूल की ही होती है। प्रिंसिपल होकर आपने खुद इस बात का ध्यान नहीं रखा।”

“सर, मुझे आपको इस बारे में बताने का बिल्कुल भी ध्यान नहीं रहा। यह मेरी गलती है। मुझे नहीं पता था कि वे लड़कियां ऐसा करेंगी। बुक सेलर से किताब खरीदने का बहाना बनाकर कहीं और निकल जाएंगी। मैं शर्मिंदा हूँ। मैं उन दोनों लड़कियों के दोस्तों/सहपाठियों से पता लगाने की कोशिश करती हूँ। जैसे ही बच्चियों के बारे में मुझे कोई सूचना मिलती हैं, मैं आपको तुरन्त बताती हूँ।”

“मैडम जी, बच्चों के मां-बाप बहुत परेशान है। उनके बार बार कॉल आ रहे हैं और इधर इन बच्चों ने हमारी परेशानी बढ़ा दी है। पता नहीं क्या सोचकर दूसरी बस में बैठे थे।”

“सर, मुझे जैसे ही उन बच्चों का पता चलता है, मैं आपको बताती हूँ।” यह कहकर सविता मैम ने फोन रख दिया।

सामने खाना रखा होने के बावजूद, सविता जी की भूख उड़ गई। सविता मैम आत्मग्लानि से भर गई। उन्हें खुद पर गुस्सा आ रहा था कि उनसे इतनी बड़ी गलती कैसे हो गई? पता नहीं बच्चियां कहां होंगी और किस हाल में होंगी। ईश्वर ना करें, अगर बच्चियों के साथ कहीं कुछ गलत हो गया तो वह खुद को कभी माफ नहीं कर पाएंगी।

सविता जी ने एक-एक करके प्रिया और रजनी के फ्रेंड्स/क्लासमेट्स को फोन करना शुरू किया और उनके बारे में जानकारी लेने का प्रयास किया, लेकिन कहीं से भी उनको कोई जानकारी/कोई खबर नहीं मिल सकी। एक घंटा बीत गया। 6 बज गए थे। वे निराश हो गई।उनकी आंखों में आंसू आ गए। बच्चियों के गायब होने से परेशान सविता जी घर में बने मन्दिर में जाकर बैठ गईं और भगवान से दोनों बच्चियों की सलामती हेतु प्रार्थना करने लगी।

लगभग 30 मिनट बाद, साढ़े छह बजे के लगभग, प्रिया की क्लासमेट दीपा (जिसको कुछ समय पहले उन्होंने कॉल की थी) की कॉल आई। कॉल उठाते ही सविता जी ने पूछा-

“दीपा, प्रिया और रजनी का कुछ पता चला?”

“नहीं मैडम जी, अभी उनका कुछ पता नहीं चल पाया है। मैडम जी, अगर आप मेरा नाम गुप्त रखें… मेरी पहचान छुपाएं तो मैं आपको प्रिया और रजनी के बारे में कुछ बताना चाहती हूँ।”

“बिल्कुल, बताओ दीपा। तुम्हें मुझसे घबराने की कोई जरूरत नहीं है।”

“मैडम जी, आपको शायद पता नहीं… स्कूल प्रबंधक महोदय मनोज जी मेरे ताऊजी लगते हैं। अगर उन्हें मेरे बारे में पता चला तो वे बहुत गुस्सा होंगे। इसलिए मैं उनसे बात ना करके… आपसे प्रिया और रजनी के बारे में जानकारी शेयर करना चाहती हूँ।”

“बताओ प्रिया। तुम विश्वास रखो। मैं तुमसे प्रॉमिस करती हूं कि तुम पर कोई आंच नहीं आएगी और ना ही कहीं तुम्हारा नाम आएगा।”

आश्वस्त होकर दीपा ने बताना शुरू किया-
“मैडम जी, प्रिया और रजनी हमारे स्कूल के ही अध्यापक इब्राहिम सर … जो कि हमें मैथ पढ़ते हैं…से खूब चैटिंग करती है। उसने इब्राहिम सर से अपनी चैटिंग मुझे एक बार दिखाई भी थी। एक दिन प्रिया और रजनी ने मुझे बताया था कि ‘इब्राहिम सर हमें बहुत प्यार करते हैं। हमसे रोज खूब चैटिंग करते हैं।

एक दिन वे हमें बाहर घुमाने लेकर जाएंगे। वहां हम खूब मस्ती करेंगे। नए-नए पकवान चखेंगे, आइसक्रीम खाएंगे। सर ने हमें नए कपड़े दिलाने की भी बात कही है। कभी-कभी मौका मिलने पर इब्राहिम सर हमें चोरी से कुछ रुपए भी दे देते हैं ताकि हम अपनी पसंद की चीजें खा सकें/खरीद सकें।’ मैडम जी, हो ना हो… मुझे लगता है कि प्रिया व रजनी कहीं इब्राहिम सर के साथ ही तो घूमने ना निकल गई हों… क्योंकि आज से स्कूल की 3 दिन की छुट्टियां हैं।”

“हाँ, ऐसा हो सकता है। धन्यवाद दीपा.. इतनी महत्वपूर्ण जानकारी देने के लिए। तुम निश्चिंत रहो। इस मामले में कहीं भी तुम्हारा नाम नहीं आएगा।” यह कहकर सविता जी ने फोन रख दिया।

सविता जी को यकीन नहीं हो रहा था कि इब्राहिम सर ऐसा भी कर सकते हैं। इब्राहिम सर का ऐसा घिनौना रूप भी हो सकता है… जो वे बच्चियों को गुमराह करने के लिए या अपने जाल में फंसाने के लिए… फोन पर उनसे चैटिंग तक करने लगे… कितने शर्म की बात है।

इब्राहिम सर हमसे कितनी अच्छी तरह से पेश आते हैं लेकिन अब देखो… पीठ पीछे बच्चियों पर कुदृष्टि रखते थे। सोचते होंगे कि टीनएज की लड़कियां है, आराम से उनके झांसे में आ जाएंगी, चंगुल में फंस जाएंगी। बताओ, उन्हें फंसाने के लिए मीठी-मीठी बातें बनाते हैं, रुपए तक देते हैं… घूमने ले जाने, शॉपिंग करने का लालच देते हैं। धिक्कार है ऐसे दोहरे चरित्र वाले अध्यापक पर।

मन में इब्राहिम की छवि को लेकर चल रहे सवालों को दरकिनार कर, उन्होंने देर ना करते हुए तुरंत स्कूल प्रबंधक महोदय मनोज जी को कॉल लगाकर… उन्हें इब्राहिम सर के बारे में सब कुछ विस्तार से बताया कि किस तरह वे प्रिया और रजनी से चैटिंग करते थे और उन्हें कहीं दूर घुमाने ले जाने की बात करते थे।

सविता जी से बात करने के बाद, प्रबंधक महोदय ने इब्राहिम सर को कॉल की तो उनका फोन स्विच ऑफ आया तो उनका शक और गहरा हो गया। उन्होंने इब्राहिम सर के पिता रईसउद्दीन पर कॉल की तो पता चला कि इब्राहिम सर अभी तक घर नहीं आए हैं और उनका फोन भी बंद है। वे भी उनसे संपर्क करने की कोशिश कर रहे हैं। अब शक की सारी सुइयां इब्राहिम सर की ओर थी। स्कूल प्रबंधक महोदय उस दिन घर ना जाकर स्कूल में ही मौजूद रहकर बच्चियों व इब्राहिम का पता लगाने की लगातार कोशिश कर रहे थे।

रात को 8:00 बजे के लगभग इब्राहिम स्कूल में मनोज जी के पास पहुंचा। उनको देखते ही प्रबंधक महोदय ने कहा-

“आप कहाँ थे सर? शाम 6:00 बजे से हम लगातार आपसे संपर्क करने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन आपका नंबर बन्द जा रहा था।”

“सर, मैं अपने फ्रेंड असलम के यहां चला गया था और मेरे मोबाइल की बैटरी डाउन हो गई थी। मुझे पिताजी से जैसे ही पता चला कि आपने मुझसे संपर्क करने की कोशिश की है और स्कूल की दो लड़कियां गायब हैं… तो मैं बिना देरी किए तुरंत आपके पास यहाँ चला आया। बताओ सर, मैं आपकी कैसे मदद कर सकता हूँ?” इत्मीनान से कुर्सी पर बैठते हुए इब्राहिम ने कहा।

“मुझे उन लड़कियों के बारे में आपसे बात करनी थी। मुझे विश्वसनीय सूत्रों से पता चला है कि आपकी उन लड़कियों से खूब बातें होती थी, चैटिंग होती थी। तुम उन्हें कहीं घुमाने भी ले जाने वाले थे। आपका उनके प्रति विशेष लगाव था। क्लास में आप उन पर ज्यादा ध्यान देते थे और उनकी ओर देखकर मुस्कराते थे, इशारे भी करते थे। सच-सच बताओ कि वे लड़कियां किधर हैं। मैं आपको बचा लूंगा, आप मुझसे कोई बात छुपाओ मत।”

“सर, ये आप क्या बोल रहे हैं? आप मुझ पर झूठा आरोप लगा रहे हैं। जहां तक लगाव या प्रेम की बात है तो… हर बच्चा मेरी नजर में समान है। एक टीचर कभी बच्चों में भेदभाव नहीं करता। हाँ, यह सच है कि मेरा क्लास के हर बच्चे से दोस्ताना व्यवहार था। जहां तक लड़कियों से चैटिंग या बात करने का मामला है तो मैं भला उन बच्चियों से क्यों बातें करूंगा? वे मासूम हैं।

उनसे बात करके मुझे क्या मिलेगा? ऐसा घिनौना काम भला मैं क्यों करूंगा? सर, आप खुद सोचो। अगर मैं गलत होता या उन लड़कियों को गायब करने में मेरा हाथ होता तो मैं भला यहाँ क्यों आता। आप चाहो तो मेरे फोन की डिटेल निकलवा सकते हो। उससे दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा। मैं आपके साथ हूँ। मैं भी लड़कियों का पता लगाने की कोशिश करता हूँ।” इब्राहिम की निसंकोच बातें सुनकर प्रबंधक महोदय आश्वस्त हो गए कि बच्चों के गायब होने में इब्राहिम सर का कोई रोल नहीं है। अगर वह गलत होता तो वह यहां आता ही क्यों?

इब्राहिम के जाने के बाद मनोज जी ने सविता जी को कॉल करके इब्राहिम सर के आने और उससे हुई सभी बातों को बताया। सविता जी ने शंका जाहिर करते हुए कहा-

‘सर, जिस बच्ची ने मुझे इब्राहिम सर के बारे में… प्रिया और रजनी से उनकी बातों के बारे में बताया है… वह 100% सत्य है। वह बच्ची मुझसे झूठ नहीं बोल सकती। मुझे उस बच्ची की बातों पर पूरा यकीन है। निश्चित तौर पर उन दोनों बच्चियों के लापता होने के पीछे इब्राहिम सर का ही हाथ है।

तभी तो उन्होंने अपना मोबाइल शाम से ही बंद कर रखा था। हो सकता है कि उन लड़कियों को अपने गुप्त व सुरक्षित स्थान पर छुपाकर… इब्राहिम खुद को बेगुनाह साबित करने के इरादे से आपसे मिलने आया हो ताकि कोई उन पर शक ना करें।

3:00 बजे से लेकर अब तक लगभग 6 घंटे हो चुके हैं। इन 6 घंटे में बच्चियों के साथ बहुत कुछ हो सकता है। इब्राहिम सैकड़ो किलोमीटर दूर उन्हें छोड़कर यहाँ वापस भी आ सकता है। सर, मुझे बहुत डर लग रहा है। आप प्लीज प्रिया और रजनी के लापता होने की शिकायत पुलिस में दर्ज करा के आओ। पुलिस ही इब्राहिम को कस्टडी में लेकर सच-झूठ का पता लगा लेगी।

मोबाइल की डिटेल निकलने से यह भी पता चल जायेगा कि इब्राहिम की प्रिया और रजनी से क्या-क्या बातें हुई? कितनी बातें हुई? कब-कब बातें हुई? उनकी चैटिंग होती थी या नहीं? यह भी पता चल जायेगा। सर, आपको इब्राहिम को इस तरह जाने नहीं देना चाहिए था। उस पर नज़र रखनी चाहिए थी। हमारा शक उस पर है, यह जानकर अब वह और अलर्ट हो जायेगा।”

मनोज जी को सविता जी की बातों में वजन नजर आया। उन्हें महसूस होने लगा कि हाँ, ऐसा हो सकता है कि इब्राहिम खुद को बेगुनाह साबित करने के इरादे से, लड़कियों को कहीं ठिकाने लगाकर/छुपाकर यहां मुझसे मिलने वापस आया हो।

प्रबंधक महोदय मनोज जी ने मौके की नजाकत जानकर तुरंत पुलिस में ‘दोनों बच्चियों के लापता होने में इब्राहिम की संदिग्ध भूमिका होने की व उसको कस्टडी में लेकर पूछताछ करने’ की शिकायत दर्ज कराई। लड़कियों का मामला था तो पुलिस तुरन्त एक्शन में आ गई। पुलिस ने इब्राहिम से संपर्क करने की कोशिश की तो इस बार भी उसका मोबाइल बन्द पाया गया। उस रात इब्राहिम घर भी नहीं पहुंचा था। शक की सुईं अब इब्राहिम की तरफ थी। इब्राहिम की हरकतें संदिग्ध थी।

अगले दिन बड़ी मशक्कत से पुलिस ने इब्राहिम की लोकेशन का पता लगाकर उसको गिरफ्तार करके, दोनों बच्चियों के बारे में पूछा, लेकिन उसने अपनी जुबान न खोली। हर बार वह खुद को बेकसूर बताता रहा। मजबूरन पुलिस को अपने तरीके से… मार पिटाई करके उससे पूछना पड़ा। इस बार भी इब्राहिम ने कुछ भी बताने से परहेज किया और पुलिस से कहा कि मुझे मुसलमान होने के नाते फंसाया जा रहा है। मेरा बच्चियों के गायब होने के पीछे कोई रोल नहीं है।

अगले दिन उसी स्कूल के कक्षा 10 के छात्र फैजान पर फेसबुक मैसेंजर पर प्रिया का मैसेज आया-

“कैसे हो फैजान? क्या तुमसे बात हो सकती है?”

प्रिया का उसके पास पहले कभी मैसेज नहीं आया था। इस तरह अचानक आये मैसेज को देखकर फैजान डर गया। प्रिया और रजनी के गायब होने की खबर स्कूल के हर बच्चे, अभिभावक तक पहुंच गई थी। फैजान ने अपने पिता को प्रिया की आईडी से मैसेज आने की बात बताई। फैजान के पिता रहीम उसको लेकर पुलिस स्टेशन पहुंचे। मैसेज देखकर पुलिस वालों ने फैजान पर ही आरोप लगाने और उससे प्रेम प्रसंग का आरोप लगाने की कोशिश की। फैजान के पिता रहीम को पुलिसवालों पर गुस्सा आ गया।

“आप लोगों के ऐसे व्यवहार से ही सीधे-साधे व्यक्ति पुलिस स्टेशन आने से/ शिकायत दर्ज करने से बचते हैं। जो शिकायत करने आता है, आप लोग उसी को दोषी बना देते हो। यह गलत है। आप खुद सोचो, अगर मेरा बेटा गलत होता तो क्या वह मुझे प्रिया के मैसेज के बारे में बताता? हम तो खुद बच्चियों के लापता होने पर दुखी हैं। हमारा बच्चा भी उन्हीं बच्चियों की क्लास में पढ़ता है।

अगर प्रिया की जगह हमारे बच्चे के साथ ही कुछ गलत हो जाता, हमारा बच्चा गायब हो जाता तो क्या होता? यही सोचकर हम उन बच्चियों की मदद के लिए आगे आए। क्या पता फैजान के नम्बर पर आये इस मैसेज की मदद से आप लड़कियों का पता लगा सकें कि वे आखिर है कहाँ? या फिर यह मैसेज किसने किया है? इसकी जानकारी मिल सके।”

मौके की नजाकत देखकर पुलिसवालों ने फैजान के पिता से अपने गलत व्यवहार की माफी मांगी और उनको जाने दिया।

इस घटना के 3 दिन बाद जब स्कूल खुला तो इब्राहिम सर भी स्कूल आये थे। प्रिया व रजनी स्कूल नहीं आयी थी। प्रार्थना सभा के दौरान प्रबंधक महोदय मनोज जी ने सभी अध्यापकों व स्कूल स्टॉफ की मौजूदगी में बच्चों को संबोधित करते हुए कहा-

“प्यारे बच्चों, पिछले तीन दिन हमारे लिए काफी कष्टकारी रहे हैं। जैसे कि आपको पता है कि स्कूल की दो लड़कियां छुट्टी में दूसरी बस में बैठकर चौपले चौराहे पर उतरकर अपनी बुआ के घर घूमने घूमने चली गई थी। इधर हम सब लोग, बच्चियों के मां-बाप उन बच्चों को हर जगह ढूंढते रहे, बहुत परेशान रहे। मेरा आप सभी बच्चों से निवेदन है कि आप सब ऐसा कोई काम ना करें जिससे तुम्हारे मां-बाप को या तुम्हारे अध्यापकों को दिक्कत हो। याद रखना, जिस बस से आप स्कूल आते हो, उसी से जाना है।

घर पहुंचकर ही अपने मम्मी पापा को बताकर निकलना है। यह ध्यान रखना कि स्कूल से घर तक सकुशल पहुंचाने की जिम्मेदारी हमारी होती हैं। आप लोगों की सुरक्षा हमारी जिम्मेदारी है। आपकी सुरक्षा के मद्देनजर हम हर बस में, आज से जीपीएस लगवा रहे हैं ताकि बस की और आपकी घर पहुंचने की लोकेशन का हमें पता चलता रहे। आपसे विनम्र निवेदन है कि आप जो भी काम करें, अपने माता-पिता या अध्यापक के संज्ञान में डालकर करें।

यही सभी के लिए अच्छा होगा। किसी से नाराज होकर, गुस्सा होकर कोई काम ना करें। इस घटना के बाद अध्यापक भी पूरी सतर्कता व जिम्मेदारी से बच्चों के प्रति पूरी ड्यूटी निभाएंगे, ऐसी उम्मीद करते हैं।” इसके बाद सभी अध्यापक और बच्चे अपनी अपनी कक्षाओं में चले गए।

स्कूल की इमेज खराब ना हो। इस बात को ध्यान में रखकर प्रबंधक महोदय ने असेंबली में इब्राहिम सर पर किसी तरह का कोई दोष ना लगाया। जबकि सच्चाई यही थी कि उन दोनों बच्चियों को गायब होने के पीछे इब्राहिम सर का ही हाथ था। उन दोनों बच्चियों को इब्राहिम सर कहीं दूर छोड़ आए थे। वहां से वे दोनों लड़कियां कहीं दूर दूसरे शहर में भेजी जाती या बेची जाती। हो सकता था कि उनका शारीरिक शोषण होता या उनके अंग निकालकर उन्हें मार दिया जाता। उनके साथ कुछ भी हो सकता था।

वे दोनों लड़कियों अपनी नासमझी के कारण गहरी दलदल में लगभग फंस गई थी, लेकिन जब इब्राहिम पकड़ा गया तो उसके साथियों ने प्रिया के फोन से फैजान को मैसेज करके इब्राहिम की ओर से ध्यान हटाने की कोशिश की। यह सब सोची समझी रणनीति के तहत किया गया था।

मोबाइल को बंद रखना भी इसी प्लानिंग का हिस्सा था ताकि लोकेशन का पता न चले। जब भी इब्राहिम मोबाइल खोले तो उसकी लोकेशन उसकी अपने शहर की पाई जाए। पुलिस ने इब्राहिम के मोबाइल की जांच कराई तो पता चला कि इब्राहिम फेसबुक मैसेंजर से ही स्कूल की बहुत सी लड़कियों से बात करता था।

कई बार उसने व्हाट्सएप से भी उन लड़कियों से संपर्क साधने की कोशिश की थी, चैटिंग की थी। इब्राहिम को छुड़ाने के लिए इब्राहिम के दोस्तों को मजबूरी में उन लड़कियों को छोड़ना पड़ा था। अगर वे ऐसा न करते तो उनके भी पकड़े जाने का डर था। यह साबित हो चुका था कि इब्राहीम दोषी है लेकिन पुलिस ने एक मोटी रकम लेकर इब्राहिम के खिलाफ कोई केस दर्ज नहीं किया।

लड़कियों को, उनके परिवार को बदनामी से बचाने के लिए तथा स्कूल की रेपुटेशन बचाने के लिए… बच्चियों द्वारा बुआ के घर चली जाने का खेल रचा गया। स्कूल की झूठी शान व इज्जत बचाने की खातिर मजबूरी में स्कूल प्रबंधन ने इब्राहिम को तुरंत स्कूल से निष्कासित नहीं किया। मामला ठंडा होने के बाद (लगभग एक माह बाद) इब्राहिम को विद्यालय से निकाल दिया गया।

अगर उक्त घटना के तुरंत बाद इब्राहिम को विद्यालय से निकाल दिया होता तो स्कूल प्रशासन व स्कूल स्टॉफ की कार्यशैली पर प्रश्न चिन्ह लग जाता। प्रिया व रजनी इस घटना के बाद पूरे वर्ष, ना के बराबर ही स्कूल आई। वे सिर्फ एग्जाम/वायवा देने ही स्कूल आती थी। उन्होंने नियमित स्कूल आना छोड़ दिया था।

अगर वास्तव में वे बुआ के घर गई होती तो उन्हें इस तरह मुंह छुपाने की जरूरत ही नहीं पड़ती। अभिभावकों/स्कूल प्रबंधन को डर था कि कहीं स्कूल नियमित आने पर दोनों बच्चियां.. अन्य बच्चों या अपने सहपाठियों को सच्चाई ना बता दें। जरूर बच्चियों के साथ कुछ गलत हुआ था। इस तरह एक बहुत बड़ी घटना को/सच्चाई को सबके सामने आने से रोक दिया गया।

आखिर बच्चियों व उनके अभिभावकों की तथा स्कूल की इज्जत का जो सवाल था। मनोज जी व पुलिस के अलावा, इस घटना की पूरी सच्चाई अगर किसी को पता थी तो वह सिर्फ सविता जी थी।

लेखक:- डॉ० भूपेंद्र सिंह, अमरोहा

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