होली

फागुन के दिन | Holi Poem in Hindi

 फागुन के दिन

( Phagun ke din )

 

फागुन  के  दिन थोडे रह गए, मन में उडे उमंग।

काम काज में मन नाहि लागे,चढा श्याम दा रंग।

 

रंग  बसन्ती  ढंग बसन्ती, तोरा अंग  बसन्ती  लागे,

ढुलमुल ढुलमुल चाल चले,तोरा संग बसन्ती लागे।

 

नयन से नयन मिला लो हमसें, बिना पलक झपकाए।

जिसका पहले पलक झपक जाए, उसको रंग लगाए।

 

बरसाने  में  राधा  नाचे, वृन्दावन मे श्याम।

अवधपुरी में सीता संग, होली खेले रघुराम।

 

काशी में शिव शम्भू नाचें, पीकर भांग गुलाब।

शेर  हृदय  में  मस्ती  छाई, नीला पीला लाल।

 

हे त्रिपुरारी अवध बिहारी, हर लो हर संताप।

ऐसी  खुंशबू  उडे रंग में, मिट जाए हर पाप।

 

कवि :  शेर सिंह हुंकार

देवरिया ( उत्तर प्रदेश )

शेर सिंह हुंकार जी की आवाज़ में ये कविता सुनने के लिए ऊपर के लिंक को क्लिक करे

यह भी पढ़ें : –

खुशियों की कैसी जिद्द तेरी | Poem Khushiyon ki Zid

Similar Posts

  • कैसे लिखू | Kaise Likhoon

    कैसे लिखू ( Kaise Likhoon )   कैसे लिखू प्रेम गीत जब वर्दी खून से भीगे है कैसे देखूं बसंत के फूल जब आंख अश्रु से भीगे हैं कैसे भेजूं मैं प्रियसी को फूल जो मेरे भाई को चढ़ने है कैसे लिखू प्रेम गीत जब हृदय का रोना जारी है कैसे गाऊं मै प्रेम गीत…

  • मत करो इसरार जी | Ishrar par kavita

    मत करो इसरार जी ( Mat karo ishrar ji )   हर किसी को चाहिए, अधिकार ही अधिकार जी। कोई भी करता नहीं , कर्तव्यहित व्यवहार जी।। बिन दिए मिलता नहीं है, बात इतनी जान लो, प्यार गर पाना है तो, देना पड़ेगा प्यार जी।। दूसरो को दोगे इज्जत, होगी तब हासिल तुम्हें, कब भला…

  • ट्वीटर की धृष्टता

    ट्वीटर की धृष्टता ***** ट्वीटर वालों ने हमारे देश की आजादी, संप्रभुता, उदारता से खिलवाड़ किया है धृष्टता की है,मूर्खता की है इतना ही नहीं तकनीकी खामी बता- आरोपों से बचने की कोशिश की है। हमारी संप्रभुता से खिलवाड़ किया है, जम्मू एवं कश्मीर को- चीन में दिखाने का दुस्साहस किया है; लद्दाख को- जम्मू-कश्मीर…

  • कलम | Kalam

    कलम ( Kalam ) हाँ, मैं कलम हूँ रहती हूँ मैं उंगलियों के मध्य लिख देती हूं कोरे कागज पर जो है मेरी मंजिल पर खींच देती हूँ मैं टेढ़ी-मेढ़ी लाइनों से मानव का मुकद्दर छू लेता है आसमां कोई या फिर जमीं पर रह जाता है या किसी की कहानी या इबारत लिख देती…

  • लंपी वायरस | Lumpy virus par kavita

    लंपी वायरस ( Lumpy Virus )   हजारों मवेशियों को निगल चुकीं आज यह बीमारी, बड़ी चुनौती बन गया आज लंपी वायरस यें बीमारी। ख़ासतौर राजस्थान में जिसका टूट रहा कहर भारी, संक्रमित पशु से फ़ैल रहीं दूसरे पशुओ में महामारी।। त्वचा पे गांठें बन जाना चारा ना खाकर सूख जाना, न घूमना न फिरना…

  • ज़मीर | Poem zameer

    ज़मीर ( Zameer )   आज फिर से ज़मीर का इक सवाल उठाती हूं मंचासीन के कानों तक ये आवाज़ पहुंचाती हूं   उनके स्वार्थ से बुझ गए हैं कुछ दीप खुशियों के ज़रा ठहरो कि पहले उनकी ज्योत जलाती हूं।   बना कर कुटुम्ब विशाल फिर क्यूँ आपस में लड़ते हो जिम्मेदारियाँ निभाने की…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *